आम भारतीय परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी में होने वाली छोटी-छोटी बातें भी कहानी का मजबूत आधार बन सकती हैं। लंबे समय तक भारतीय कहानियों को दिलचस्प बनाने के लिए बड़े किरदार, बड़े संघर्ष या असाधारण परिस्थितियों को जरूरी माना जाता रहा। ओटीटी ने कहानी कहने के इस नजरिए को बदला है। ‘गुल्लक’, ‘पंचायत’ और ‘दुपहिया’ जैसे शो उन घटनाओं में हास्य, भावनाएं और ड्रामा तलाशते हैं, जिनसे ज्यादातर भारतीय अपने जीवन को जोड़ सकते हैं।

गुल्लक (सीजन 1 से 5)

‘गुल्लक’ की खासियत इसकी ऐसी पारिवारिक परिस्थितियां हैं, जो दर्शकों को जानी-पहचानी लगती हैं। पैसों को लेकर घर में होने वाली बातचीत से लेकर भाई-बहनों के बीच छोटी-सी बात पर होने वाले झगड़े तक, मामूली घटनाएं भावनात्मक कहानी का रूप ले लेती हैं।

मिश्रा परिवार के जरिए शो यह दिखाता है कि दिलचस्प कहानी के लिए हमेशा असाधारण घटनाओं की जरूरत नहीं होती। कई बार घर की रोजमर्रा की जिंदगी ही कहानी का सबसे मजबूत आधार बन सकती है।

पंचायत (सीजन 1 से 4)

‘पंचायत’ में सड़क, गांव का चुनाव या किसी छोटी-सी बात को लेकर हुआ विवाद संबंधित लोगों के लिए बड़ी घटना बन जाता है। सचिव जी की परेशानियों से लेकर प्रह्लाद चा के भावनात्मक उतार-चढ़ाव तक, शो किसी समस्या की अहमियत को उससे प्रभावित होने वाली जिंदगी के नजरिए से सामने रखता है।

दुपहिया (सीजन 1 और 2)

‘दुपहिया’ की कहानी धड़कपुर की पृष्ठभूमि में ऐसे लोगों की जिंदगी के बीच हास्य तलाशती है, जिनकी परेशानियां बाहर से देखने पर छोटी लग सकती हैं, लेकिन उनके लिए उनका महत्व काफी बड़ा होता है।

अमावस और बनवारी से लेकर पूरे गांव के माहौल तक, यहां के किरदार दुनिया को बचाने की कोशिश नहीं कर रहे हैं। वे अपनी जिंदगी को समझने और संभालने की कोशिश कर रहे हैं। यही इस कहानी का अहम पहलू है।

आम लोगों की छोटी-छोटी परेशानियों को जब पूरी गंभीरता के साथ कहानी का हिस्सा बनाया जाता है, तो उसे असाधारण बनाने के लिए किसी बड़ी समस्या की जरूरत नहीं रह जाती।

ये मेरी फैमिली (सीजन 1 से 4)

‘ये मेरी फैमिली’ एक आम भारतीय घर में बड़े होने की यादों को कहानी का केंद्र बनाता है। शो ने एक बेहद साधारण अनुभव को खास और यादगार रूप दिया—एक भारतीय परिवार में बचपन बिताने का अनुभव।

अलग-अलग सीजन में अलग परिवार और अलग कलाकार नजर आए, लेकिन इसके बावजूद शो की मूल भावना में बदलाव नहीं आया।

होम शांति

‘होम शांति’ इस विचार पर आधारित है कि एक घर भी पारिवारिक कहानी की शुरुआत के लिए पर्याप्त हो सकता है। जब किसी आम परिवार का सबसे बड़ा सपना अपना घर बनाना हो, तो परिवार के भीतर कई तरह की परिस्थितियां सामने आती हैं।

शो इस साधारण कहानी को परिवार, पैसे, उम्मीदों और अलग-अलग पीढ़ियों के अपने सपनों के घर की कल्पना से जोड़ता है। रोजमर्रा के मतभेदों में हास्य के साथ यह भारतीय परिवारों से जुड़ी उस भावना को सामने लाता है कि घर सिर्फ एक इमारत नहीं होता।

द आम आदमी फैमिली (सीजन 1 से 4)

‘द आम आदमी फैमिली’ में आम होना ही कहानी की सबसे बड़ी खासियत बन जाता है। शर्मा परिवार कोई असाधारण परिवार नहीं है और यही उनकी कहानी को अलग पहचान देता है।

उनकी दुनिया माता-पिता, बच्चों, रिश्तों, घर के छोटे-बड़े मतभेदों, सपनों और साथ रहते हुए आने वाली छोटी-छोटी परेशानियों के इर्द-गिर्द घूमती है।

पीढ़ियों के बीच के अंतर से लेकर घर में होने वाली गलतफहमियों तक, शो ऐसी परिस्थितियों में हास्य तलाशता है, जिनका अनुभव दर्शकों ने अपनी जिंदगी में भी किया होगा।

घर वापसी

‘घर वापसी’ में कहानी की शुरुआत घर लौटने से होती है। बेंगलुरु में नौकरी जाने के बाद मुख्य किरदार अपने शहर वापस लौटता है। करियर में आया यह झटका धीरे-धीरे परिवार, उम्मीदों, पहचान और सफलता के असली मायने से जुड़ी कहानी में बदल जाता है।

इन सातों शो को जोड़ने वाली बात सिर्फ परिवार या छोटे शहरों की कहानियां होना नहीं है। इनके केंद्र में यह विचार है कि आम लोगों की जिंदगी भी कहानी का केंद्र बनने के योग्य है। रोजमर्रा की परेशानियां, पारिवारिक रिश्ते, छोटे मतभेद और साधारण सपने भी दर्शकों के लिए उतने ही प्रभावी हो सकते हैं, जब उन्हें कहानी का मुख्य आधार बनाया जाए।

Pratahkal Newsroom

Pratahkal Newsroom

प्रातःकाल न्यूज़-रूम, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, समयबद्ध और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा न्यूज़-रूम राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story