दिया मिर्ज़ा ने देशभक्ति पर बनीं फिल्मों को बताया प्रोपेगेंडा ; जानें क्या है धुरंधर से कनेक्शन
दिया मिर्ज़ा के ‘जिंगोइज़्म’ पर बयान से बॉलीवुड में नई बहस छिड़ गई है। ‘धुरंधर’ और ‘आईसी 814’ की तुलना के बीच सिनेमा में राष्ट्रवाद, प्रोपेगेंडा और कहानी कहने की शैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

दिया मिर्ज़ा
भारतीय सिनेमा इन दिनों सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि विचारधाराओं का प्रतिबिंब बनता जा रहा है। इसी बीच अभिनेत्री दिया मिर्ज़ा के एक हालिया बयान ने फिल्म इंडस्ट्री में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। उन्होंने फिल्मों में बढ़ते “जिंगोइज़्म” यानी अतिराष्ट्रवादी भावनाओं के महिमामंडन पर खुलकर सवाल उठाए हैं, जिससे बॉलीवुड दो खेमों में बंटता नजर आ रहा है।
‘धुरंधर’ बनाम ‘IC 814’: बहस की पृष्ठभूमि
यह विवाद मुख्य रूप से ब्लॉकबस्टर फिल्म Dhurandhar: The Revenge और वेब सीरीज़ IC 814: The Kandahar Hijack के बीच तुलना से शुरू हुआ। जहां धुरंधर को एक हाई-ऑक्टेन, देशभक्ति से भरपूर एक्शन फिल्म के रूप में दर्शकों का जबरदस्त समर्थन मिल रहा है, वहीं आईसी 814 को अपने संतुलित और मानवीय दृष्टिकोण के कारण आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। विशेष रूप से, सीरीज़ में विरोधी पात्रों को भी एक मानवीय नजरिए से प्रस्तुत किया गया, जिसे लेकर सोशल मीडिया और दर्शकों में मतभेद देखने को मिले।
दिया मिर्ज़ा का बयान और उसका असर:
दिया मिर्ज़ा ने अपने इंटरव्यू में स्पष्ट कहा कि आजकल फिल्मों में “जिंगोइज़्म को एंजॉय और सेलिब्रेट करने का ट्रेंड” बढ़ता जा रहा है। उनके अनुसार, यह प्रवृत्ति दर्शकों की पसंद को भी दर्शाती है, जहां:
- मजबूत राष्ट्रवादी भावनाओं से भरपूर फिल्में अधिक सराही जा रही हैं
- वहीं, बहु-आयामी और सूक्ष्म कहानी कहने की शैली को अक्सर गलत समझा जाता है या आलोचना का सामना करना पड़ता है
उन्होंने यह भी कहा कि उनकी परियोजना का उद्देश्य “चेस्ट-थंपिंग नेशनलिज्म” के बजाय विभिन्न दृष्टिकोणों को सामने लाना था, ताकि दर्शकों को व्यापक समझ मिल सके।
इस बयान के बाद फिल्म इंडस्ट्री में स्पष्ट विभाजन नजर आने लगा है। एक ओर कुछ लोग Dhurandhar: The Revenge जैसी फिल्मों की देशभक्ति और भावनात्मक अपील की खुलकर सराहना कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई आलोचक इन्हीं फिल्मों को “प्रोपेगेंडा” या अत्यधिक राष्ट्रवादी करार दे रहे हैं। इस पूरे विवाद ने सिनेमा के स्वरूप और उसकी जिम्मेदारी पर गंभीर चर्चा को जन्म दिया है। गौरतलब है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर जहां कई बड़े सितारे चुप्पी साधे हुए हैं, वहीं Dia Mirza का खुलकर सामने आना इस बहस को और गहरा तथा व्यापक बना रहा है।
यह पूरा विवाद भारतीय सिनेमा में हो रहे व्यापक बदलाव की ओर इशारा करता है। हाल के वर्षों में वास्तविक घटनाओं से प्रेरित, बड़े बजट की फिल्मों का दबदबा तेजी से बढ़ा है, जिसने दर्शकों के रुझान को भी प्रभावित किया है। इन फिल्मों के माध्यम से देशभक्ति और राष्ट्रीय पहचान जैसे विषय प्रमुखता से उभरकर सामने आ रहे हैं। इसके साथ ही, मनोरंजन और राजनीतिक संदेश के बीच की रेखा धीरे-धीरे धुंधली होती जा रही है, जिससे यह सवाल और महत्वपूर्ण हो गया है कि सिनेमा का उद्देश्य केवल मनोरंजन है या समाज में विचारधारात्मक प्रभाव डालना भी।
दिया मिर्ज़ा का यह बयान केवल एक व्यक्तिगत राय नहीं, बल्कि वर्तमान भारतीय सिनेमा के बदलते स्वरूप का आईना बन गया है। “देशभक्ति बनाम प्रोपेगेंडा” और “मनोरंजन बनाम संदेश” जैसे सवाल अब पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दर्शक और फिल्म निर्माता इस संतुलन को किस दिशा में ले जाते हैं।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
