बॉलीवुड अभिनेत्री सेलिना जेटली हाल ही में दो अलग-अलग मोर्चों पर सुर्खियों में हैं। एक ओर वह अपने भाई, मेजर (रिटायर्ड) विक्रांत कुमार जेटली की गिरफ्तारी के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा रही हैं, तो वहीं दूसरी ओर उन्होंने बॉलीवुड में उम्र‑उपभेद (ageism) पर स्पष्ट और कड़ा रुख अपनाया है।

सेलिना जेटली ने कोर्ट में याचिका दायर कर केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय (MEA) से अनुरोध किया है कि उनके भाई को कानूनी और चिकित्सा सहायता मुहैया कराई जाए। यह कदम उनके परिवार की चिंता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। न्यायालय ने इस मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है और नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया है, ताकि परिवार और हिरासत केंद्र के बीच नियमित संपर्क सुनिश्चित किया जा सके।

मेजर विक्रांत कुमार जेटली की हिरासत की स्थिति पिछले 14 महीनों से चिंताजनक बनी हुई है। उनके परिवार ने लगातार प्रशासन और विदेश मंत्रालय से सहायता मांगी है। दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में विशेष रूप से निर्देश दिए हैं कि परिवार को नियमित जानकारी दी जाए और हिरासत में मौजूद व्यक्ति को प्रभावी कानूनी प्रतिनिधित्व उपलब्ध कराया जाए। इस प्रक्रिया ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सेलिना जेटली केवल अपने भाई की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायिक प्रणाली का सहारा ले रही हैं।

इसी बीच, सेलिना ने बॉलीवुड में उम्र‑उपभेद के खिलाफ सार्वजनिक पोस्ट साझा की है। उन्होंने कहा कि 39 वर्ष की उम्र पार करने के बाद उन्हें “अलग कर दिया जाए” जैसे संदेशों का सामना करना परेशान करने वाला है। अभिनेत्री ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उम्र किसी की क्षमता या आत्मविश्वास का पैमाना नहीं हो सकती। उनका कहना है कि वह अपने सफर को आत्मविश्वास और दृढ़ता के साथ जारी रखती हैं। यह बयान बॉलीवुड में महिलाओं के करियर और उम्र के संबंध में चल रहे दृष्टिकोण पर महत्वपूर्ण प्रकाश डालता है।

सेलिना जेटली का यह कदम न केवल परिवार और कानूनी मामले में उनकी सक्रिय भूमिका को दर्शाता है, बल्कि यह महिलाओं के अधिकार और करियर सुरक्षा के महत्व को भी उजागर करता है। उनका संदेश स्पष्ट है: उम्र केवल एक संख्या है और आत्मविश्वास, समर्पण और क्षमता ही व्यक्ति की पहचान है।

इन दोनों घटनाओं ने सेलिना जेटली को न केवल बॉलीवुड में बल्कि सामाजिक और कानूनी क्षेत्रों में भी एक सक्रिय और जिम्मेदार व्यक्तित्व के रूप में पेश किया है। उनकी लड़ाई और बयान दर्शाते हैं कि व्यक्तिगत और पेशेवर संघर्षों में भी व्यक्ति न्याय और समानता के लिए आवाज उठाता रह सकता है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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