आज अगर मलयालम सिनेमा की सबसे दमदार और रियलिस्टिक फिल्मों की बात होती है, तो Dileesh Pothan का नाम सबसे आगे आता है। सोशल मीडिया पर उनकी फिल्मों के सीन्स, डायलॉग्स और किरदार लगातार वायरल होते रहते हैं। चाहे बात हो “महेशिन्टे प्रतिकारम” की सादगी भरी कहानी की, “थोंडीमुथालुम द्रिक्साक्षियुम” के रॉ रियलिज़्म की या फिर “जोजी” जैसी डार्क साइकोलॉजिकल ड्रामा की, दिलीश पोथन ने हर बार साबित किया कि बिना बड़े मसाले और शोर-शराबे के भी सिनेमा लोगों के दिल में उतर सकता है। यही वजह है कि आज उन्हें मलयालम इंडस्ट्री का सबसे भरोसेमंद फिल्ममेकर माना जाता है।

केरल के कोट्टायम जिले के मंजूर में जन्मे दिलीश पोथन का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा। थिएटर और ड्रामा के लिए उनका जुनून इतना गहरा था कि उन्होंने थिएटर आर्ट्स में एम.ए. और एम.फिल तक की पढ़ाई की। फिल्मों में शुरुआत उन्होंने कैमरे के पीछे असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर की। “9 केके रोड” से शुरू हुआ यह सफर बाद में मशहूर निर्देशक Aashiq Abu के साथ जुड़ गया। “22 फीमेल कोट्टायम”, “दा थडिया” और “गैंगस्टर” जैसी फिल्मों में काम करते हुए उन्होंने सिनेमा की बारीकियां सीखी। लेकिन किस्मत ने उन्हें सिर्फ डायरेक्टर नहीं, एक शानदार अभिनेता भी बना दिया।

दिलीश पोथन पहली बार लोगों की नजरों में तब आए जब उन्होंने “सॉल्ट एन पेपर” में छोटा सा रोल निभाया। उसके बाद “महेशिन्टे प्रतिकारम” ने उनकी जिंदगी बदल दी। Maheshinte Prathikaaram सिर्फ एक फिल्म नहीं थी, बल्कि मलयालम सिनेमा में नई कहानी कहने की शुरुआत थी। इस फिल्म ने नेशनल अवॉर्ड जीता और दिलीश पोथन को बेस्ट डायरेक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड दिलाया। इसके बाद Thondimuthalum Driksakshiyum ने फिर नेशनल अवॉर्ड जीतकर यह साबित कर दिया कि उनकी सफलता कोई तुक्का नहीं थी। फिर आया Joji, जिसने ओटीटी पर तहलका मचा दिया और इंटरनेशनल लेवल तक तारीफें बटोरीं।

दिलीश पोथन की सबसे बड़ी ताकत उनकी कहानी कहने की शैली मानी जाती है। उनकी फिल्मों में केरल की मिट्टी की खुशबू, छोटे शहरों की सच्चाई और इंसानी रिश्तों की जटिलता बेहद नेचुरल तरीके से दिखती है। यही कारण है कि उनकी फिल्में सिर्फ मनोरंजन नहीं करतीं, बल्कि लंबे समय तक दिमाग में रह जाती हैं। उनकी फिल्मों में मौसम, गाने, लोकेशन और छोटे-छोटे डिटेल्स भी कहानी का हिस्सा बन जाते हैं। यही वजह है कि कई लोग उन्हें दिग्गज फिल्ममेकर के.जी. जॉर्ज की विरासत को आगे बढ़ाने वाला निर्देशक मानते हैं।

सिर्फ निर्देशन ही नहीं, अभिनय में भी दिलीश पोथन ने अपनी अलग पहचान बनाई। “कुंबलंगी नाइट्स”, “जोसेफ”, “मलिक”, “भीष्मपर्वम”, “गरुड़न” और “अब्राहम ओज़लर” जैसी फिल्मों में उनके किरदारों को खूब पसंद किया गया। स्क्रीन पर उनका शांत चेहरा और अंदर छिपी तीखी भावनाएं दर्शकों को हमेशा प्रभावित करती हैं। इसके साथ ही उन्होंने “वर्किंग क्लास हीरो” नाम की प्रोडक्शन कंपनी शुरू की, जिसने “कुंबलंगी नाइट्स” और “प्रेमालु” जैसी सुपरहिट फिल्मों को प्रोड्यूस किया। खास बात यह है कि उनकी फिल्मों में अक्सर Fahadh Faasil के साथ उनकी शानदार क्रिएटिव साझेदारी देखने को मिलती है।

आज दिलीश पोथन सिर्फ एक निर्देशक या अभिनेता नहीं, बल्कि कंटेंट बेस्ड सिनेमा की नई पहचान बन चुके हैं। उनकी फिल्मों ने यह साबित किया है कि अच्छी कहानी भाषा की मोहताज नहीं होती। यही वजह है कि हर नई फिल्म के साथ लोग सिर्फ फिल्म का इंतजार नहीं करते, बल्कि यह देखने के लिए उत्साहित रहते हैं कि इस बार दिलीश पोथन कौन सी नई दुनिया रचने वाले हैं।

Pratahkal Newsroom

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