हस्तिनापुर के वीर: भीष्म, कुंती, गांधारी और शकुनी के किरदारों ने बताए जीवन के सदाबहार मूल्य
सोनी सब के शो ‘हस्तिनापुर के वीर’ के कलाकारों ने भीष्म, कुंती, गांधारी और शकुनी के किरदारों के जरिए जीवन के सदाबहार मूल्यों और महत्वपूर्ण सीख को साझा किया।

तस्वीर में बाएं से दाएं शो ‘हस्तिनापुर के वीर’ के कलाकार अपने-अपने किरदारों की वेशभूषा में एक साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं।
सोनी सब का शो ‘हस्तिनापुर के वीर’ भारत के महानतम महाकाव्यों में से एक को प्रभावशाली कहानी और भावनात्मक पलों के माध्यम से जीवंत कर रहा है। शो का मूल संदेश यह है कि सच्ची ताकत केवल शक्ति से नहीं, बल्कि मूल्यों, ईमानदारी और सही के साथ खड़े रहने के साहस से आती है।
शो में धर्म को व्यक्तिगत लाभ से ऊपर रखने, बच्चों का पालन-पोषण दृढ़ता और करुणा के साथ करने तथा लालच, ईर्ष्या और छल के परिणामों को दर्शाया गया है। ‘हस्तिनापुर के वीर’ दर्शकों को यह संदेश देता है कि व्यक्ति के चुनाव ही उसकी विरासत तय करते हैं। पांडवों और कौरवों के अनकहे बचपन की यात्रा को प्रस्तुत करते हुए यह शो ऐसे जीवन मूल्यों को सामने लाता है, जो पीढ़ियों तक प्रासंगिक बने रहते हैं। इसी क्रम में शो के कलाकारों ने उन प्रमुख जीवन पाठों को साझा किया, जिन्हें वे मानते हैं कि हर दर्शक अपने साथ लेकर जा सकता है।
भीष्म पितामह की भूमिका निभा रहे मनीष वधवा ने कहा, “भीष्म पितामह अटूट प्रतिबद्धता, अनुशासन और हर निर्णय के साथ आने वाली जिम्मेदारी का प्रतीक हैं। अगर ‘हस्तिनापुर के वीर’ से दर्शक एक सबक ले सकते हैं, तो वह यही है कि महानता उसी में है जब इंसान अपने सिद्धांतों पर अडिग रहता है, चाहे रास्ता कितना भी कठिन क्यों न हो। आज की तेज़ रफ़्तार दुनिया में, जहाँ शॉर्टकट अक्सर आसान लगते हैं, वहाँ ईमानदारी, धैर्य और निस्वार्थ भाव जैसे मूल्य और भी ज़्यादा अहम हो जाते हैं। असली नायक इसलिए याद नहीं किए जाते कि वे सबसे ताकतवर थे, बल्कि इसलिए कि उन्होंने अपने चरित्र से दूसरों को प्रेरित किया।”
कुंती की भूमिका निभा रहीं तोरल रसपुत्रा ने कहा, “मेरे लिए कुंती की यात्रा यह याद दिलाती है कि असली ताक़त अक्सर शांत होती है और धैर्य में जड़ें जमाए रहती है। हर कठिनाई के बावजूद उन्होंने अपने बच्चों को ईमानदारी, करुणा और धर्मभाव से पाला। एक माँ के रूप में उनका सबसे बड़ा हासिल सिर्फ़ महान योद्धाओं को जन्म देना नहीं था, बल्कि अच्छे इंसानों को गढ़ना था। मुझे लगता है कि यह सबक आज के समय में बेहद अहम है, क्योंकि हर मातापिता चाहते हैं कि उनके बच्चों में मजबूत मूल्य हों। कुंती हमें खूबसूरती से यह याद दिलाती हैं कि चरित्र ही सबसे बड़ी विरासत है, जिसे हम अपने बच्चों को दे सकते हैं।”
गांधारी का किरदार निभा रहीं विवाना सिंह ने कहा, “गांधारी की सबसे बड़ी ताक़त उनके अटूट न्यायभाव में है। वह सबसे पहले एक माँ हैं, लेकिन कभी भी अपने बेटे दुर्योधन के प्रति प्रेम को सही-गलत की समझ पर हावी नहीं होने देतीं। अगर उनका बेटा गलती करता है, तो वह मानती हैं कि उसे उसके परिणाम भुगतने चाहिए। मेरे लिए यह महाभारत का सबसे शक्तिशाली सबक है कि सच्चा प्रेम अपने करीबियों की आँख मूँदकर रक्षा करना नहीं है, बल्कि उन्हें सही राह दिखाना है। आज की दुनिया में, जहाँ अक्सर अपने प्रियजनों की गलतियों को नज़रअंदाज़ करना आसान लगता है, वहाँ गांधारी हमें याद दिलाती हैं कि ईमानदारी और जवाबदेही ही प्रेम का सबसे बड़ा रूप है।”
शकुनी की भूमिका निभा रहे चंदन आनंद ने कहा, “शकुनी सबसे दिलचस्प किरदारों में से एक है, क्योंकि वह हमें याद दिलाता है कि गुस्सा, बदला और चालाकी कैसे रिश्तों और पूरे राज्य को बर्बाद कर सकते हैं। दर्शक उसकी चतुर रणनीतियों को सामने आते हुए देखकर आनंद लेते हैं, लेकिन साथ ही यह भी देखते हैं कि हर निर्णय को नकारात्मकता से चलाने के क्या परिणाम होते हैं। मुझे लगता है कि यही महाभारत को कालजयी बनाता है। यह सिर्फ़ नायकों का जश्न नहीं मनाता, बल्कि अपने विरोधी पात्रों की गलतियों से भी हमें सबक सिखाता है। कई बार सबसे बड़े सबक यह समझने से आते हैं कि हमें क्या नहीं करना चाहिए।”
सोनी सब पर ‘हस्तिनापुर के वीर’ का प्रसारण सोमवार से शनिवार रात 9:00 बजे किया जा रहा है। शो अपने पात्रों और उनकी यात्राओं के माध्यम से दर्शकों तक ऐसे जीवन मूल्यों को पहुंचाने का प्रयास कर रहा है, जो समय के साथ भी प्रासंगिक बने हुए हैं।

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