क्रिकेटर बनने का सपना रहा अधूरा पर एक फैसले ने पहुँचाया हॉलीवुड ; जानें इरफ़ान खान की प्रेरक यात्रा
इरफान खान की पुण्यतिथि पर जानिए उनके जीवन, संघर्ष और शानदार करियर की पूरी कहानी। 53 वर्ष की आयु में 2020 में निधन के छह साल बाद भी उनकी फिल्में और अभिनय आज भी दर्शकों के दिलों में जीवित हैं, जो उन्हें विश्व सिनेमा का महान कलाकार बनाती हैं।

फिल्म पुरस्कार समारोह के दौरान अभिनेता इरफान खान
भारतीय और वैश्विक सिनेमा के अद्वितीय अभिनेता इरफ़ान खान की पुण्यतिथि पर 29 अप्रैल 2026 को पूरा देश उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहा है। 53 वर्ष की आयु में 2020 में उनके निधन को आज छह वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन उनकी कला, उनकी संवेदनशीलता और उनके किरदार आज भी दर्शकों के दिलों में जिंदा हैं।
7 जनवरी 1967 को राजस्थान के टोंक में जन्मे साहबजादे इरफ़ान अली खान ने एक साधारण परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। उनके पिता यासीन अली खान टायर का व्यवसाय चलाते थे, जबकि उनकी मां सईदा बेगम खान का संबंध भी टोंक से ही था। बचपन से ही क्रिकेट में रुचि रखने वाले इरफ़ान का चयन सीके नायडू ट्रॉफी के लिए हुआ था, लेकिन आर्थिक कारणों से वह इस अवसर को नहीं भुना सके। इसके बाद उन्होंने अभिनय की ओर रुख किया और 1984 में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा, नई दिल्ली में दाखिला लेकर अपने सपनों को आकार देना शुरू किया।
मुंबई में शुरुआती संघर्ष के दौरान उन्होंने एयर कंडीशनर रिपेयर का काम भी किया और इसी दौरान उन्होंने अपने आदर्श राजेश खन्ना के घर का दौरा किया। 1988 में मीरा नायर की फिल्म Salaam Bombay! से उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की, हालांकि उनका रोल छोटा था। इसके बाद कई वर्षों तक उन्होंने टेलीविजन और छोटे किरदारों के जरिए खुद को साबित करने का प्रयास किया।
तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से पद्म श्री प्राप्त करते अभिनेता इरफान खान
उनकी प्रतिभा को असली पहचान 2000 के दशक में मिली, जब उन्होंने Haasil और Maqbool जैसी फिल्मों में प्रभावशाली अभिनय किया। इसके बाद Paan Singh Tomar में उनके दमदार प्रदर्शन ने उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिलाया। वहीं The Lunchbox, Piku और Hindi Medium जैसी फिल्मों ने उन्हें व्यावसायिक और आलोचनात्मक सफलता के शिखर पर पहुंचा दिया।
इरफ़ान खान ने न केवल भारतीय सिनेमा में बल्कि हॉलीवुड में भी अपनी गहरी छाप छोड़ी। Life of Pi, Jurassic World और Inferno जैसी अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में उनके अभिनय को सराहा गया। 2008 की फिल्म ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ में उनकी भूमिका ने उन्हें वैश्विक पहचान दिलाई और इस फिल्म की पूरी कास्ट को स्क्रीन एक्टर्स गिल्ड अवॉर्ड भी मिला। व्यक्तिगत जीवन में उन्होंने 23 फरवरी 1995 को लेखिका सुतापा सिकदर से विवाह किया और उनके दो बेटे हैं बाबिल और अयान। 2012 में उन्होंने अपने नाम की स्पेलिंग बदलकर ‘इरफ़ान’ से ‘इर्रफान’ कर ली थी और बाद में ‘खान’ उपनाम को हटाकर अपनी पहचान को अपने काम से जोड़ने का निर्णय लिया।
मार्च 2018 में उन्होंने स्वयं खुलासा किया कि वह न्यूरोएंडोक्राइन कैंसर से पीड़ित हैं। इलाज के लिए वह ब्रिटेन गए और 2019 में भारत लौटे। 28 अप्रैल 2020 को उन्हें मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 29 अप्रैल को उनका निधन हो गया। इससे चार दिन पहले ही उनकी मां का भी जयपुर में निधन हो गया था। उन्हें मुंबई के वर्सोवा कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक (शव को दफन करना) किया गया। इरफ़ान खान का करियर तीन दशकों से अधिक समय तक फैला रहा, जिसमें उन्होंने नेशनल फिल्म अवॉर्ड, एशियन फिल्म अवॉर्ड और छह फिल्मफेयर अवॉर्ड सहित कई सम्मान प्राप्त किए। 2011 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया और 2021 में उन्हें मरणोपरांत फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दिया गया।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
