इनसिडियस: आउट ऑफ द फर्दर में पिता बनने के डर से जुड़ा जैकब चेस का निजी अनुभव
‘इनसिडियस: आउट ऑफ द फर्दर’ में जैकब चेस ने पिता बनने के अपने निजी डर को कहानी का हिस्सा बनाया है। जानिए अमेलिया ईव, लिन शे और ‘द फर्दर’ से जुड़ी फिल्म की कहानी और डरावने अनुभव।

तस्वीर में तीन लोग घर के बाहर खड़े नजर आ रहे हैं, जिनमें बाईं ओर एक महिला ऑक्सीजन सिलेंडर पकड़े हुए है और बीच में एक व्यक्ति खड़ा है।
5 फिल्मों से ग्लोबल बॉक्स ऑफिस पर 740 मिलियन डॉलर से अधिक की कमाई कर चुकी ‘इनसिडियस’ फ्रैंचाइजी अब एक नए परिवार और ऐसे डर के साथ लौट रही है, जो ‘द फर्दर’ की ताकत को नए सिरे से परिभाषित करता है। ‘इनसिडियस: आउट ऑफ द फर्दर’ में अमेलिया ईव ने जेम्मा का किरदार निभाया है। जेम्मा एक युवा मां है, जो अपनी बेटी की परवरिश उसी घर में कर रही है, जहां वह खुद बड़ी हुई थी।
जेम्मा को पता चलता है कि वह ‘द फर्दर’ में जा सकती है। ‘इनसिडियस’ की दुनिया के केंद्र में मौजूद यह खोई हुई आत्माओं की एक डरावनी जगह है। जब एक बुरी चीज उसका पीछा करती है, तो जेम्मा को अपनी ऐसी शक्ति का पता चलता है, जो सब कुछ बदल देती है। वह न सिर्फ ‘द फर्दर’ में जा सकती है, बल्कि वहां रहने वाली चीजों को असली दुनिया में भी ला सकती है। जब राक्षसों को उसकी इस शक्ति का पता चलता है, तो हमारी दुनिया उनका खेल का मैदान बन जाती है।
लिन शे ‘इनसिडियस’ में एलिस रेनियर के मशहूर किरदार में वापसी कर रही हैं, जबकि फिल्म का निर्देशन जैकब चेस ने किया है। ‘इनसिडियस: आउट ऑफ द फर्दर’ 21 अगस्त, 2026 को पूरे भारत में अंग्रेज़ी, हिंदी, तमिल और तेलुगु भाषाओं में रिलीज़ होगी।
हॉरर जॉनर के लिए जैकब चेस का लगाव कई वर्षों से रहा है। वह बताते हैं कि उन्हें थिएटर से प्यार है और इसी वजह से उन्होंने कई सालों तक हॉन्टेड हाउस अट्रैक्शन बनाए। उन्होंने हाई स्कूल से लेकर 20 साल की उम्र तक अपने दोस्तों के साथ चैरिटी इवेंट के लिए ऐसा किया और यह काफी सफल रहा।
चेस के मुताबिक, हॉन्टेड हाउस में फिल्म मेकिंग, कहानी सुनाना, बेहतरीन किरदार और सबसे महत्वपूर्ण सामूहिक अनुभव जैसी कई चीजें होती हैं। उनका कहना है कि किसी को चिल्लाते और हंसते हुए देखने से बेहतर कोई एहसास नहीं होता, फिर चाहे वह हॉन्टेड हाउस से बाहर भाग रहा हो या मूवी थिएटर से।
‘इनसिडियस: आउट ऑफ द फर्दर’ में डरावना माहौल तैयार करने के लिए चेस ने अपनी जिंदगी और अपने डर का भी सहारा लिया। उन्होंने खास तौर पर उन डरावने अनुभवों को रोजमर्रा की सामान्य और सुरक्षित गतिविधियों से जोड़ने का तरीका अपनाया।
इसका एक उदाहरण तकियों से बना किला है, जो एक कभी खत्म न होने वाली भूलभुलैया में बदल जाता है और उससे बचना संभव नहीं रहता। इसी दौरान दो तरफ से मरे हुए लोग करीब आते हैं। चेस बताते हैं कि उन्हें बंद और तंग जगहों से बहुत डर लगता है। यहां तक कि अगर उन्हें अपने बिस्तर के नीचे कुछ ढूंढना हो, तो भी उन्हें घुटन महसूस होती है। उनके लिए तकियों से बने किले का बुरे सपने में बदल जाना इस सवाल से जुड़ा है कि किसी बेहद आम और बेनुकसान चीज के साथ सबसे बुरा क्या हो सकता है।
डेंटिस्ट का अनुभव भी चेस के डर को फिल्म में बदलने का एक उदाहरण है। उनका कहना है कि डेंटिस्ट की कुर्सी पर बैठना ही डरावना होता है। इसलिए उनके लिए यह जरूरी था कि हाइजीनिस्ट जेम्मा को ही डेंटिस्ट की कुर्सी पर बैठाया जाए। ड्रिल को उसकी तरफ आते देखना एक फिल्ममेकर के तौर पर उनके लिए बेहद डरावना पल था।
हालांकि चेस के लिए सिर्फ दर्शकों को अपनी उंगलियों के बीच से फिल्म देखने पर मजबूर कर देना पर्याप्त नहीं है। उनके मुताबिक किसी हॉरर फिल्म को वास्तव में डरावना बनाने के लिए ऐसे किरदार जरूरी हैं, जो जिंदा रहने के सच में डरावने और खौफनाक अनुभव से गुजरें।
चेस का मानना है कि ‘इनसिडियस’ फ्रैंचाइजी ने शुरुआत से ही यह काम बेहद प्रभावी तरीके से किया है, क्योंकि इसके किरदारों के लिए दांव पर बहुत कुछ लगा होता है। उनके अनुसार इन फिल्मों में जबरदस्त डरावने पल और तनाव जरूर है, लेकिन इनके केंद्र में परिवार पर केंद्रित और दिल को छू लेने वाली कहानियां होती हैं।
लैम्बर्ट परिवार, एलिस और नए किरदारों के साथ चेस ने ऐसे किरदारों को देखा, जिनसे वह जुड़ाव महसूस करते हैं। उनका कहना है कि जब आपके अपनों पर कोई मुसीबत आती है, तो वह डर वास्तव में आपके अंदर तक महसूस होता है।
यही जुड़ाव ‘इनसिडियस’ फ्रैंचाइजी को चेस के लिए निजी बनाता है। उन्होंने बताया कि जब वह ‘इनसिडियस: आउट ऑफ द फर्दर’ लिख रहे थे, तब उनकी पत्नी प्रेग्नेंट थीं और उन्हें पिता बनने से बहुत डर लग रहा था। इसी भावना को उन्होंने फिल्म की कहानी में इस्तेमाल किया। उनके अनुसार, यह एक असली और निजी अनुभव से ‘इनसिडियस’ फिल्म शुरू करने का एक शानदार मौका था।
‘इनसिडियस: आउट ऑफ द फर्दर’ में इसी निजी डर, पारिवारिक रिश्तों और ‘द फर्दर’ की भयावह दुनिया का मेल कहानी को आगे बढ़ाता है। फिल्म 21 अगस्त, 2026 को भारत में चार भाषाओं—अंग्रेज़ी, हिंदी, तमिल और तेलुगु—में सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी।

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