dharmendra deol death : बॉलीवुड के महानायक और हिंदी सिनेमा के सबसे चमकते सितारों में शुमार धर्मेंद्र का सोमवार को 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उम्र संबंधी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे दिग्गज अभिनेता की मौत की खबर ने देशभर को गमगीन कर दिया, वहीं पंजाब के फगवाड़ा में शोक की लहर और भी गहरी दिखी क्योंकि यहीं उन गलियों में ‘हीमैन धर्मेंद्र’ का बचपन बीता था, जब वह सिर्फ धरम कहलाते थे।

धर्मेंद्र को 10 नवंबर को तबीयत बिगड़ने पर मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस दौरान उनके लिए पंजाब के फगवाड़ा में मंदिरों और गुरुद्वारों में दुआएँ की जा रही थीं। कुछ दिनों पहले डॉक्टरों ने उन्हें घर भेज दिया था, जहाँ उनकी देखभाल चल रही थी। लेकिन सोमवार सुबह आई निधन की खबर ने उनके प्रशंसकों और बचपन के साथियों को स्तब्ध कर दिया। फिल्ममेकर करण जौहर और आईएएनएस ने उनके निधन की पुष्टि करते हुए खबर साझा की, जिसके बाद सोशल मीडिया पर शोक संदेशों की बाढ़ आ गई।

फगवाड़ा में उनके सबसे करीबी साथी समाजसेवक कुलदीप सरदाना, हरजीत सिंह परमार और एडवोकेट शिव चोपड़ा उन्हें सिर्फ धरम के नाम से याद करते हैं। धर्मेंद्र के पिता मास्टर केवल कृष्ण चौधरी आर्य हाई स्कूल में गणित और सामाजिक अध्ययन पढ़ाते थे। धर्मेंद्र ने 1950 में यहीं से मैट्रिक पास की, और 1952 तक रामगढ़िया कॉलेज में पढ़ाई जारी रखी।

आर्य हाई स्कूल के सहपाठी और वरिष्ठ एडवोकेट एस.एन. चोपड़ा अक्सर कहा करते थे कि धर्मेंद्र में हमेशा एक अलग चमक थी, जिसे स्टारडम भी नहीं बदल पाया। हरजीत सिंह परमार याद करते हैं कि जब भी धर्मेंद्र पंजाब आते, तो वह सीधे दोस्तों के बीच बैठने, हँसी-मज़ाक करने और पुरानी यादें ताज़ा करने पहुँच जाते। उनका अंदाज़ कभी किसी सुपरस्टार जैसा नहीं होता था, बल्कि बचपन वाले धरम जैसा ही रहता था।

धर्मेंद्र ने एक बार अपने दोस्तों को हँसी में वह पुराना किस्सा सुनाया था कि बचपन में कौमी सेवक रामलीला कमेटी ने उन्हें रामलीला में भूमिका देने से मना कर दिया था। वर्षों बाद उन्होंने मज़ाक में कहा था “अब तो मुझे रामलीला में रोल मिल सकता है?” यह बात सुनकर उनके दोस्त खूब हँसा करते थे, क्योंकि दुनिया में पहचान बनाने के बाद भी धर्मेंद्र ने उन छोटी-छोटी बातों को अपनी यादों में संजोकर रखा था।

फगवाड़ा से उनका लगाव कभी कम नहीं हुआ। 2006 में जब वह पुराने पैराडाइज थिएटर की जगह बने गुरबचन सिंह परमार कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन करने पहुँचे, तो हजारों लोगों के सामने उन्होंने गूँजती आवाज़ में कहा “फगवाड़ा जिंदाबाद!” हरजीत सिंह परमार बताते हैं कि वह और उनकी पत्नी प्रकाश कौर उनके घर आए थे, जहाँ धर्मेंद्र ने उनकी माँ से पैर छूकर आशीर्वाद लिया। उनके लिए दोस्त ही नहीं, बल्कि पूरा फगवाड़ा परिवार था।

धर्मेंद्र के निधन ने न सिर्फ भारतीय सिनेमा को एक अमूल्य हस्ती से वंचित किया है, बल्कि फगवाड़ा की उन गलियों की धड़कन भी रोक दी है, जहाँ कभी धरम नाम का एक मासूम लड़का अपनी मुस्कान और सादगी से सबका दिल जीत लेता था। आज वही गलियाँ अपने चमकते सितारे को आखिरी सलाम कर रही हैं।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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