सोनी सब के शो हस्तिनापुर के वीर में गांधारी का किरदार निभा रहीं विवाना सिंह ने बताया कि माता-पिता के व्यवहार से ही बच्चे जीवन के असली मूल्य सीखते हैं।

सोनी सब का शो हस्तिनापुर के वीर पांडवों और कौरवों के अनकहे बचपन को सामने लाता है, जहाँ उनके रिश्ते और वे मूल्य दिखाए गए हैं जिन्होंने हस्तिनापुर को आकार दिया। शो में गांधारी का किरदार निभा रहीं विवाना सिंह ने बताया कि यह कहानी दर्शकों के सामने गांधारी का एक नया दृष्टिकोण पेश करती है। उनके अनुसार, गांधारी एक न्यूक्लियर फैमिली में नहीं रहतीं और उनके 101 बच्चों पर केवल उनका ही नहीं, बल्कि परिवार के अन्य सदस्यों का भी प्रभाव पड़ता है। वह हर बच्चे पर बराबर ध्यान देने की कोशिश करती हैं, लेकिन ब्लाइंडफोल्ड बाँधकर रहने के कारण दुनिया को दूसरों की आँखों से देखती हैं। धीरे-धीरे उन्हें एहसास होता है कि उनके बच्चों पर पड़ने वाला हर प्रभाव सकारात्मक नहीं है। उन्होंने कहा कि यह माता-पिता के लिए महत्वपूर्ण संदेश है कि वे हमेशा इस बात पर ध्यान दें कि उनके बच्चे किन लोगों के साथ समय बिता रहे हैं, चाहे वे दोस्त हों, रिश्तेदार हों या परिवार के सदस्य। उन्होंने यह भी कहा कि हस्तिनापुर के वीर यह दर्शाता है कि ज़रूरत से ज़्यादा प्यार और लाड़-प्यार भी बच्चे को गलत दिशा में ले जा सकता है।

विवाना सिंह ने बताया कि वह हर दिन गांधारी से जुड़ाव महसूस करती हैं। उनके अनुसार, पट्टी बाँधकर अभिनय करना अब तक उनके करियर की सबसे बड़ी चुनौती रही है। उन्होंने कहा कि भावनात्मक दृश्यों में अभिनेता सामान्य तौर पर आँखों के संपर्क से जुड़ते हैं, लेकिन गांधारी के किरदार में यह संभव नहीं है। इसलिए हर दिन उन्हें उसकी भावनाओं, रिश्तों और सोच को समझने की चुनौती मिलती है, मानो वह उसकी ज़िंदगी जी रही हों। उन्होंने कहा कि कई मायनों में वह खुद को गांधारी से जोड़ पाती हैं, क्योंकि ठीक उसकी तरह वह भी लोगों से घिरी रहती हैं, लेकिन पट्टी की वजह से उनसे अलग-थलग हो जाती हैं। उनके अनुसार, गांधारी ने स्वयं पट्टी पहनने का निर्णय लिया और इसके बाद उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ा। उनका मानना है कि पूरी तरह किसी और पर निर्भर होना कभी आसान नहीं होता।

गांधारी के रिश्तों पर बात करते हुए विवाना सिंह ने कहा कि उनके लिए सबसे चुनौतीपूर्ण रिश्ता गांधारी और दुर्योधन का रहा है। उन्होंने बताया कि एक माँ होने के नाते गांधारी महसूस करती हैं कि उनका बेटा धीरे-धीरे गलत रास्ते पर जा रहा है, लेकिन साथ ही वह उलझन, बेबसी और टूटे दिल का सामना भी करती हैं। वह चाहती हैं कि दुर्योधन धर्म के मार्ग पर चले, लेकिन जब उन्हें उसके कार्यों के बारे में पता चलता है तो वह हैरान रह जाती हैं और सोचती हैं कि उसने ये मूल्य कहाँ से सीखे। उन्होंने कहा कि धृतराष्ट्र के साथ गांधारी का रिश्ता अलग है, क्योंकि वह उनकी असुरक्षाओं को समझती हैं और धैर्य, बुद्धिमत्ता तथा शांति से उनका मार्गदर्शन करने की कोशिश करती हैं। वहीं शकुनि के साथ वह उसकी बातें सुनती हैं, लेकिन उसकी सोच को कभी बढ़ावा नहीं देतीं। उनके अनुसार, दुर्योधन को समझाने और सही रास्ते पर लाने वाले दृश्य उनके लिए सबसे अधिक भावनात्मक और चुनौतीपूर्ण रहे हैं।

