बॉलीवुड अभिनेता ह्रितिक रोशन के हालिया सोशल मीडिया पोस्ट ने फिल्म धुरंधर को लेकर एक बड़े सार्वजनिक संवाद को जन्म दिया है। धुरंधर के प्रति अपनी गहरी प्रशंसा व्यक्त करने के बाद रोशन द्वारा राजनीतिक टिप्पणी जोड़ने के कारण उनमें आलोचना की लहर दौड़ गई, जिस पर उन्होंने बाद में एक और विस्तृत पोस्ट के जरिए प्रतिक्रिया दी। यह पूरी घटना न केवल फिल्म समीक्षा का विषय बनी है बल्कि इसने फिल्म‑संवाद के राजनीतिक और सामाजिक आयामों पर बहस भी छेड़ दी है।

बुधवार शाम को ह्रितिक रोशन ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर धुरंधर की समीक्षा साझा की, जिसमें उन्होंने फिल्म की कहानी, सिनेमैटिक भाषा और संजीदा अभिनय की खुले दिल से प्रशंसा की। उन्होंने लिखा कि वह ऐसे निर्देशकों और कलाकारों से प्रभावित होते हैं, जो पूरी तरह से अपनी कथा में डूबकर सामने वाले को प्रभावित करते हैं। रोशन ने धुरंधर को “सिनेमा का एक उत्कृष्ट उदाहरण” करार दिया और कहा कि उन्होंने इस फिल्म से एक फिल्म‑छात्र के रूप में “सीखा और आनंद लिया।”




लेकिन समीक्षा के इसी विस्तार में उन्होंने एक ऐसा अंश भी जोड़ा जिसने सोशल मीडिया पर तीव्र प्रतिक्रिया को जन्म दिया। रोशन ने लिखा कि वह फिल्म के राजनीतिक संदेश से पूरी तरह सहमत नहीं हैं और उन्होंने यह भी कहा कि निर्माताओं के लिए सामाजिक और वैश्विक जिम्मेदारियों पर विचार करना आवश्यक है। इस टिप्पणी को कुछ उपयोगकर्ताओं ने राजनीतिक रूप से विवादास्पद बताया और इसे फिल्म की सराहना के साथ जोड़कर देखा जिस पर तुरंत ही ऑनलाइन आलोचना और प्रतिक्रियाएँ शुरू हो गईं।



सोशल प्लेटफॉर्म्स पर कुछ आलोचकों ने रोशन के बयान को “परस्पर विरोधी” और “राजनैतिक टिप्पणी” बताते हुए ट्रोल भी किया। कई प्रतिक्रियाकारों ने उनके पुराने प्रोजेक्ट्स का जिक्र करते हुए सवाल उठाए कि उनके अपने फिल्मों में भी राजनीतिक विषयों के तत्व थे या नहीं, और यदि थे तो क्या वे स्वयं उन पर गंभीर विचार व्यक्त करते हैं। एक आलोचक ने X (ट्विटर ) पर कहा की हृतिक 'डैमेज कंट्रोल' करना चाह रहे हैं।


प्रतिक्रियाओं की विविधता ने स्थिति को और तीव्र बना दिया। कुछ लोगों ने उनके ईमानदार दृष्टिकोण की सराहना की, जबकि अन्य ने उन्हें सार्वजनिक मंच पर राजनीतिक टिप्पणी न रखने की सलाह दी। इस पूरे संवाद ने दर्शकों और फिल्म‑आलोचकों के बीच धुरंधर की राजनीतिक विषयवस्तु पर एक व्यापक चर्चा भी शुरू कर दी।

इस आलोचना के बीच ही ह्रितिक ने एक और पोस्ट जारी किया जिसमें उन्होंने अपनी पहली समीक्षा के राजनीतिक अंश पर फिर से प्रकाश डाला बिना, धुरंधर की निर्देशन, कलाकारों के प्रदर्शन और तकनीकी टीम की सराहना करते हुए लिखा कि वे फिल्म को अब भी अपने मन से नहीं निकाल पा रहे हैं। उन्होंने निर्देशक, मुख्य अभिनेता और सह‑कलाकारों समेत निर्माण टीम की उपलब्धियों की विस्तार से प्रशंसा की और फिल्म के भाग दो (पार्ट 2) का बेसब्री से इंतजार भी जाहिर किया।

विशेष रूप से, उनकी यह प्रतिक्रिया धुरंधर की सफलता के सामाजिक प्रभाव को भी दर्शाती है। फिल्म, जो दर्शकों और समीक्षकों की प्रशंसा के साथ बॉक्स ऑफिस पर भी अच्छा प्रदर्शन कर रही है, धुरंधर की बातचीत को केवल एक फिल्म समीक्षात्मक प्रतिक्रिया से आगे ले जाकर सिनेमा‑राजनीति संवाद का विषय बना चुकी है। रोशन की टिप्पणियों और उसके बाद की प्रतिक्रियाओं ने दर्शकों और कलाकारों के बीच यह सवाल उठाया है कि क्या फिल्मों की समीक्षा में केवल तकनीकी और कलात्मक पक्षों को ही देखा जाना चाहिए या उनके सामाजिक‑राजनीतिक संदेशों पर भी खुलकर विचार किया जाना चाहिए।

इस विवाद ने यह प्रमाणित किया है कि सोशल मीडिया पर किसी भी सार्वजनिक सेलिब्रिटी बयान का प्रभाव केवल फिल्म‑प्लॉट तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह व्यापक सामाजिक विमर्श को भी प्रभावित करता है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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