आज के दौर में अगर आप सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं या म्यूजिक के शौकीन हैं, तो एक नाम आपकी फीड पर बार-बार दस्तक दे रहा होगा और वो नाम है दिलजीत दोसांझ। चाहे लॉस एंजिल्स का कोचेला म्यूजिक फेस्टिवल हो या न्यूयॉर्क का मशहूर जिमी फॉलन शो, हर जगह इस पगड़ी वाले गबरू ने अपनी पंजाबी बीट्स से पूरी दुनिया को झूमने पर मजबूर कर दिया है। दिलजीत आज सिर्फ एक गायक या अभिनेता मात्र नहीं रह गए हैं, बल्कि वह एक ग्लोबल फेनोमेनन बन चुके हैं। उनका साल २०२४-२५ का दिल-लुमिनाटी टूर जिस तरह से दुनिया भर के बड़े शहरों में सोल्ड-आउट जा रहा है, उसने यह साबित कर दिया है कि पंजाबी संगीत अब केवल क्षेत्रीय भाषा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक इंटरनेशनल वाइब बन चुका है।इस अपार सफलता और चमक-धमक के पीछे एक बेहद सादगी भरा लेकिन कड़ा स्ट्रगल छिपा है। पंजाब के जालंधर जिले के एक छोटे से गांव दोसांझ कलां से निकलकर इंटरनेशनल बिलबोर्ड चार्ट्स तक पहुंचना कोई मामूली बात नहीं है। दिलजीत ने अपने सफर की शुरुआत साल २००२ में की थी, जहां उन्होंने छोटे लेबल्स के साथ मिलकर स्माइल और चॉकलेट जैसे शुरुआती एल्बम्स से अपनी पहचान बनाने की कोशिश की थी। उनके करियर में असली टर्निंग पॉइंट तब आया जब द नेक्स्ट लेवल एल्बम में उन्होंने यो यो हनी सिंह के साथ हाथ मिलाया। दिल नाच दा और पंगा जैसे गानों ने उन्हें रातों-रात पंजाब का सुपरस्टार बना दिया और यहीं से उनके कभी न रुकने वाले सुनहरे सफर का आगाज हुआ।दिलजीत की सबसे बड़ी ताकत उनकी बहुमुखी प्रतिभा और अनोखा स्टाइल है जो युवाओं को अपनी ओर खींचता है। एक तरफ जहां उनकी आवाज में रूहानियत और गहराई है, वहीं दूसरी तरफ उनके परफॉर्मेंस में गजब का स्वैग और मॉडर्न टच नजर आता है। प्रॉपर पटोला जैसे गानों ने उन्हें मुख्यधारा के युवाओं के बीच लोकप्रिय बनाया, तो वहीं जी.ओ.ए.टी. और मूनचाइल्ड एरा जैसे एल्बम्स ने उन्हें वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दिलाई। वह बिलबोर्ड सोशल ५० चार्ट में जगह बनाने वाले पहले पंजाबी कलाकार बने। दिलजीत का हमेशा से यह सपना रहा है कि पंजाबी गानों को भी वही दर्जा और लोकप्रियता मिले जो कभी गंगनम स्टाइल को मिली थी, और आज उनके लाइव कॉन्सर्ट्स की दीवानगी देखकर लगता है कि वह सपना अब हकीकत में बदल चुका है।संगीत के साथ-साथ सिनेमा की दुनिया में भी दिलजीत का सिक्का जमकर चलता है और उनकी एक्टिंग का लोहा हर कोई मानता है। उन्होंने जट्ट एंड जूलियट, पंजाब १९८४ और सज्जन सिंह रंगरूट जैसी फिल्मों के जरिए पंजाबी सिनेमा को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। जब उन्होंने बॉलीवुड में उड़ता पंजाब के साथ अपना डेब्यू किया, तो अपनी संजीदा एक्टिंग से उन्होंने फिल्मफेयर अवॉर्ड अपने नाम कर लिया। इसके बाद गुड न्यूज़ जैसी फिल्मों में उनकी शानदार कॉमिक टाइमिंग ने दर्शकों को लोटपोट कर दिया। हाल ही में फिल्म अमर सिंह चमकीला में उनके अभिनय को देखकर आलोचकों ने भी उनकी तारीफों के पुल बांध दिए, जिससे साफ हो गया कि वह सिर्फ एक कलाकार नहीं बल्कि भावनाओं को पर्दे पर जीने वाले एक मंझे हुए अभिनेता हैं।आज दिलजीत दोसांझ एक सांस्कृतिक प्रतीक बन चुके हैं जो अपनी जड़ों से जुड़े रहकर पूरी दुनिया को अपनी उंगलियों पर नचा रहे हैं। टाइम्स स्क्वायर के होर्डिंग पर छाना हो या गूगल और फेसबुक जैसे बड़े हेडक्वार्टर्स का दौरा करना, उन्होंने हर जगह अपनी सादगी और मेहनत से अमिट छाप छोड़ी है। उनके जीवन में कई विवाद भी आए, लेकिन उन्होंने हमेशा अपनी निरंतरता और काम से उनका मुंहतोड़ जवाब दिया। वह एनजीओ के माध्यम से समाज सेवा में भी सक्रिय रहते हैं। कुल मिलाकर, दिलजीत वह कलाकार हैं जिसने पंजाबी संस्कृति को गांव की गलियों से उठाकर दुनिया के सबसे बड़े मंचों पर गौरव के साथ खड़ा कर दिया है और आज हर जुबां पर बस उन्हीं का नाम है।

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Pratahkal Newsroom

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