बॉलीवुड अभिनेत्री फातिमा सना शेख ने हाल ही में अपने अभिनय कौशल को निखारने के लिए पुडुचेरी स्थित आदिशक्ति लैबोरेटरी फॉर थिएटर आर्ट्स में एक गहन अभिनय कार्यशाला में भाग लिया। अभिनय से इतर, फातिमा ने इस वर्कशॉप के जरिए अपने क्राफ्ट को फिर से खोजने और अपनी रचनात्मक सीमाओं से बाहर निकलने पर जोर दिया है। इस वर्कशॉप में जाने की वजह बताते हुए फातिमा ने कहा कि पहली बार जब उन्होंने वहां प्रशिक्षण लिया था, तो उन्हें अभिनय के प्रति उनके नजरिए से जुड़ाव महसूस हुआ। उन्होंने जो कुछ सीखा था, वह उनके साथ रह गया, लेकिन उन्हें लगा कि उन्होंने उन सभी बारीकियों को पूरी तरह से नहीं समझा या आत्मसात नहीं किया है, इसलिए वे ब्रेक मिलने पर दोबारा वहां गईं।

यह अनुभव बेहद तीव्र था, जहां दिनभर का कार्यक्रम पूरी तरह व्यस्त रहता था। फातिमा के अनुसार, दिन की शुरुआत एक घंटे की कलारी से होती थी, जिसके बाद आंखों के व्यायाम और भावनाओं को तलाशने का लंबा सत्र चलता था। इसके अलावा, करीब दस दिनों तक रोज लगभग नौ घंटे के प्रशिक्षण में श्वास तकनीक, संगीत, आवाज और लय का अभ्यास कराया गया। फातिमा ने स्वीकार किया कि कई बार उन्होंने खुद को अपने कम्फर्ट जोन से बाहर महसूस किया, लेकिन उन्होंने इसका आनंद लिया क्योंकि वहीं से उन्हें सबसे ज्यादा सीखने को मिलता है। फुर्सत के समय में उन्होंने पुडुचेरी के कैफे और रेस्तरां घूमने के अलावा थिएटर में फिल्म भी देखी।

अभिनय को एक ऐसा क्राफ्ट बताते हुए जिसके लिए निरंतर अभ्यास की आवश्यकता होती है, फातिमा ने कहा कि कैमरे के सामने जो दिखाई देता है, वह उसी मेहनत का परिणाम है जो सेट पर नहीं होने के दौरान की जाती है। एक विद्यार्थी के रूप में दोबारा अनुभव को उन्होंने विनम्र करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि आपको यह अहसास होता है कि आपके पास सभी उत्तर नहीं हैं और वहां कोई पदानुक्रम नहीं होता, जहां हर कोई सीखने, गलतियां करने और फिर से शुरुआत करने के लिए आता है। जब आप इस विचार को छोड़ देते हैं कि आप पहले से ही बहुत कुछ जानते हैं, तो आप और अधिक सीखने के लिए तैयार हो जाते हैं।

फातिमा ने बताया कि लगातार एक फिल्म के बाद दूसरी फिल्म करने से अभिनय यांत्रिक हो सकता है और प्रदर्शन में ताजगी खत्म हो सकती है, इसलिए वर्कशॉप ऐसी पैटर्न को तोड़ती हैं। इससे पहले इस साल उन्होंने केरल के इरिंजालकुडा स्थित नटना कैराली में भी एक प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया था। उन्होंने कहा कि केरल वाली वर्कशॉप ने उन्हें पारंपरिक प्रदर्शन प्रथाओं की गहरी समझ दी, जबकि आदिशक्ति की कार्यप्रणाली उनके साथ अधिक जुड़ती है। दक्षिण भारतीय भाषाओं में काम करने की इच्छा जाहिर करते हुए फातिमा ने कहा कि वहां जिस तरह की कहानियां कही जा रही हैं, वे बेहद प्रेरणादायक हैं और वह ऐसी कहानी का हिस्सा बनना पसंद करेंगी जो अपनी संस्कृति और लोगों से गहराई से जुड़ी हो।

Pratahkal Newsroom

Pratahkal Newsroom

प्रातःकाल न्यूज़-रूम, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, समयबद्ध और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा न्यूज़-रूम राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story