हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर में अपनी अलग पहचान बनाने वाली अभिनेत्री परवीन बाबी की 72वीं जयंती (4 अप्रैल 2026) पर एक बार फिर उनका जीवन, करियर और रहस्यमयी अंत चर्चा में है। 1970 और 1980 के दशक में बॉलीवुड की सबसे प्रभावशाली और ग्लैमरस अभिनेत्रियों में शामिल रहीं परवीन बाबी न केवल अपनी अदाकारी बल्कि अपने आधुनिक अंदाज़ और साहसी छवि के लिए भी जानी जाती थीं। उनका जीवन सफलता, विवाद, मानसिक संघर्ष और अंततः एकांत में समाप्त हुई कहानी का मिश्रण रहा।

4 अप्रैल 1954 को गुजरात के जूनागढ़ में एक प्रतिष्ठित परिवार में जन्मी परवीन बाबी का संबंध बाबी राजवंश से था। उनके पिता वली मोहम्मद खान बाबी जूनागढ़ के अंतिम नवाब थे। बचपन में ही पिता के निधन और भावनात्मक अकेलेपन ने उनके व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव डाला।

शिक्षा के लिए उन्होंने अहमदाबाद के सेंट ज़ेवियर्स कॉलेज में दाखिला लिया, जहां उन्होंने अंग्रेज़ी और मनोविज्ञान में उच्च शिक्षा प्राप्त की। यहीं से उन्होंने खुद को एक स्वतंत्र और आधुनिक महिला के रूप में विकसित किया। 1971 में उन्होंने मॉडलिंग से अपने करियर की शुरुआत की, और जल्द ही फिल्म इंडस्ट्री का रुख किया।


फिल्मों में उभरता सितारा:

1973 में फिल्म Charitra से अपने अभिनय करियर की शुरुआत करने के बाद परवीन बाबी ने जल्द ही बॉलीवुड में अपनी पहचान बना ली। 1970 के दशक के मध्य में दीवार और मजबूर जैसी फिल्मों से उन्हें बड़ी सफलता मिली।

इसके बाद उन्होंने कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया, जिनमें प्रमुख हैं:

  • अमर अकबर एंथनी
  • सुहाग
  • काला पत्थर
  • नमक हलाल

उनका पश्चिमी परिधान, आत्मविश्वास और आधुनिक महिला की छवि उस दौर की पारंपरिक नायिकाओं से अलग थी। यही कारण था कि उन्हें अक्सर अभिनेत्री जीनत अमान से तुलना का सामना करना पड़ा। परवीन बाबी अपने समय की सबसे अधिक पारिश्रमिक पाने वाली अभिनेत्रियों में शामिल थीं।


निजी जीवन:

परवीन बाबी का निजी जीवन हमेशा सुर्खियों में रहा। उनके रिश्ते डैनी डेन्जोंगपा, कबीर बेदी और महेश भट्ट के साथ चर्चा का विषय बने रहे, लेकिन उन्होंने कभी विवाह नहीं किया। उनके जीवन का सबसे संवेदनशील पहलू उनकी मानसिक स्थिति रही। उन्हें कथित रूप से पैरानॉइड स्किज़ोफ्रेनिया जैसी मानसिक बीमारी से जूझना पड़ा। समय के साथ उनका व्यवहार असामान्य होता गया और उन्होंने कई गंभीर आरोप भी लगाए, जिनमें फिल्म उद्योग और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों तक को शामिल किया गया।


1983 में परवीन बाबी अचानक फिल्म इंडस्ट्री से दूर हो गईं। उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा विदेशों में बिताया और बाद में मुंबई लौटकर एकांत जीवन जीने लगीं। इस दौरान उन्होंने कला, साहित्य और सामाजिक विषयों में रुचि ली, लेकिन सार्वजनिक जीवन से लगभग दूरी बना ली।


20 जनवरी 2005 को परवीन बाबी का निधन उनके मुंबई स्थित अपार्टमेंट में हुआ। उनकी मौत तब सामने आई जब कई दिनों तक उन्होंने अपने घर का दरवाज़ा नहीं खोला। पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, उनकी मृत्यु डायबिटीज़ और अंगों के फेल होने के कारण हुई। यह भी सामने आया कि उन्होंने कई दिनों तक भोजन नहीं किया था। उनकी अंतिम इच्छा ईसाई रीति से अंतिम संस्कार की थी, लेकिन उनके परिजनों ने उन्हें मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार मुंबई के जुहू कब्रिस्तान में दफनाया।


परवीन बाबी का जीवन केवल एक अभिनेत्री की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति की यात्रा भी है जिसने सामाजिक मानदंडों को चुनौती दी और व्यक्तिगत संघर्षों से जूझते हुए अपनी पहचान बनाई। उनकी जयंती पर उन्हें याद करना भारतीय सिनेमा के उस दौर को याद करना है, जहां ग्लैमर के पीछे कई अनकही कहानियां छिपी थीं।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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