हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर में जब परदे पर एक मुस्कान दर्शकों का दिल जीत लेती थी, तब एक नाम था जो रोशनी की तरह चमकता था मधुबाला। 14 फरवरी 1933 को मुमताज़ जहाँ बेगम देहलवी के रूप में जन्मी इस अदाकारा ने महज़ दो दशकों के करियर में भारतीय सिनेमा को ऐसी छवि दी, जो समय के साथ और भी दीप्तिमान होती गई। 1950 के दशक की सबसे अधिक पारिश्रमिक पाने वाली अभिनेत्रियों में शुमार मधुबाला ने करीब 70 फिल्मों में काम किया। कॉमेडी से लेकर ऐतिहासिक महाकाव्यों तक, उन्होंने हर किरदार में अपनी अलग पहचान बनाई। आज भी उन्हें “भारतीय सिनेमा की वीनस” कहा जाता है।


परदे के पीछे का प्रेम और विवाह:

1958 में फिल्म चलती का नाम गाड़ी के सेट पर उनकी मुलाकात अभिनेता-गायक किशोर कुमार से फिर हुई। बचपन की पहचान ने दो वर्षों में प्रेम का रूप ले लिया और 16 अक्टूबर 1960 को दोनों ने अदालत में विवाह कर लिया। विवाह को लेकर उस समय कई तरह की चर्चाएँ हुईं, जिनमें यह दावा भी शामिल था कि किशोर कुमार ने धर्म परिवर्तन किया था, लेकिन इन दावों को उनकी बहन ने खारिज किया।


विवाह के तुरंत बाद मधुबाला और किशोर कुमार, उनके चिकित्सक डॉ. रुस्तम जल वकील के साथ लंदन गए। यह यात्रा हनीमून के साथ-साथ मधुबाला की बिगड़ती हृदय-रोग की चिकित्सा के लिए थी। लंदन के चिकित्सकों ने जटिलताओं के भय से ऑपरेशन से इनकार कर दिया और उन्हें तनाव से दूर रहने की सलाह दी। उन्हें संतान न होने की सलाह दी गई और जीवन-काल मात्र दो वर्ष बताया गया। यह भविष्यवाणी उनके जीवन पर गहरी छाया बनकर उतर आई।


बीमारी, दूरियाँ और एकाकीपन:

बंबई लौटने के बाद उनका स्वास्थ्य लगातार गिरता गया। पारिवारिक और वैचारिक मतभेदों के कारण वैवाहिक जीवन में तनाव बढ़ने लगा। अभिनेता अशोक कुमार के अनुसार, बीमारी ने उनके स्वभाव को चिड़चिड़ा बना दिया था। वे अधिकतर समय अपने पिता के घर में बिताने लगीं। धार्मिक मतभेदों से उपजे तनाव से बचने के लिए वे बाद में बांद्रा स्थित किशोर कुमार के नए फ्लैट ‘क्वार्टर डेक’ में रहने चली गईं, लेकिन किशोर कुमार वहाँ अधिक समय तक नहीं रहे।


वे उनके लिए चिकित्सा खर्च वहन करते रहे, परंतु मधुबाला ने स्वयं को अकेला महसूस किया और विवाह के दो महीने के भीतर ही अपने घर लौट आईं। जीवन के अंतिम वर्षों में किशोर कुमार कभी-कभार उनसे मिलने आते रहे। उनकी बहन मधुर भूषण का मानना था कि यह दूरी शायद अंतिम वियोग के दर्द को कम करने की कोशिश थी।


अधूरी वापसी और अंतिम मुलाकात:

जून 1966 में स्वास्थ्य में कुछ सुधार के संकेत मिले तो उन्होंने फिल्म चलाक से वापसी का प्रयास किया, जिसमें उनके सह-कलाकार राज कपूर थे। मीडिया ने इस वापसी का स्वागत किया, लेकिन शूटिंग के पहले ही दिन वे बेहोश हो गईं और फिल्म अधूरी रह गई। इसके बाद उन्हें ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उनकी मुलाकात उनके पूर्व प्रेमी दिलीप कुमार से हुई। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वे घर लौट आईं, परंतु स्वास्थ्य ने फिर कभी उनका साथ नहीं दिया।


जीवन के अंतिम वर्षों में मधुबाला बिस्तर तक सीमित हो गईं। उनका वजन तेजी से घटता गया। वे उर्दू शायरी में सुकून ढूँढती थीं और अक्सर अपने घर में प्रोजेक्टर पर अपनी फिल्में विशेषकर 'मुगल-ए-आज़म' देखती थीं। फिल्म उद्योग से वे लगभग पूरी तरह कट चुकी थीं। उन दिनों उनसे मिलने केवल गीता दत्त और वहीदा रहमान जाया करती थीं।


1969 की शुरुआत तक उनकी हालत गंभीर हो चुकी थी। उन्हें पीलिया हो गया और जांच में हीमैचूरिया की पुष्टि हुई। 22 फरवरी 1969 की मध्यरात्रि को उन्हें दिल का दौरा पड़ा। कई घंटों तक परिवार और किशोर कुमार की मौजूदगी में संघर्ष करने के बाद 23 फरवरी की सुबह 9:30 बजे, मात्र 36 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। मधुबाला को मुंबई के सांताक्रूज़ स्थित जुहू मुस्लिम कब्रिस्तान में दफनाया गया। उनकी कब्र संगमरमर से निर्मित है, जिस पर कुरान की आयतें और समर्पण की पंक्तियाँ अंकित हैं। उनके साथ उनकी निजी डायरी भी दफन की गई मानो उनके अनकहे शब्दों को भी सदा के लिए शांत कर दिया गया हो।

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Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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