गोल्डन इम्पैक्ट अचीवर अवॉर्ड्स 2026 के तीसरे संस्करण की घोषणा
2030_का_भारत संस्था द्वारा देशभर से 21 सामाजिक नायकों का होगा चयन, शिक्षा, भूखमुक्ति और पर्यावरण संरक्षण क्षेत्रों में असाधारण कार्य के लिए मिलेगा सम्मान।

इंदौर में '2030_का_भारत' संस्था के संस्थापक डॉ. अतुल मलिकराम ने गोल्डन इम्पैक्ट अचीवर अवॉर्ड्स के तीसरे अध्याय की घोषणा की, जिसका उद्देश्य देशभर के अनसुने नायकों को सम्मानित करना है।
समाज को नई दिशा देने वाले व्यक्तित्व सदैव मंचों की चकाचौंध में ही नहीं मिलते, बल्कि कई चेहरे भीड़ का हिस्सा बनकर मौन रहकर जिंदगियां बदलने का सामर्थ्य रखते हैं। अखबारों की सुर्खियों से दूर रहने वाले इन लोगों के छोटे-छोटे प्रयास किसी के अंधियारे भविष्य में उजाला भर देते हैं। कोई किसी वंचित बच्चे की शिक्षा का आधार बनता है, कोई क्षुधातुर व्यक्ति के लिए भोजन का माध्यम, तो कोई पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करता है। ऐसे ही अनसुने और अनदेखे नायकों को वैश्विक पटल पर पहचान दिलाने वाली विशिष्ट पहल 'गोल्डन इम्पैक्ट अचीवर अवॉर्ड्स' अब अपने तीसरे संस्करण के साथ समाज में सकारात्मक परिवर्तन की नई गूँज के साथ वापसी कर रही है।
सतत विकास के लक्ष्यों को जनआंदोलन बनाने हेतु समर्पित संस्था '2030_का_भारत' द्वारा प्रवर्तित इस अभियान के प्रथम सोपान में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और भोजन की बर्बादी को रोककर जरूरतमंदों की सहायता करने वाले 8 कर्मयोगियों को सम्मानित किया गया था। इसके पश्चात द्वितीय संस्करण में शिक्षा, भूखमुक्त समाज और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय 15 बदलावकर्ताओं का अभिनंदन हुआ। इस वर्ष यह कारवाँ और अधिक विशाल होने जा रहा है, जहाँ देश के विभिन्न कोनों से 21 ऐसे व्यक्तियों का चयन किया जाएगा जिन्होंने उक्त तीनों क्षेत्रों में से किसी एक में असाधारण योगदान दिया है। उल्लेखनीय है कि पूर्व में 7 राज्यों तक सीमित रही यह पहल अब अखिल भारतीय स्वरूप ले चुकी है, जिससे सुदूर क्षेत्रों में निस्वार्थ भाव से समाज सेवा कर रहे व्यक्तियों की गाथा अब पूरे राष्ट्र तक पहुँच सकेगी।
अभियान के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए '2030_का_भारत' के संस्थापक डॉ. अतुल मलिकराम ने कहा कि देश केवल नीतियों के क्रियान्वयन से नहीं, बल्कि उन लोगों के संकल्प से बदलता है जो परोपकार हेतु जीवन जीते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जब समाज अपने वास्तविक नायकों को पहचानने लगेगा, तब सामाजिक परिवर्तन मात्र चर्चा का विषय न रहकर एक राष्ट्रीय संस्कृति का रूप ले लेगा। संस्था का यह मानना है कि वर्ष 2030 तक सतत विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति तभी संभव है जब सरकार के साथ-साथ आम जनमानस भी इन उद्देश्यों हेतु संकल्पित हो। इसी दृष्टि से यह सम्मान उन लोगों को समर्पित है जो समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए बदलाव के संवाहक बन रहे हैं। 'गोल्डन इम्पैक्ट अचीवर अवॉर्ड्स- 2026' पुनः यह प्रमाणित करने के लिए तत्पर है कि वास्तविक नायक वही हैं जिनका शोर भले ही कम हो, किंतु उनके कार्यों का प्रभाव अत्यंत गहरा होता है।

Pratahkal Bureau
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