भारतीय टेलीविजन के इतिहास में कई धारावाहिकों ने दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी है, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब देश की सांस्कृतिक विरासत को समेटे एक कार्यक्रम ने लोकप्रियता के सारे पैमाने बदल दिए थे। दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले सांस्कृतिक शो 'सुरभि' ने न केवल टीआरपी के नए कीर्तिमान स्थापित किए, बल्कि देश में संवाद और दर्शकों की भागीदारी का एक अभूतपूर्व उदाहरण पेश किया। वर्ष 1990 से 2001 तक कुल 11 वर्षों तक चले इस धारावाहिक को भारतीय टीवी जगत का सबसे सफल और लंबे समय तक चलने वाला कल्चरल शो माना जाता है। रामायण और महाभारत जैसी पौराणिक कड़ियों की भारी सफलता के बीच, इस शो ने एक अनूठे और ज्ञानवर्धक पैटर्न के बल पर दर्शकों को प्रत्येक रविवार को टेलीविजन स्क्रीन से जोड़े रखा।

सिद्धार्थ काक और प्रख्यात अभिनेत्री रेणुका शहाणे द्वारा होस्ट किया जाने वाला यह शो देश की कला, शिल्प, सांस्कृतिक विविधता, ऐतिहासिक स्थलों और अनसुनी परंपराओं को बेहद सरल अंदाज में सामने लाता था। शो की प्रस्तुति की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि इसके दोनों होस्ट पारंपरिक एंकरों की तरह खड़े होने के बजाय जमीन पर फर्श पर बैठकर सहजता से बातचीत करते थे। इस सादगी भरे अंदाज ने दोनों को देश के कोने-कोने में घर-घर की पसंद बना दिया था। इस शो की लोकप्रियता का आलम यह था कि 1993 के दौरान इसे हर हफ्ते 14 लाख से भी अधिक पोस्टकार्ड और चिट्ठियां प्राप्त होती थीं। दर्शकों की इस अकल्पनीय प्रतिक्रिया के कारण डाकघर में चिट्ठियों को रखने की जगह कम पड़ गई थी, जिसके चलते बाद में शो की टीम तक इन पत्रों को पहुंचाने के लिए विशेष रूप से एक गाड़ी का प्रबंध करना पड़ा था। इस अभूतपूर्व जन-भागीदारी को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी स्थान मिला।

शो के माध्यम से दर्शकों से डाक के जरिए प्रश्न पूछे जाते थे और उनके उत्तर देने के लिए लोगों में होड़ मच जाती थी। इसने देश की सुस्त पड़ी डाक सेवा प्रणाली को एक नया जीवन देने का आधिकारिक काम किया था। शो के प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उस दौर में रेणुका शहाणे के पहनावे और हेयरस्टाइल की बड़े पैमाने पर नकल की जाने लगी थी। कूटनीतिक और कानूनी तौर पर भारतीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले दूरदर्शन के इस शो ने बिना किसी कृत्रिम चकाचौंध के केवल प्रामाणिक तथ्यों और देश की मिट्टी से जुड़ी कहानियों के दम पर यह स्थान हासिल किया था। 1991 में एक वर्ष के अल्प विराम को छोड़कर इस शो ने लगातार एक दशक से अधिक समय तक दर्शकों में देशभक्ति और भारतीयता की भावना को जगाए रखा। आज के डिजिटल युग में, जहाँ सूचनाओं की भरमार है, सुरभि का यह सफर टीवी जगत के सुनहरे और वास्तविक दौर की याद दिलाता है जो आज भी एक मिसाल के रूप में दर्ज है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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