उत्तर भारत में बहुप्रतीक्षित फिल्म 'धुरंधर' रिलीज़ से पहले ही विवादों में घिर चुकी है। मंगलवार को शहीद मेजर मोहित शर्मा के माता‑पिता ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर फिल्म की रिलीज़ पर तात्कालिक रोक की मांग की है। उनका आरोप है कि फिल्म उनके बेटे की वास्तविक ज़िंदगी, गुप्त सैन्य अभियानों और बलिदान से कथानक, ऑपरेशन विवरण व सैन्य प्रतीकों के जरिये अस्वीक्षित तरीके से प्रेरित है और वो इस तरह की बेहद संवेदनशील कहानी बिना अनुमति के नहीं देखी जाने देना चाहते।


याचिका में कहा गया है कि फिल्म में दिखाए गए घटनाक्रम, ऑपरेशन‑डिटेल्स और सैन्य सेटिंग इस कदर मिलती‑जुलती हैं कि आम दर्शक बिना किसी विश्लेषण के ही यह समझ लेगा कि यह मेजर मोहित शर्मा की कहानी है। परिवार ने बताया कि न तो सेना और न ही उन्होंने खुद कभी फ़िल्म निर्माताओं से अपनी सहमति दी थी। उन्होंने कहा कि इसमें न केवल उनके बेटे की व्यक्तिगत गरिमा और संप्रभुता का हनन है, बल्कि संवैधानिक रूप से उनके निजी एवं मृत्युोत्तर अधिकारों (Article 21) का उल्लंघन हो रहा है। साथ ही फिल्म में सैन्य ऑपरेशन व कार्यप्रणालाओं का दिखावा बिना ADGPI या सेना की स्वीकृति के किया जाना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज़ से भी चिंतास्पद है।


दायर याचिका में जानकारी दी गई है कि पार्टीज़ जिनके खिलाफ याचिका है, उनमें Ministry of Information and Broadcasting, Central Board of Film Certification (CBFC), Additional Directorate General of Public Information (ADGPI), निर्माता, निर्देशक व प्रोडक्शन हाउस शामिल हैं। कोर्ट से दलील है कि या तो फिल्म की रिलीज़ रोक जाए या कम‑से‑कम मेजर शर्मा के परिजनों के लिए निजी स्क्रीनिंग हो। याचिका में अनुरोध है कि आगे से किसी भी शहीद कर्मी की कहानी फिल्म आधारित बनाई जाए, तो पहले परिवार व सेना से लिखित अनुमति होनी चाहिए।


दूसरी ओर, फिल्म के निर्देशक आदित्य धार ने इस विवाद को स्पष्ट करते हुए कहा है कि "धुरंधर किसी भी असली सिपाही या मेजर मोहित शर्मा की ज़िंदगी पर आधारित नहीं है।" उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यदि भविष्य में ऐसी बायोपिक बनेगी, तो केवल परिवार की सहमति से और सम्मान के साथ बनाई जाएगी। उनकी प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट है कि निर्माता इस समय फिल्म को काल्पनिक स्पाई‑थ्रिलर के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।


फिल्म की रिलीज़ तिथि 5 दिसंबर तय है, लेकिन कोर्ट‑याचिका और सुरक्षा व संवेदनशीलता संबंधी दावों के चलते यह मामला फिलहाल अनिर्णित है। यदि न्यायालय फिल्म की रिलीज़ पर रोक लगाता है, तो यह केवल एक फिल्म विवाद नहीं बल्कि शहीदों के सम्मान, निजता और संवेदनशील सैन्य कार्यों के सार्वजनिकरण के नैतिक-वैधानिक पहलुओं पर प्रेसिडेंट तय कर सकता है।


Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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