कौन हैं सुकुमार? मैथ्स के लेक्चरर से ‘पुष्पा’ वाला पैन इंडिया तूफान बनने तक का सफर
आर्या और रंगस्थलम जैसी कल्ट फिल्मों के जरिए सुकुमार ने तेलुगु सिनेमा को वैश्विक पहचान दिलाई और खुद को एक सफल ब्रांड के रूप में स्थापित किया।

साउथ फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज निर्देशक सुकुमार, जिन्होंने लेक्चरर की नौकरी छोड़कर फिल्मी दुनिया में कदम रखा और अपनी अनूठी कहानी कहने की कला से नई पहचान बनाई।
आज अगर साउथ सिनेमा का कोई डायरेक्टर अपने अलग माइंडगेम, ग्रे शेड वाले हीरो और ट्विस्ट से भरी स्क्रीनप्ले के लिए सबसे ज्यादा चर्चा में है, तो वो नाम है Sukumar। ‘पुष्पा’ के बाद तो उनका क्रेज ऐसा बढ़ा कि हिंदी बेल्ट से लेकर विदेशों तक लोग उनके स्टाइल के दीवाने हो गए। ‘पुष्पा: द राइज’ ने बॉक्स ऑफिस पर धमाका किया और फिर ‘पुष्पा 2: द रूल’ ने कमाई के सारे रिकॉर्ड हिला दिए। हर तरफ सिर्फ एक ही सवाल गूंजा— आखिर ये सुकुमार हैं कौन, जिनकी फिल्में सिर्फ एंटरटेन नहीं करतीं बल्कि दिमाग के साथ इमोशंस का भी खेल खेलती हैं?
आंध्र प्रदेश के छोटे से गांव मट्टापर्रु में जन्मे सुकुमार का फिल्मी सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। बहुत कम लोग जानते हैं कि फिल्मों में आने से पहले वो करीब सात साल तक मैथ्स और फिजिक्स के लेक्चरर थे। मास्टर्स इन मैथेमेटिक्स करने के बाद उन्होंने काकीनाडा के जूनियर कॉलेज में पढ़ाया, लेकिन उनके अंदर का क्रिएटिव इंसान हमेशा कुछ बड़ा करना चाहता था। यही बेचैनी उन्हें फिल्म इंडस्ट्री तक ले आई। शुरुआत में उन्होंने राइटर और असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम किया, फिर 2004 में आई ‘आर्या’ ने उनकी जिंदगी बदल दी। Allu Arjun स्टारर इस फिल्म ने ना सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचाया बल्कि सुकुमार को रातोंरात स्टार डायरेक्टर बना दिया। इस फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड और नंदी अवॉर्ड भी मिला।
सुकुमार की खासियत हमेशा से यही रही कि वो अपने हीरो को परफेक्ट नहीं दिखाते। उनके किरदारों में जलन, गुस्सा, ऑब्सेशन और इमोशनल कमजोरी साफ नजर आती है। ‘आर्या 2’ में उन्होंने प्यार और पागलपन को जिस तरीके से दिखाया, वो उस दौर में काफी अलग था। फिर ‘100% लव’ ने कॉलेज रोमांस को नया ट्विस्ट दिया। हालांकि ‘1: नेनोक्काडिने’ बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट नहीं बन पाई, लेकिन समय के साथ उसे कल्ट स्टेटस मिला। यही वजह है कि आज भी फिल्म लवर्स सुकुमार की फिल्मों को सिर्फ मसाला एंटरटेनमेंट नहीं बल्कि “इंटेलिजेंट सिनेमा” मानते हैं।
अपने पिता के निधन के बाद सुकुमार ने ‘नान्नाकु प्रेमाथो’ बनाई, जिसमें पिता और बेटे की इमोशनल कहानी ने लोगों को रुला दिया। इसके बाद आया ‘रंगस्थलम’, जिसने Ram Charan के करियर को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया। गांव की मिट्टी, राजनीति और इंसानी इमोशंस को जिस तरीके से सुकुमार ने स्क्रीन पर उतारा, उसने उन्हें मास डायरेक्टर से क्लासिक फिल्ममेकर बना दिया। लेकिन असली तूफान तब आया जब उन्होंने ‘पुष्पा’ बनाई। Rashmika Mandanna और Allu Arjun के साथ बनाई गई इस फिल्म ने हिंदी ऑडियंस को भी साउथ सिनेमा का जबरदस्त फैन बना दिया। “झुकेगा नहीं” सिर्फ डायलॉग नहीं, बल्कि पॉप कल्चर बन गया।
डायरेक्शन के अलावा सुकुमार एक शानदार प्रोड्यूसर भी हैं। उनके बैनर ‘सुकुमार राइटिंग्स’ ने ‘कुमारी 21एफ’, ‘उप्पेना’ और ‘विरुपाक्ष’ जैसी फिल्मों को सपोर्ट किया, जिन्होंने कंटेंट बेस्ड सिनेमा को नई पहचान दी। उनकी फिल्मों में म्यूजिक भी हमेशा बड़ा हथियार रहा है और यही कारण है कि Devi Sri Prasad लगभग हर बड़ी फिल्म में उनके साथ नजर आते हैं। सुकुमार की स्क्रीनप्ले इतनी लेयर्ड होती है कि दर्शक उनकी फिल्मों को दोबारा देखने पर भी नए डिटेल्स खोज लेते हैं। यही वजह है कि आज वो सिर्फ तेलुगु सिनेमा नहीं, बल्कि पूरे भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े और सबसे ज्यादा फीस लेने वाले डायरेक्टर्स में गिने जाते हैं।
आज सोशल मीडिया पर सुकुमार इसलिए ट्रेंड करते हैं क्योंकि उन्होंने साबित किया कि एक मैथ्स टीचर भी अपनी सोच और क्रिएटिविटी से करोड़ों लोगों की कल्पना बदल सकता है। उनके किरदार, उनके ट्विस्ट और उनकी इमोशनल स्टोरीटेलिंग ने उन्हें सिर्फ डायरेक्टर नहीं बल्कि एक ब्रांड बना दिया है। आने वाले समय में भी फैंस को उनसे ऐसे ही बड़े सिनेमैटिक सरप्राइज की उम्मीद है।

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