गुरुग्राम के एक कॉमेडी शो में 370 रुपये की बिरयानी को लेकर की गई एक महिला-विरोधी टिप्पणी ने तूल पकड़ लिया है। क्या सहमति की कोई कीमत होती है? इस विवाद में कॉमेडियन की भूमिका पर उठे सवालों और उसके बाद हुई कार्रवाई का पूरा विवरण।

तस्वीर में बाईं से दाईं ओर एलविश यादव, कॉमेडियन प्रणित मोरे और हिमांशु जांगड़ा। गुरुग्राम में एक कॉमेडी शो के दौरान की गई महिला-विरोधी टिप्पणी पर मचे विवाद के बाद इन तीनों की प्रतिक्रियाएं और भूमिकाएं चर्चा में हैं।
सोशल मीडिया के दौर में कंटेंट क्रिएटर्स की जिम्मेदारी एक बार फिर बहस के केंद्र में है। हाल ही में गुरुग्राम में आयोजित एक कॉमेडी शो के दौरान एक दर्शक द्वारा की गई महिला-विरोधी और अपमानजनक टिप्पणी ने इंटरनेट पर भारी विवाद खड़ा कर दिया है। इस मामले ने न केवल उस व्यक्ति को, बल्कि उस कॉमेडियन को भी सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है, जिसने इस आपत्तिजनक बयान का समर्थन किया। यह घटना एक ऐसे गंभीर मुद्दे को उजागर करती है जहाँ सहमति और मानवीय गरिमा को चंद रुपयों के निवेश से तौला गया।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब गुरुग्राम में एक शो के दौरान वेब डेवलपर हिमांशु जांगड़ा ने सार्वजनिक रूप से एक महिला के प्रति अपनी संकीर्ण मानसिकता का परिचय दिया। हिमांशु ने दावा किया कि उसने एक महिला पर चिकन बिरयानी के लिए 370 रुपये खर्च किए, जिसके बदले में वह शारीरिक अंतरंगता की उम्मीद कर रहा था। उसने बेहद अशोभनीय लहजे में कहा कि जब महिला ने घर छोड़ने के लिए कहा, तो उसे लगा कि 370 रुपये की वसूली करना उसका अधिकार है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मंच पर मौजूद कॉमेडियन प्रणित मोरे ने इस टिप्पणी का विरोध करने के बजाय उस पर ठहाके लगाए और बाद में उस क्लिप को अपने सोशल मीडिया पर साझा भी किया।
₹370 ki biryani ne do cheezein expose kar di:
— Elvish Yadav (@ElvishYadav) June 10, 2026
Ek aadmi ko laga consent ka MRP hota hai.
Aur ek comedian ko laga har uncomfortable silence ko laughter track se bachaya ja sakta hai.
Biryani toh dum pe bani thi, controversy ego pe🥹
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। यूट्यूबर एलविश यादव ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी कड़ी नाराजगी दर्ज की। उन्होंने टिप्पणी की कि 370 रुपये की बिरयानी ने दो कड़वे सच उजागर कर दिए हैं—पहला यह कि एक व्यक्ति को लगता है कि सहमति का भी एक एमआरपी (MRP) होता है, और दूसरा यह कि एक कॉमेडियन को लगता है कि हर असहज खामोशी को हंसी के शोर से छिपाया जा सकता है। कंटेंट क्रिएटर कुशा कपिला ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जब कोई क्रिएटर किसी आपत्तिजनक वीडियो को एडिट करता है और उसे प्रचारित करता है, तो वह उन विचारों का समर्थन ही कर रहा होता है। उन्होंने जोर दिया कि प्रभाव रखने वाले लोगों की जिम्मेदारी है कि वे हानिकारक व्यवहार को बढ़ावा न दें।
विस्तृत आलोचना और विवाद के बढ़ते दबाव के बीच हिमांशु जांगड़ा ने माफी मांगी और बाद में अपना सोशल मीडिया अकाउंट निष्क्रिय कर दिया। रिपोर्टों के अनुसार, उसे गुरुग्राम स्थित उसके नियोक्ता कंपनी द्वारा नौकरी से भी निकाल दिया गया है। यह घटना दर्शाती है कि डिजिटल स्पेस में शब्दों की गंभीरता और जिम्मेदारी का दायरा कितना व्यापक है। यह प्रकरण न केवल बलात्कार संस्कृति (रेप कल्चर) को बढ़ावा देने वाले बयानों के खिलाफ जन-आक्रोश का प्रतीक बन गया है, बल्कि यह सार्वजनिक मंचों पर जवाबदेही तय करने की एक नई बहस भी छेड़ गया है।

