1988 का वो किसिंग सीन जिसने फिर मचाया बवाल ; 38 साल पुराने बोल्ड सीन पर फिर क्यों मचा बवाल?
1988 की फिल्म ‘दयावान’ में विनोद खन्ना और माधुरी दीक्षित के बीच फिल्माए गए किसिंग सीन को लेकर विवाद एक बार फिर चर्चा में है। हालिया रिपोर्ट्स और इंटरव्यूज़ में इस दृश्य को लेकर अभिनेत्री के अनुभव, असहजता और सेट पर हुई कथित घटनाओं का जिक्र किया गया है।

फिल्म दयावान
1988 में रिलीज़ हुई फिल्म दयावान को लेकर एक बार फिर बॉलीवुड के गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। इस फिल्म में अभिनेता विनोद खन्ना और अभिनेत्री माधुरी दीक्षित के बीच फिल्माए गए एक अंतरंग किसिंग सीन को लेकर जो विवाद उस समय खड़ा हुआ था, वह अब वर्षों बाद फिर से मीडिया रिपोर्ट्स और हालिया इंटरव्यूज़ के चलते सुर्खियों में आ गया है। यह मामला उस दौर के सिनेमा, कलाकारों की सीमाओं और ऑन-स्क्रीन बोल्ड कंटेंट को लेकर समाज की सोच पर लंबे समय तक बहस का विषय बना रहा।
फिल्म दयावान का निर्देशन फिरोज़ खान ने किया था और इसमें माधुरी दीक्षित उस समय एक उभरती हुई युवा अभिनेत्री थीं, जबकि विनोद खन्ना पहले से ही हिंदी सिनेमा के स्थापित और बड़े सितारों में शामिल थे। फिल्म में उनके किरदारों के बीच रोमांटिक और वैवाहिक संबंधों को दिखाया गया था, जिसके दौरान एक गीत “आज फिर तुम पे प्यार आया है” में एक लंबा और भावनात्मक किसिंग सीन फिल्माया गया था।
उस दौर में हिंदी सिनेमा में इस प्रकार के अंतरंग दृश्यों को बेहद कम दिखाया जाता था, जिसके कारण यह दृश्य दर्शकों के बीच तुरंत चर्चा और विवाद का केंद्र बन गया। फिल्म के रिलीज़ के बाद इस सीन को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं और इसे उस समय के सबसे चर्चित और विवादित दृश्यों में से एक माना गया।
बाद के वर्षों में अभिनेत्री माधुरी दीक्षित ने कई इंटरव्यूज़ में इस अनुभव का जिक्र करते हुए बताया कि वह उस समय इस सीन की तीव्रता को लेकर पूरी तरह तैयार नहीं थीं। उन्होंने कहा कि शूटिंग के दौरान वह असहज महसूस कर रही थीं और यह अनुभव उनके लिए बेहद संकोचपूर्ण रहा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस घटना के बाद उन्होंने अपने करियर में ऐसे दृश्यों से दूरी बनाने का निर्णय लिया और भविष्य में अपनी भूमिकाओं को लेकर स्पष्ट सीमाएं तय कीं।
फिल्म में उनके सह-कलाकार विनोद खन्ना थे, जो उस समय इंडस्ट्री के प्रमुख सितारों में से एक थे। इस दृश्य को लेकर वर्षों बाद भी अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स में कई दावे सामने आते रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि शूटिंग के दौरान दृश्य अपेक्षा से अधिक लंबा और तीव्र हो गया था, तथा यह भी आरोप लगाया गया कि एक समय पर शूटिंग ‘कट’ होने के बाद भी दृश्य जारी रहा। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें केवल मीडिया रिपोर्ट्स और पुराने किस्सों के आधार पर प्रस्तुत किया जाता रहा है। कुछ अन्य अपुष्ट रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि शूटिंग के दौरान अभिनेत्री को असहजता का अनुभव हुआ और उन्हें भावनात्मक तनाव से गुजरना पड़ा, जबकि एक और दावे में यह भी उल्लेख किया गया कि उन्हें हल्की चोट लगी थी। ये सभी दावे विवादित हैं और किसी भी आधिकारिक दस्तावेज़ या प्रमाण से पुष्टि नहीं की गई है।
फिल्म के निर्देशक फिरोज खान ने उस समय इस दृश्य को फिल्म की कहानी और भावनात्मक प्रभाव के लिए महत्वपूर्ण बताया था और इसे अंतिम संस्करण में शामिल रखा गया। फिल्म दयावान के रिलीज़ के बाद यह दृश्य न केवल सिनेमाई बहस का हिस्सा बना बल्कि भारतीय फिल्म उद्योग में अंतरंग दृश्यों को लेकर नियमों और सीमाओं पर भी चर्चा को बढ़ावा देने वाला एक उदाहरण बन गया।
आज भी यह मामला समय-समय पर इसलिए चर्चा में आ जाता है क्योंकि समकालीन इंटरव्यूज़, रेट्रोस्पेक्टिव लेख और सोशल मीडिया विश्लेषण इसे नए दृष्टिकोण से देखते हैं। आधुनिक समय में इसे केवल एक फिल्मी दृश्य नहीं बल्कि उस दौर की फिल्म निर्माण प्रक्रिया, कलाकारों की सहमति और सेट पर कार्यशैली के संदर्भ में भी समझा जाता है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
