भारतीय संगीत जगत के एक स्वर्णिम अध्याय के अवसान के बाद अब उस विरासत को जनकल्याण के माध्यम से अमर बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। महान गायिका आशा भोसले के निधन के बाद उनके भाई और सुप्रसिद्ध संगीतकार हृदयनाथ मंगेशकर ने एक ऐसी ऐतिहासिक परियोजना की घोषणा की है, जो न केवल संगीत जगत बल्कि चिकित्सा क्षेत्र में भी एक नई मिसाल कायम करेगी। मंगेशकर परिवार ने अपनी दो महान विभूतियों—लता मंगेशकर और आशा भोसले—की पावन स्मृति में एशिया का सबसे बड़ा अस्पताल निर्मित करने का संकल्प लिया है। यह संस्थान न केवल आधुनिक चिकित्सा का केंद्र होगा, बल्कि यह उस सेवा भाव का प्रतीक बनेगा जो इन दोनों बहनों ने अपनी कला के माध्यम से समाज को दिया।

हृदयनाथ मंगेशकर ने मीडिया से भावुक संवाद के दौरान इस विजन को साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए आवश्यक भूमि का अधिग्रहण पहले ही किया जा चुका है। 'लता-आशा मंगेशकर आयुर्विद्या संस्थान' के नाम से प्रस्तावित इस अस्पताल का उद्देश्य आम जनता को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। हृदयनाथ जी ने इस कार्य को दैवीय इच्छा पर छोड़ते हुए कहा कि वे इसे एशिया के सबसे बड़े चिकित्सा केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। चिकित्सा सेवाओं के साथ-साथ यहाँ एक आधुनिक म्यूजियम बनाने की भी योजना है, जहाँ मंगेशकर परिवार की दशकों पुरानी संगीत यात्रा को संजोया जाएगा। यह म्यूजियम केवल एक प्रदर्शनी स्थल न होकर एक शिक्षण केंद्र भी होगा, जहाँ आने वाली पीढ़ियां संगीत की बारीकियों को आधुनिक और संवादात्मक तरीके से सीख सकेंगी।

आशा भोसले का अंतिम संस्कार सोमवार को मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ संपन्न हुआ। 92 वर्ष की आयु में रविवार को उनका निधन हो गया था, जिसके बाद पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। शिवाजी पार्क में आयोजित अंतिम विदाई समारोह में फिल्म और संगीत जगत की तमाम हस्तियां मौजूद रहीं। आमिर खान, विक्की कौशल, तब्बू और विवेक ओबेरॉय जैसे अभिनेताओं के साथ-साथ संगीतकार अनु मलिक और गायक अनूप जलोटा ने भी नम आंखों से अपनी प्रिय 'आशा ताई' को विदाई दी। उनके पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटकर 'गार्ड ऑफ ऑनर' दिया गया, जो उनके प्रति राष्ट्र के सम्मान को दर्शाता है।

संगीत जगत के साथियों ने अपनी कला के माध्यम से उन्हें अनूठी श्रद्धांजलि दी। गायक शान और सुदेश भोसले ने अंतिम संस्कार के दौरान उनका प्रसिद्ध गीत 'अभी न जाओ छोड़कर' गाकर उपस्थित जनसमूह को भावुक कर दिया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी कमी महसूस की जा रही है, जिसका प्रमाण श्रेया घोषाल के लंदन कॉन्सर्ट में मिला। श्रेया ने अपने 'अनस्टॉपेबल वर्ल्ड टूर' के दौरान आशा जी के कालजयी गीतों को गाकर उन्हें नमन किया। यह दर्शाता है कि आशा भोसले की आवाज सरहदों के पार भी उतनी ही जीवंत है।

इस दुखद घड़ी में सबसे मार्मिक क्षण आशा भोसले की पोती जनाई भोसले के रहे। जनाई, जो अपनी दादी के अत्यंत निकट थीं, अंतिम संस्कार के दौरान अत्यंत व्याकुल नजर आईं। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने पहले भावुक संदेश में दुनिया भर से मिल रहे प्यार और सम्मान के लिए आभार व्यक्त किया। जनाई ने लिखा कि उनकी दादी इस अथाह प्रेम की हकदार थीं और वे हमेशा सबके दिलों में जीवित रहेंगी। यह अस्पताल परियोजना इसी प्रेम और सम्मान को एक स्थायी स्वरूप देने की दिशा में मंगेशकर परिवार का सबसे बड़ा कदम है। यह चिकित्सा संस्थान आने वाले समय में लाखों जीवन बचाने का माध्यम बनेगा, जो स्वर कोकिलाओं की सबसे सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

Next Story