गायक मृत्यंजय रॉय ने फिल्म 'रंग' के रोमांटिक गाने 'तुझे ना देखूं तो चैन...' को भोजपुरी बोल के साथ रीक्रिएट किया, जो इंटरनेट पर ट्रेंड कर रहा है।

भारतीय सिनेमा जगत में नब्बे के दशक के गीतों का आकर्षण आज भी संगीत प्रेमियों के सिर चढ़कर बोल रहा है। इसी क्रम में दिवंगत अभिनेत्री दिव्या भारती की ब्लॉकबस्टर फिल्म का एक कालजयी प्रेम गीत इन दिनों एक बिल्कुल नए और क्षेत्रीय अवतार में दर्शकों के सामने आया है। वर्ष 1993 में आई प्रसिद्ध फिल्म 'रंग' के बेहद लोकप्रिय रोमांटिक ट्रैक 'तुझे ना देखूं तो चैन...' को भोजपुरी भाषा के मधुर शब्दों में पिरोकर सोशल मीडिया पर साझा किया गया है। डिजिटल मंचों पर इस नए संस्करण को लेकर श्रोताओं के बीच एक असाधारण उत्साह देखा जा रहा है। मूल रूप से हिंदी सिनेमा के सबसे सफल युगल गीतों में शुमार इस रचना का क्षेत्रीय रूपांतरण इंटरनेट संस्कृति में एक नया ट्रेंड सेट कर रहा है।

मुख्य घटनाक्रम की बात करें तो सोशल मीडिया के जाने-माने संगीतकार और गायक मृत्यंजय रॉय ने इस विख्यात गीत को अपनी आवाज और स्थानीय शब्दावली के साथ रीक्रिएट किया है। उन्होंने गाने की मूल धुन, संगीत संरचना और जादुई बीट्स से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न करते हुए केवल उसके पाठ्यांश को भोजपुरी रूप दिया है। मूल फिल्म में जहां अभिनेता कमल सदाना और अभिनेत्री दिव्या भारती की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया था, वहीं इस नए वर्जन में 'तोहे ना देखीं त चैन दिल पावेला' जैसे बोल जोड़े गए हैं। गायक ने इस गीत को अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल पर पोस्ट किया है, जिसके बाद से इसके व्यूज और शेयरिंग का ग्राफ बेहद तेजी से ऊपर की ओर बढ़ रहा है।

इस डिजिटल प्रस्तुति के वायरल होते ही इंटरनेट जगत के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। मूल गीत को पार्श्व गायक कुमार सानू और अलका याग्निक ने अपने सुरीले स्वरों से सजाया था, जो पिछले तीन दशकों से श्रोताओं के दिलों में बसा हुआ है। अब इसके भोजपुरी संस्करण को सुनकर सोशल मीडिया यूजर्स हैरान हैं और कमेंट बॉक्स में कलाकार की रचनात्मकता की जमकर तारीफ कर रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा है कि इस गाने ने उनका दिल जीत लिया है, जबकि अन्य लोग इसे एक बेहतरीन और माइंड-ब्लोइंग प्रयोग बता रहे हैं। संगीत समीक्षकों का भी मानना है कि किसी क्लासिक हिंदी रचना को बिना उसकी गरिमा ठेस पहुंचाए क्षेत्रीय भाषा में ढालना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है, जिसे इस युवा कलाकार ने बखूबी अंजाम दिया है।

प्रसारण और सामग्री निर्माण के विधिक व तकनीकी पहलुओं को देखें तो भारत के डिजिटल स्पेस में कवर सॉन्ग्स और क्षेत्रीय रूपांतरणों को लेकर कॉपीराइट और बौद्धिक संपदा अधिकारों के कड़े नियम लागू हैं। वर्तमान नियमों के तहत संगीत निर्माता सामाजिक डिजिटल मंचों पर मूल रचनाकारों को उचित क्रेडिट देकर और राजस्व साझाकरण नियमों का पालन करते हुए इस प्रकार के रीक्रिएशन प्रस्तुत करते हैं। मृत्यंजय रॉय की बात करें तो वह डिजिटल स्पेस में एक स्थापित नाम बनते जा रहे हैं और इंस्टाग्राम पर उन्हें एक लाख बीस हजार से अधिक लोग फॉलो करते हैं। यह पहला अवसर नहीं है जब उन्होंने ऐसा कोई प्रयोग किया हो, इससे पहले भी वे कई हिंदी और दक्षिण भारतीय फिल्मों के प्रसिद्ध गीतों का सफल भोजपुरी अनुवाद कर चुके हैं।

मनोरंजन उद्योग के जानकारों का विश्लेषण है कि इस तरह के भाषाई प्रयोग न केवल पुरानी कालजयी रचनाओं को युवा पीढ़ी के बीच दोबारा जीवित करते हैं, बल्कि क्षेत्रीय भाषाओं की व्यापक स्वीकार्यता को भी रेखांकित करते हैं। दिव्या भारती के इस गाने का वायरल होना यह दर्शाता है कि अच्छी धुन और उत्कृष्ट संगीत सीमाओं और भाषाओं के बंधनों से परे होता है। वर्तमान डिजिटल युग में इस प्रकार की सामग्रियों को यूट्यूब और इंस्टाग्राम रील्स जैसे प्लेटफॉर्म्स पर भारी रीच मिलती है, जिससे कलाकारों को एक बड़ा दर्शक वर्ग प्राप्त होता है। यह ट्रेंड आने वाले समय में बॉलीवुड और क्षेत्रीय संगीत उद्योग के बीच के अंतर को कम करने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

Next Story