विवाना सिंह ने कहा कि गांधारी के व्यक्तित्व की सबसे प्रेरणादायक बात उनका धर्म और न्याय पर अटूट विश्वास है। उनके अनुसार, गांधारी मानती हैं कि सही बात हमेशा सबसे पहले आनी चाहिए। यदि उनका अपना बेटा भी गलत है, तो वह यह मानती हैं कि उसे सज़ा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सही के साथ खड़े रहने की यह क्षमता, चाहे वह व्यक्तिगत रूप से कितनी भी कठिन क्यों न हो, उन्हें बेहद प्रभावित करती है।

पट्टी बाँधकर अभिनय के अनुभव को साझा करते हुए विवाना सिंह ने कहा कि यह चुनौती समय के साथ भी सहज नहीं हुई। उनके अनुसार, हर दिन और हर दृश्य अब भी उनके लिए नई चुनौती लेकर आता है, क्योंकि उन्हें किसी और इंसान का रूप लेना पड़ता है, उसकी ज़िंदगी जीनी होती है, उसकी भावनाओं को समझना होता है और उसके हावभाव को अपनाना होता है। उन्होंने कहा कि अभिनेता सामान्य तौर पर अपनी आँखों के माध्यम से सह-कलाकारों और दर्शकों से जुड़ते हैं, लेकिन गांधारी के पास यह सुविधा नहीं है। इसलिए उन्हें उसकी भावनाओं को अपनी आवाज़, हावभाव और छोटे-छोटे इशारों के माध्यम से व्यक्त करने के नए तरीके खोजने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि वह इस चुनौतीपूर्ण किरदार को निभाने का अवसर मिलने के लिए आभारी हैं और हर नई चुनौती को कृतज्ञता के साथ स्वीकार करने की कोशिश करती हैं।

गांधारी की कहानी की वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर विवाना सिंह ने कहा कि आज अक्सर माता-पिता अपने फोन में व्यस्त रहते हैं और बच्चे भी अपने फोन में खोए रहते हैं। इससे उनके बीच बातचीत कम होती जाती है और आपसी जुड़ाव धीरे-धीरे कमज़ोर पड़ने लगता है। उन्होंने कहा कि यह भी एक तरह की पट्टी है, क्योंकि हम एक-दूसरे को सच में देखना और समझना बंद कर देते हैं। उनके अनुसार, माता-पिता की बड़ी ज़िम्मेदारी केवल बच्चों को अच्छे स्कूल या सुविधाएँ देना नहीं है, बल्कि उन्हें अपना समय, ध्यान और प्यार देना भी है। उन्होंने कहा कि माता-पिता को अपने बच्चों के साथ समय बिताना चाहिए, उनकी बातें सुननी चाहिए और यह समझना चाहिए कि वे क्या महसूस कर रहे हैं। विवाना सिंह ने कहा, “हस्तिनापुर के वीर हमें याद दिलाता है कि बच्चे सिर्फ शब्दों से मूल्य नहीं सीखते, बल्कि हमारे कामों को देखकर सीखते हैं। मैं सच में मानती हूँ कि आज हम उन्हें जो प्यार और मार्गदर्शन देंगे, वही कल उन्हें इंसान बनाएगा।”

सोनी सब पर हस्तिनापुर के वीर का प्रसारण हर सोमवार से शनिवार रात 9:00 बजे किया जाता है।

Pratahkal Bureau

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