मेनार की मिट्टी से सिनेमा के आकाश तक: रसोइए से अभिनेता-निर्माता बने देव मेनारिया की संघर्षगाथा
मेवाड़ के मेनार गांव से निकलकर मुंबई तक का सफर तय करने वाले देव मेनारिया की हिंदी फिल्म “बिहु अटैक” 16 जनवरी को देशभर में रिलीज हुई। रसोइए के सहायक से अभिनेता-निर्माता बने देव की यह फिल्म असम के बिहु महोत्सव पर आधारित आतंकी हमले की पृष्ठभूमि में देशभक्ति और साहस की कहानी प्रस्तुत करती है।

मुंबई।उदयपुर जिले के छोटे से गांव मेनार से निकलकर एक युवक ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि सपने सच्चे हों और हौसले अडिग, तो सीमित संसाधन भी सफलता की राह नहीं रोक सकते। मेवाड़ के युवा अभिनेता देव मेनारिया के अभिनय से सजी हिंदी फिल्म “बिहु अटैक” आज शुक्रवार, 16 जनवरी, को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है।
गांव से सपनों की उड़ान
वर्ष 1985 में मेवाड़ के उदयपुर जिले के मेनार गांव में रमेश मेनारिया और शांता देवी के घर जन्मे देव मेनारिया बचपन से ही गायक बनने का सपना देखते थे। लेकिन पिता की असमय मृत्यु ने उनके जीवन को एक गहरे संघर्ष की ओर मोड़ दिया। पारिवारिक जिम्मेदारियों के बोझ तले दबे देव ने हालात से हार मानने के बजाय संघर्ष का रास्ता चुना।
मुंबई की रसोई से कैमरे तक
रोज़गार की तलाश में देव मुंबई पहुंचे, जहां उन्होंने अपने ही गांव के प्रभु लाल मेनारिया की हिना टूर एंड ट्रेवल्स कंपनी में काम शुरू किया। संघर्ष के दिनों में ऐसे हालात भी आए जब पेट की आग बुझाने के लिए उन्हें गांव के परिचितों के साथ घरों और आयोजनों में महाराज (रसोइए) के सहायक के रूप में काम करना पड़ा।
किचन हेल्पर के रूप में कठिन परिस्थितियों का सामना करने के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को मरने नहीं दिया।
मॉडलिंग से अभिनय की ओर
कुछ समय बाद देव को एक निजी कंपनी में नौकरी मिली। उनकी कद-काठी और व्यक्तित्व को देखकर उन्हें मॉडलिंग के अवसर मिलने लगे। गायक बनने का सपना देखने वाले देव ने इसे ईश्वर का संकेत मानते हुए अभिनय की दुनिया में कदम बढ़ाया। उन्होंने कई प्रोडक्ट्स की मॉडलिंग की और बाद में कई म्यूजिक एल्बम्स में काम कर अपनी पहचान बनाई।
‘बिहु अटैक’ की कहानी
इसी दौरान उनकी मित्रता असम मूल के सुजात खान से हुई। यह मित्रता आगे चलकर एक फिल्म के निर्माण का कारण बनी। असम के प्रसिद्ध बिहु महोत्सव के दौरान हुए एक आतंकवादी हमले की पृष्ठभूमि पर फिल्म “बिहु अटैक” की परिकल्पना की गई।
फिल्म का अधिकांश हिस्सा असम में ही शूट किया गया, जहां राज्य सरकार व भारतीय सेना ने पूरा सहयोग प्रदान किया।
निर्माता भी, अभिनेता भी...
फिल्म का निर्माण पीकेएस फैंस प्रोडक्शंस और देव मेनारिया की अपनी कंपनी मेनारिया शांति फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। देव मेनारिया ने बताया कि वे सनातन संस्कृति, देशभक्ति और ऐतिहासिक विषयों पर आधारित फिल्मों का निर्माण करना चाहते हैं।
उन्होंने यह भी साझा किया कि “बिहु अटैक” के बाद वे अहिल्याबाई होल्कर के जीवन पर आधारित एक मेगा ऐतिहासिक ड्रामा फिल्म पर काम कर रहे हैं, जिसकी पटकथा लेखन प्रक्रिया जारी है।
देशभक्ति और साहस की कहानी
भारतीय सेना और आतंकवादी ताकतों के बीच संघर्ष की पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म देशभक्ति, बलिदान और साहस की भावनाओं को गहराई से छूती है। तकनीकी रूप से सशक्त इस फिल्म में बॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता अरबाज खान सहित कई जाने-माने कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय से जान डाल दी है।
संघर्ष से सफलता तक
देव मेनारिया के लिए “बिहु अटैक” केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि उनके जीवन के संघर्षों की जीवंत कहानी है। सीमित संसाधनों, अस्वीकारों और अनगिनत चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।
आज मेवाड़ का यह लाल उन तमाम युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो छोटे गांवों से बड़े सपने देखते हैं।

मनीष पालीवाल
मनिष पालीवाल, मुंबई स्थित अनुभवी पत्रकार हैं, जो सामाजिक, राजनीतिक और स्थानीय खबरों की रिपोर्टिंग में माहिर हैं। अपनी गहन जांच और सटीक रिपोर्टिंग के लिए जाने जाने वाले मनिष हमेशा ताजा और विश्वसनीय समाचार पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास करते हैं। उनके लेखों में निष्पक्षता, तथ्यपरक विश्लेषण और स्थानीय घटनाओं की गहराई दिखाई देती है, जिससे पाठकों को समाचार का पूरा परिप्रेक्ष्य समझ में आता है। प्रात:काल में, मनिष पालीवाल की रिपोर्टिंग ने पाठकों के बीच विश्वास और लोकप्रियता दोनों ही अर्जित की है। मुलरुप से पालीवाल मेवाड़ नाथद्वारा क्षेत्र के केसुली गांव के निवासी है। यह दै.प्रात:काल के साथ 2003 से कार्यरत है।
