"मेरे पास पैसे नहीं हैं..." 'छोटा चेतन' के साथ इंडस्ट्री ने किया धोखा? जानें राजपाल यादव के मज़बूरी की पूरी कहानी
राजपाल यादव चेक बाउंस केस की पूरी कहानी: 2010 में फिल्म ‘आता पता लापता’ के लिए लिए गए कर्ज से शुरू हुआ विवाद 2026 में तिहाड़ जेल तक पहुँचा। जानिए कोर्ट के फैसले, धारा 138, सज़ा और इस मामले का अभिनेता के करियर पर असर।

अभिनेता राजपाल यादव
हास्य भूमिकाओं से करोड़ों दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान लाने वाले अभिनेता राजपाल यादव इन दिनों अपने अभिनय नहीं, बल्कि एक गंभीर कानूनी विवाद को लेकर चर्चा में हैं। फिल्मी पर्दे पर हल्के-फुल्के किरदार निभाने वाले राजपाल की निजी ज़िंदगी में यह मामला एक लंबा और कठिन अध्याय बनकर उभरा है, जिसकी परिणति फरवरी 2026 में तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण के रूप में हुई।
इस पूरे विवाद की शुरुआत साल 2010 में हुई, जब राजपाल यादव और उनकी पत्नी ने अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म ‘आता पता लापता’ के निर्माण के लिए एम/एस मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से लगभग ₹5 करोड़ का कर्ज लिया। यह फिल्म न तो बॉक्स ऑफिस पर चली और न ही निवेश की भरपाई कर सकी। नतीजतन, आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता चला गया।
समय के साथ ब्याज, जुर्माने और कानूनी खर्च जुड़ते गए और बकाया राशि बढ़कर ₹7 से ₹9 करोड़ तक पहुँच गई। ऋण चुकाने के लिए जारी किए गए कई चेक बाउंस हो गए, जिसके बाद कंपनी ने अभिनेता के खिलाफ नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत आपराधिक मुकदमा दायर किया। भारतीय कानून में चेक बाउंस को महज़ वित्तीय चूक नहीं, बल्कि दंडनीय अपराध माना जाता है।
इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया कई वर्षों तक चली और इसके अहम पड़ाव इस प्रकार रहे:
- 2018: एक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी को दोषी ठहराते हुए छह महीने की सज़ा सुनाई। इसके बाद यह फैसला सेशंस कोर्ट में भी बरकरार रखा गया।
- 2024: दिल्ली हाईकोर्ट ने सज़ा को अस्थायी रूप से निलंबित किया, यह शर्त रखते हुए कि अभिनेता बकाया राशि चुकाने के लिए “ईमानदार और वास्तविक प्रयास” करेंगे। इस दौरान अदालत को कई बार भुगतान का आश्वासन दिया गया, लेकिन तय समयसीमा पर राशि जमा नहीं हो सकी।
- फरवरी 2026: लगातार शर्तों के उल्लंघन और अदालत की अवमानना को देखते हुए हाईकोर्ट ने किसी भी तरह की और राहत देने से इनकार कर दिया और आत्मसमर्पण का आदेश दिया, जिसके बाद राजपाल यादव ने तिहाड़ जेल में सरेंडर किया।
आत्मसमर्पण से पहले अभिनेता का भावुक बयान सामने आया, जिसमें उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति को बेहद खराब बताया और कहा कि उनके पास न तो पर्याप्त धन है और न ही कोई सहारा। इस बयान ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएँ पैदा कीं। कुछ लोगों ने सहानुभूति जताई, वहीं कई लोगों ने कानून के पालन पर ज़ोर दिया। अभिनेता सोनू सूद सहित कुछ हस्तियों ने उनके समर्थन में सार्वजनिक संदेश भी दिए।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि धारा 138 के मामलों में अदालत की शर्तों का पालन न करना गंभीर परिणाम ला सकता है। बार-बार भुगतान में विफलता और न्यायालय को दिए गए वचनों का उल्लंघन सीधे जेल की सज़ा तक ले जा सकता है, चाहे आरोपी कितना ही प्रसिद्ध क्यों न हो। राजपाल यादव का यह मामला न केवल एक अभिनेता के व्यक्तिगत संघर्ष की कहानी है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारतीय कानून में लोकप्रियता कानून से ऊपर नहीं होती। यह विवाद फिल्म उद्योग और आम नागरिकों दोनों के लिए एक सख़्त लेकिन महत्वपूर्ण संदेश छोड़ता है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
