आजकल हर जगह एक ही नाम की गूंज है और वह है चियान विक्रम। आखिर क्यों दुनिया इस दिग्गज कलाकार की दीवानी हो रही है? दरअसल, विक्रम सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि अभिनय की चलती-फिरती पाठशाला हैं। हाल ही में फिल्म थंगालान में उनके जबरदस्त अवतार और पीएस टू में आदित्य करिकलन के भावुक किरदार ने दर्शकों को फिर से उनका मुरीद बना दिया है। वह अपनी अदाकारी के लिए इस कदर समर्पित हैं कि किसी भी रोल के लिए अपना वजन बढ़ाना, घटाना या पूरी तरह अपनी कद-काठी बदल लेना उनके लिए बाएं हाथ का खेल है। यही वजह है कि उनकी तुलना अक्सर हॉलीवुड के क्रिश्चियन बेल से की जाती है। विक्रम का चियान बनने का सफर आसान नहीं था, लेकिन उनकी मेहनत ने उन्हें आज भारतीय सिनेमा के सबसे ऊंचे पायदान पर खड़ा कर दिया है।

विक्रम का जन्म तमिलनाडु में केनेडी जॉन विक्टर के रूप में हुआ था, लेकिन उन्होंने अपने फिल्मी करियर के लिए अपना नाम बदला जो उनके माता-पिता के नामों का एक खूबसूरत मिश्रण है। उनके पिता भी अभिनय में किस्मत आजमाना चाहते थे लेकिन उन्हें वो मुकाम नहीं मिला, जिसे विक्रम ने अपनी आंखों में बसा लिया था। कॉलेज के दिनों में एक भीषण एक्सीडेंट ने उन्हें तीन साल तक बिस्तर पर रखा और करीब तेईस सर्जरी से गुजरना पड़ा, पर उनके जज्बे ने हार नहीं मानी। नब्बे के दशक में डेब्यू करने के बाद उन्होंने काफी स्ट्रगल देखा, यहां तक कि उन्होंने दूसरे बड़े सितारों के लिए डबिंग भी की, जिसे वह गरिमापूर्ण काम मानते थे। उनका असली ब्रेक साल उन्नीस सौ निन्यानवे में आई फिल्म सेतु से आया, जहां से उन्हें 'चियान' नाम मिला और उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

उनकी अभिनय यात्रा में ढिल, जेमिनी, धूल और सामी जैसी हिट फिल्मों ने उन्हें एक मास हीरो बनाया, लेकिन उनकी असली ताकत उनके विविध किरदारों में छिपी थी। फिल्म काशी में एक अंधे गायक का रोल हो या पीतामगन में श्मशान में रहने वाला एक शांत व्यक्ति, विक्रम ने हर बार अपनी सीमाएं तोड़ीं। पीतामगन के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से नवाजा गया। उनकी सबसे चर्चित फिल्मों में से एक अन्नियन (अपरिचित) रही, जिसमें उन्होंने एक साथ तीन अलग-अलग व्यक्तित्वों को जीकर दुनिया को हैरान कर दिया। इसके बाद मणिरत्नम की रावण और रावणन में उन्होंने पुलिस और विद्रोही दोनों भूमिकाएं निभाकर अपनी वर्सटाइल इमेज को और मजबूत किया।

विक्रम की सबसे बड़ी खासियत उनका शारीरिक समर्पण है। शंकर की फिल्म आई के लिए उन्होंने अपना वजन छप्पन किलो तक घटा लिया और एक कूबड़ वाले व्यक्ति का किरदार निभाने के लिए कई घंटों तक मेकअप का दर्द सहा। उनकी हालिया रिलीज पोन्नियिन सेल्वन के दोनों भागों ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ कमाई की और उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के कई पुरस्कार दिलाए। वह सिर्फ एक एक्टर ही नहीं बल्कि एक बेहतरीन प्लेबैक सिंगर भी हैं, जिन्होंने 'ओ पोडु' जैसे सुपरहिट गानों को अपनी आवाज दी है। इसके अलावा वह समाज सेवा में भी काफी सक्रिय रहते हैं और यूएन हैबिटेट के यूथ एम्बेसडर के रूप में भी काम कर चुके हैं।

आज के दौर में जहां सितारे अपनी इमेज को लेकर डरे रहते हैं, वहीं विक्रम अपने किरदारों के साथ प्रयोग करने से नहीं कतराते। हाल ही में रिलीज हुई उनकी रस्टिक एक्शन थ्रिलर फिल्म वीर धीर सूरन को दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है और लोग इसे 'विंटेज चियान' की वापसी कह रहे हैं। उनका बेटा ध्रुव विक्रम भी अब अभिनय की दुनिया में कदम रख चुका है। अपनी पत्नी शैलजा और परिवार के साथ चेन्नई में रहने वाले विक्रम आज भी उसी ऊर्जा के साथ काम कर रहे हैं, जो उनकी पहली सफल फिल्म में थी। उनकी कहानी यह सिखाती है कि अगर आपके पास हुनर और धैर्य है, तो सफलता के शिखर तक पहुंचने से आपको कोई नहीं रोक सकता।

Pratahkal Newsroom

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