हस्तिनापुर के वीर: सोनी सब पर दिखेगी पांडवों और कौरवों के बचपन की कहानी
यह शो पांडवों और कौरवों के प्रारंभिक जीवन, उनके आपसी रिश्तों और उन अनुभवों को दिखाएगा जिन्होंने उनके भविष्य के व्यक्तित्व की नींव रखी।

सोनी सब के नए शो 'हस्तिनापुर के वीर' के मुख्य कलाकार (बाएं से दाएं): हरित गबानी (नकुल), आयुध भानुशाली (दुर्योधन), मयंक यादव (सहदेव), अथर खान (युधिष्ठिर), उर्वा सविलिया (अर्जुन), शौर्य उपाध्याय (दुशासन) और सुभाष खत्री (भीम)।
सोनी सब भारतीय महाकाव्य महाभारत की कथा को उसकी शुरुआत से दर्शाने के लिए नया शो ‘हस्तिनापुर के वीर’ लेकर आ रहा है। यह धारावाहिक दर्शकों को पांडवों और कौरवों के बचपन की उस दुनिया में ले जाता है, जहाँ उनके अनुभवों ने उनकी सोच और निर्णयों की नींव रखी और उन्हें वह बनाया, जिसे आज पूरी दुनिया एक महानायक के रूप में याद करती है।
शो में पांडवों और कौरवों के प्रारंभिक रिश्तों और टकराव को विस्तार से दिखाया गया है। इसमें पांडव यह सीखते हैं कि कर्म का फल अवश्य मिलता है, जबकि कौरव यह समझते हैं कि शक्ति हमेशा उनके नियंत्रण में नहीं रहती। पांडवों की भूमिका में अथर खान युधिष्ठिर के रूप में, सुभाष खत्री भीम के रूप में, उर्वा सविलिया अर्जुन के रूप में, हरित गबानी नकुल के रूप में और मयंक यादव सहदेव के रूप में नजर आएँगे। ये सभी किरदार कम उम्र में ही जिम्मेदारी, भावनाओं और पहचान से संघर्ष करते दिखाई देंगे। प्रत्येक पात्र अलग-अलग तरह से अपेक्षाओं का सामना करता है, जिसमें युधिष्ठिर का कर्तव्य भाव, भीम का सहज स्वभाव, अर्जुन का स्वयं को सिद्ध करने का जुनून तथा नकुल-सहदेव की शांत उपस्थिति शामिल है, जो अपने-अपने तरीके से सीखते और ढलते हैं।
इसके विपरीत, कौरवों का नेतृत्व आयुध भानुशाली दुर्योधन के रूप में और शौर्य उपाध्याय दुशासन के रूप में करते नजर आएँगे। महल में पले-बढ़े होने के कारण उनमें आत्मविश्वास और दृढ़ता स्पष्ट दिखाई देती है। उनकी गहरी अपनत्व और अधिकार की भावना उनके व्यक्तित्व को प्रारंभ से ही परिभाषित करती है, जो पांडवों के साथ उनके संबंधों को प्रभावित करती है और आगे की कहानी का स्वर निर्धारित करती है।
अपने किरदार के बारे में बात करते हुए अथर खान ने कहा, “युधिष्ठिर हमेशा सही काम करने की कोशिश करता है, चाहे वह कितना भी मुश्किल क्यों न हो। उसे निभाते हुए मुझे एहसास हुआ कि इतनी कम उम्र में भी वह कितनी जिम्मेदारी उठाता है। वह तुरंत प्रतिक्रिया नहीं देता, सोचकर कदम उठाता है और इससे मुझे उसे बेहतर समझने का मौका मिला।”
सुभाष खत्री ने भीम के किरदार पर कहा, “भीम तुरंत प्रतिक्रिया देता है, अगर कुछ गलत लगे, तो वह तुरंत कूद पड़ता है। भीम का किरदार निभाना ऊर्जा से भरपूर है और बहुत वास्तविक लगता है। साथ ही, उसे खुद को नियंत्रित भी करना पड़ता है, जो मेरे लिए नया अनुभव था। मुझे उसके भावनात्मक पहलू को भी खोजने में मज़ा आया, क्योंकि वह सिर्फ मजबूत ही नहीं, बल्कि बेहद वफादार भी है। यह किरदार शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण रहा है, जिसने इस सफर को और भी रोमांचक बना दिया।”
आयुध भानुशाली ने दुर्योधन के किरदार पर कहा, “दुर्योधन को लगता है कि उसके आसपास की हर चीज़ उसकी है और उसे अच्छा नहीं लगता जब चीज़ें उसके मुताबिक़ नहीं होतीं। मुझे लगता है कि वह सच में मानता है कि उसे हमेशा पहले और नियंत्रण में रहना चाहिए। उसे निभाते हुए मज़ा आता है, खासकर यह दिखाने में कि जब कोई उसे चुनौती देता है तो वह कैसे प्रतिक्रिया करता है।”
इस शो के माध्यम से दर्शक महाभारत की एक नई और भावनात्मक प्रस्तुति देख पाएँगे, जहाँ कहानी केवल युद्धों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उन रिश्तों, मूल्यों और निर्णयों को भी उजागर करती है, जिन्होंने इन महानायकों का निर्माण किया।

Pratahkal Bureau
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