जब फिल्म बनाने पहुंचीं अनुप्रिया नागर तो प्रेमानंद महाराज ने दी ये खास नसीहत, अब 'हनुमान अंश' ने रचा इतिहास|
बाबा नीम करोली के जीवन पर बनी फिल्म 'हनुमान अंश' की रिलीज से पहले प्रड्यूसर अनुप्रिया नागर ने प्रेमानंद महाराज से मुलाकात कर आशीर्वाद लिया था।

बाएं से नीम करोली बाबा, बीच में प्रेमानंद महाराज और दाएं ओर बैठी प्रड्यूसर अनुप्रिया नागर 'हनुमान अंश' फिल्म के संदर्भ में नजर आ रही हैं।
बाबा नीम करोली के जीवन पर आधारित फिल्म 'हनुमान अंश' बॉक्स ऑफिस पर अपनी असाधारण और ऐतिहासिक कमाई के चलते इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई है। इस फिल्म ने अपनी शानदार सफलता से हर किसी को हैरान कर दिया है और रिलीज के 26 दिन बाद यह छप्पर फाड़कर कमाई कर रही है, जिसमें बजट के मुकाबले लगभग 2600 प्रतिशत की अद्भुत बढ़ोतरी दर्ज की गई है और इसने कुल 54.13 करोड़ रुपये का कारोबार कर लिया है। इस बड़ी सफलता के पीछे की एक खास कहानी यह भी है कि फिल्म के निर्माण से पहले इसकी प्रड्यूसर अनुप्रिया नागर प्रसिद्ध आध्यात्मिक संत प्रेमानंद महाराज से आशीर्वाद लेने पहुंची थीं, जहां उन्हें फिल्म निर्माण को लेकर कुछ बेहद महत्वपूर्ण और कड़े दिशा-निर्देश मिले थे।
जब प्रड्यूसर ने प्रेमानंद महाराज से यह सवाल किया कि क्या ऐसे धार्मिक मार्ग पर रहकर फिल्म का निर्माण करना भी एक प्रकार की सेवा बन सकता है, तो महाराज जी ने उन्हें आगाह करते हुए विस्तार से समझाया। प्रेमानंद महाराज ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि किसी भी महापुरुष का अनुकरण करना बेहद कठिन होता है। उन्होंने हिदायत दी थी कि ऐसे विषयों पर काम करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि उसमें किसी भी प्रकार की सांसारिकता न आने पाए, क्योंकि किसी भी महापुरुष के चरित्र को देखकर दर्शकों के मन में वैराग्य, भक्ति और ज्ञान—तीनों भावों का संचार होना चाहिए। महाराज जी ने इस बात पर जोर दिया था कि महापुरुष के चरित्र में कोई भी ऐसा दृश्य या अभिनय नहीं होना चाहिए जो किसी भी रूप में गलत या अपराध की श्रेणी में आ जाए।
संत प्रेमानंद महाराज ने प्रड्यूसर को चेताते हुए आगे कहा था कि बाबा नीम करोली जैसे भगवत प्राप्त महापुरुषों का अनुकरण करना सामान्य स्थिति में संभव नहीं है। यदि बाहर से थोड़ा बहुत अनुकरण किया भी जाए, तो यह पूरी सावधानी रखनी चाहिए कि सिर्फ फिल्म की लोकप्रियता या समाज प्रियता हासिल करने के लिए उसमें कुछ भी मनगढ़ंत या मसालेदार विषय न परोसा जाए। उन्होंने स्पष्ट किया था कि यदि फिल्म बनाते वक्त कुछ ऐसा परोस दिया गया जो महापुरुष के वास्तविक चरित्र से मेल नहीं खाता है, तो वह एक गंभीर अपराध बन जाएगा। इसलिए उन्होंने सलाह दी थी कि चाहे लोग इसे देखें या न देखें, लेकिन उनके जीवन के संबंध में जो भी प्रामाणिक बातें पढ़ी और सुनी गई हैं, ठीक वैसे ही फिल्मांकन किया जाना चाहिए, न कि किसी अप्रमाणित या काल्पनिक तथ्य को जगह दी जाए।
महाराज जी ने यह भी समझाया था कि महापुरुषों का चरित्र पूरी तरह से निर्विषय और लोकपावन करने वाला होता है, इसलिए लोकप्रियता के लालच में उसमें सांसारिकता का पुट नहीं डालना चाहिए। यदि किसी को पर्दे पर ऐसे महान संतों का चरित्र निभाना है या चित्रित करना है, तो उसके लिए खुद को कुछ दिनों तक साधना के मार्ग पर चलना होगा। फलाहार और पवित्र सात्विक भोजन ग्रहण करने के साथ-साथ संतों का संग करना और उनके चरित्र का अध्ययन करना आवश्यक है, तभी अभिनय में सच्ची जीवंतता आ सकती है। अन्यथा केवल बाहरी नाटक या दिखावा ही रह जाएगा जिसमें सत्यता का अभाव होगा।
बताया जा रहा है कि फिल्म 'हनुमान अंश' के मेकर्स ने प्रेमानंद महाराज की इन तमाम नसीहतों और हिदायतों को बेहद गंभीरता से लिया तथा फिल्म निर्माण के दौरान पूरी पवित्रता और सत्यता को बनाए रखने का प्रयास किया। महाराज जी के वचनों और मार्गदर्शन का ही परिणाम है कि आज यह फिल्म न केवल दर्शकों के दिलों पर राज कर रही है, बल्कि व्यावसायिक सफलता के नए कीर्तिमान भी स्थापित कर रही है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
