'आज के सितारों जैसी फीस नहीं मिली': सबसे महंगी एक्ट्रेस होने के दावों पर हेमा मालिनी का जवाब
दिग्गज अभिनेत्री हेमा मालिनी ने 70 और 80 के दशक में सबसे महंगी एक्ट्रेस होने के दावों पर चुप्पी तोड़ी है। पॉडकास्ट में उन्होंने आज के सितारों की फीस और अपने दौर के संघर्षों को लेकर क्या बड़े खुलासे किए? जानिए पूरी सच्चाई।

तस्वीर में दिग्गज अभिनेत्री हेमा मालिनी हल्के गुलाबी रंग की साड़ी और पारंपरिक आभूषण पहने नजर आ रही हैं।
दिग्गज बॉलीवुड अभिनेत्री और सांसद हेमा मालिनी ने 1970 और 80 के दशक में इंडस्ट्री की सबसे अधिक भुगतान पाने वाली अभिनेत्री होने के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। 'हिंदी रश' पॉडकास्ट में हेमा मालिनी ने स्पष्ट किया कि उन्हें कभी भी उस तरह की मोटी फीस नहीं मिली जैसी आज के दौर के सितारे लेते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्होंने कभी पैसों के लिए काम नहीं किया। अभिनेत्री ने साक्षात्कार में सवाल किया कि आखिर यह किसने कहा कि वह सबसे महंगी अभिनेत्री थीं। उन्होंने बताया कि उनके दौर में उन्हें बहुत कम पैसा मिलता था और वे आज के कलाकारों को मिलने वाली बड़ी धनराशि का एक छोटा सा हिस्सा भी नहीं पाती थीं।
हेमा मालिनी ने बताया कि निर्देशक और निर्माता उन्हें बहुत पसंद करते थे, लेकिन उनका ध्यान कभी पैसों पर केंद्रित नहीं रहा। जैसे-जैसे उनकी लोकप्रियता बढ़ी, निर्माता अपनी इच्छा से उनकी फीस में थोड़ी वृद्धि कर देते थे। उन्होंने बताया कि उनकी मां उनके सारे काम संभालती थीं और वह निर्माताओं के प्रति बहुत उदार थीं। यदि कोई निर्माता आकर कहता था कि वह फिल्म के लिए अधिक भुगतान नहीं कर सकता, तो उनकी मां बिना किसी आपत्ति के मान जाती थीं। उन्होंने कभी किसी फिल्म के लिए यह शर्त नहीं रखी कि उन्हें एक निश्चित फीस ही चाहिए। निर्माता जो भी छोटा लिफाफा देते थे, उसे वह आशीर्वाद मानकर स्वीकार कर लेती थीं। उनके लिए फिल्मों से मिलने वाला सम्मान पैसों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण था।
हेमा मालिनी ने 1968 की फिल्म 'सपनों का सौदागर' से बॉलीवुड में कदम रखा था। इसके बाद वह 1970 और 1980 के दशक में एक बड़ी स्टार के रूप में उभरीं। उन्होंने 'सीता और गीता', 'शोले', 'ड्रीम गर्ल', 'सत्ते पे सत्ता' और 'बागबान' जैसी कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों में काम किया। दर्शकों द्वारा उनकी स्क्रीन उपस्थिति को काफी सराहा गया, जिसके बाद उन्हें बॉलीवुड की 'ड्रीम गर्ल' के रूप में जाना जाने लगा। अभिनय के अलावा हेमा मालिनी एक कुशल भरतनाट्यम नर्तकी भी हैं। वर्तमान में वह राजनीति में सक्रिय हैं और लोकसभा सदस्य के रूप में कार्यरत हैं। भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को देखते हुए, उन्हें वर्ष 2000 में देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'पद्म श्री' से सम्मानित किया गया। इसके बाद 2012 में सर पदमपत सिंघानिया विश्वविद्यालय ने उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की। अभिनय में सफलता हासिल करने के बाद उन्होंने निर्देशन और निर्माण के क्षेत्र में भी हाथ आजमाया। उन्होंने 1992 में फिल्म 'दिल आशना है' का निर्देशन और निर्माण किया, जिसमें शाहरुख खान और दिव्या भारती ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं। इसके बाद 1995 में उन्होंने अपनी भतीजी मधु और सुदेश बेरी के साथ फिल्म 'मोहिनी' बनाई। बाद में उन्होंने फिल्मों में काम कम कर दिया और शास्त्रीय नृत्य एवं टीवी परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया।

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