पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के शांत शहर जियागंज में इन दिनों एक सादा-सा भोजनालय राष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बना हुआ है। वजह है देश के सुप्रसिद्ध गायक अरिजीत सिंह, जिनके परिवार द्वारा संचालित ‘हेशेल’ नामक रेस्तरां मात्र 40 रुपये में पौष्टिक और घर जैसा भोजन उपलब्ध करा रहा है। महंगे और ग्लैमरस सेलिब्रिटी रेस्टोरेंट्स के दौर में यह पहल अपने उद्देश्य और संवेदनशीलता के कारण अलग पहचान बना रही है।



‘हेशेल’ किसी आलीशान सजावट या हाई-प्रोफाइल लॉन्च के कारण नहीं, बल्कि अपनी सामाजिक सोच के कारण सुर्खियों में है। यहां परोसी जाने वाली थाली सादी, पौष्टिक और किफायती है, जिसे खास तौर पर छात्रों, दैनिक मजदूरों और स्थानीय निवासियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। 40 रुपये की कीमत में उपलब्ध यह भोजन उन लोगों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आया है, जिनके लिए बढ़ती महंगाई के बीच संतुलित आहार एक चुनौती बन चुका है।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस भोजनालय का संचालन अरिजीत सिंह का परिवार कर रहा है। उद्देश्य स्पष्ट है—लाभ कमाना नहीं, बल्कि समुदाय की जरूरतों को समझते हुए उन्हें सहारा देना। यही कारण है कि ‘हेशेल’ अब स्थानीय लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।



इसी बीच अरिजीत सिंह के प्लेबैक सिंगिंग से हालिया रिटायरमेंट की खबरों ने भी उनके प्रशंसकों को चौंकाया है। हालांकि आधिकारिक स्तर पर विस्तृत बयान सामने नहीं आया है, लेकिन उनके करियर की उपलब्धियों को देखते हुए यह खबर संगीत जगत में बड़ी हलचल का कारण बनी हुई है। दो दशकों से अधिक समय तक हिंदी सिनेमा और भारतीय संगीत उद्योग में अपनी आवाज़ का जादू बिखेरने वाले अरिजीत सिंह ने कई सुपरहिट गीतों से पहचान बनाई। रोमांटिक और भावनात्मक गीतों के पर्याय बन चुके इस गायक ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रियता हासिल की है।

उनकी अनुमानित कुल संपत्ति (नेटवर्थ) सैकड़ों करोड़ रुपये आंकी जाती है, जिसमें संगीत कार्यक्रमों, रिकॉर्डिंग्स, ब्रांड एंडोर्समेंट्स और अंतरराष्ट्रीय टूर से होने वाली आय शामिल है। इसके बावजूद जियागंज जैसे छोटे शहर में किफायती भोजनालय की पहल उनकी जड़ों से जुड़े रहने की भावना को दर्शाती है।


यह पहल केवल एक रेस्तरां खोलने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक व्यापक संदेश देती है—सफलता के शिखर पर पहुंचने के बाद भी समाज से जुड़ाव संभव है। बढ़ती खाद्य महंगाई के दौर में 40 रुपये की थाली उपलब्ध कराना एक व्यावहारिक और मानवीय कदम माना जा रहा है। अरिजीत सिंह का यह कदम उनके व्यक्तित्व के उस पहलू को सामने लाता है, जो मंच की चमक-दमक से अलग, जमीन से जुड़ा और समाज के प्रति संवेदनशील है। जियागंज का ‘हेशेल’ अब केवल एक भोजनालय नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकार का प्रतीक बनकर उभर रहा है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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