मनोरंजन उद्योग में मंदी के बादल ; आखिर क्यों हो रही है बैकस्टेज श्रमिकों के वेतन में भारी कटौती?
मनोरंजन उद्योग के सर्वे में बड़ा खुलासा: आर्थिक मंदी के कारण बॉलीवुड के बैकस्टेज वर्कर्स का वेतन 60% तक घटा, मुंबई छोड़ गृहनगर लौटने को मजबूर हुए कामगार।

फिल्म निर्माण सेट पर काम के इंतजार में बैठे तकनीकी कर्मचारी, मनोरंजन उद्योग में आई मंदी और पारिश्रमिक में कटौती के प्रभाव के संदर्भ में.
Bollywood economic slowdown 2026 : चमचमाती लाइटें, करोड़ों के बजट, आलीशान पार्टियां और पर्दे पर दिखने वाली जादुई दुनिया के पीछे छिपे कड़वे सच को एक बड़े राष्ट्रीय सर्वेक्षण ने उजागर कर दिया है. मनोरंजन उद्योग से जुड़े एक हजार से अधिक व्यक्तियों से की गई विस्तृत बातचीत पर आधारित इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट ने फिल्म जगत की रीढ़ माने जाने वाले श्रमिकों की बेहद चिंताजनक स्थिति को देश के सामने ला खड़ा किया है. जहाँ एक तरफ रणवीर सिंह, शाहरुख खान, सलमान खान और आमिर खान जैसे स्थापित सुपरस्टार्स को एक-एक फिल्म के लिए करोड़ों रुपये का रिकॉर्ड भुगतान किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ इसी उद्योग को अपने खून-पसीने से सींचने वाले जमीनी कामगारों को या तो काम मिलना बंद हो गया है या उनके वेतन में पचास से साठ प्रतिशत तक की भारी कटौती कर दी गई है. वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और सभी क्षेत्रों में कॉर्पोरेट खर्चों में की जा रही कटौती की मार अब सीधे तौर पर बॉलीवुड और टेलीविजन निर्माण जगत के दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों पर पड़ रही है.
इस मंदी और आर्थिक तंगी की सबसे क्रूर सच्चाई यह है कि यह केवल मध्य और निचले स्तर के पेशेवरों को अपनी चपेट में ले रही है, जबकि बड़े नाम और ए-लिस्टर्स पूरी तरह सुरक्षित हैं. कैरेक्टर आर्टिस्ट, सहायक निर्देशक, मेकअप आर्टिस्ट, लाइटमैन, कैमरा ऑपरेटर, स्पॉट स्टाफ, प्रोडक्शन असिस्टेंट, एडिटर और तकनीकी दल के सदस्य इस समय सबसे गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं. प्रोजेक्ट आधारित आय और दैनिक मजदूरी पर निर्भर रहने वाले ये पेशेवर निर्माण कार्यों में आई सुस्ती के कारण पूरी तरह असुरक्षित हो गए हैं. उद्योग के विशेषज्ञों का कहना है कि यह मंदी पिछले कई महीनों से धीरे-धीरे पनप रही थी, जिसके मुख्य कारणों में फिल्म निर्माण के बजट में की जा रही अप्रत्याशित कटौती, डिजिटल प्लेटफॉर्मों (OTT) द्वारा निवेश में बरती जा रही अत्यधिक सतर्कता और बाजार की अनिश्चितता के कारण बड़ी परियोजनाओं का लगातार स्थगित होना शामिल है.
देश के सबसे महंगे शहरों में से एक, मुंबई में यह वित्तीय दबाव अब एक मानवीय संकट का रूप लेता जा रहा है. अधिकांश प्रमुख प्रोडक्शन हाउस, कास्टिंग एजेंसियां और मनोरंजन कंपनियां अंधेरी, जुहू और बांद्रा जैसे पॉश इलाकों से संचालित होती हैं, जहां साधारण मकानों का मासिक किराया भी पचास हजार रुपये या उससे अधिक है. ऐसे में जिन श्रमिकों की आय घटकर आधी रह गई है, उनके लिए मायानगरी में रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करना नामुमकिन होता जा रहा है. खबरों के अनुसार, अपनी संचित बचत को पूरी तरह गंवाने के बाद कई कामगारों ने रिश्तेदारों से कर्ज लेना या गुजारे के लिए छोटे-मोटे अस्थायी काम करना शुरू कर दिया है. स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि मुंबई में स्थायी रोजगार की उम्मीद खोकर बड़ी संख्या में तकनीकी कर्मचारी और फ्रीलांसर अपने गृहनगर लौटने के लिए मजबूर हो गए हैं.
मनोरंजन जगत का पूरा इकोसिस्टम एक परस्पर जुड़े हुए तंत्र की तरह काम करता है, जिसमें किसी एक बड़ी परियोजना के रुकने या भुगतान में देरी होने से पूरी आपूर्ति श्रृंखला ठप हो जाती है. फ्रीलांसरों ने शिकायत दर्ज कराई है कि अब उन्हें पूरा किए गए काम का पारिश्रमिक प्राप्त करने में कई महीनों का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है, जो श्रम नियमों और अनुबंध सुरक्षा के आधिकारिक सिद्धांतों के खिलाफ है. इस संकट के बीच अब फिल्म यूनियनों और उद्योग जगत के नीति निर्माताओं से संरचनात्मक सुधारों की मांग की जा रही है ताकि भविष्य में मंदी के दौरान इन असंगठित कामगारों के लिए एक मजबूत वित्तीय सुरक्षा तंत्र और अनिवार्य न्यूनतम मजदूरी नियमावली लागू की जा सके. यह मौजूदा परिस्थिति मनोरंजन उद्योग की कथित सफलता और पर्दे के पीछे काम करने वाले विशाल कार्यबल के आर्थिक संघर्षों के बीच बढ़ती हुई उस गहरी खाई को बयां करती है, जिसे यदि समय रहते नहीं पाटा गया तो भारतीय सिनेमा का यह मजबूत ढांचा ढह सकता है.

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
