नेशनल अवॉर्ड विजेता अरिजीत सिंह ने प्लेबैक सिंगिंग छोड़ने का फैसला किया है, जानिए जियागंज से ग्लोबल चार्ट्स तक के उनके सफर की प्रमुख उपलब्धियां।

पश्चिम बंगाल के जियागंज से करियर की शुरुआत करने वाले अरिजीत सिंह एक लाइव कंसर्ट के दौरान प्रशंसकों का अभिवादन करते हुए।
आज के दौर में अगर किसी एक आवाज़ ने सरहदों को पार कर इंडिया से लेकर ग्लोबल म्यूज़िक चार्ट्स तक अपना परचम लहराया है, तो वो नाम है अरिजीत सिंह। साल २०२६ तक आते-आते स्पॉटिफाई पर दुनिया के सबसे ज्यादा फॉलो किए जाने वाले आर्टिस्ट का खिताब अपने नाम करना कोई मामूली उपलब्धि नहीं है। पिछले सात सालों से लगातार भारत के सबसे ज्यादा स्ट्रीम होने वाले सिंगर बने रहने के बाद, जब उन्होंने अचानक प्लेबैक सिंगिंग से रिटायरमेंट का इशारा दिया, तो पूरी इंडस्ट्री और फैंस के बीच एक खलबली मच गई। हर कोई बस यही जानना चाहता है कि पश्चिम बंगाल के एक छोटे से कस्बे जियागंज से निकले इस साधारण से दिखने वाले लड़के में आखिर ऐसा क्या जादू है, जिसने उसे संगीत की दुनिया का बेताज बादशाह बना दिया।
अरिजीत की यह कामयाबी किसी रातों-रात मिली शोहरत की कहानी नहीं है, बल्कि इसके पीछे सालों का कड़ा संघर्ष छिपा है। साल २००५ में एक रियलिटी शो के जरिए अपने सफर की शुरुआत करने वाले अरिजीत ने लंबे समय तक फिल्म इंडस्ट्री की चकाचौंध के पीछे रहकर काम किया। उन्होंने म्यूज़िक डायरेक्टर प्रीतम के साथ जुड़कर संगीत की बारीकियों को समझा और अपनी पहचान बनाने के लिए जी-तोड़ मेहनत की। असली मोड़ साल २०१३ में आया जब फिल्म आशिकी २ के गाने तुम ही हो ने रातों-रात उन्हें घर-घर की पहचान बना दिया। यह सिर्फ एक गाना नहीं था, बल्कि एक ऐसा इमोशन था जिसने हर टूटे दिल को मरहम दिया और अरिजीत को सीधे सफलता के शिखर पर बैठा दिया।
इसके बाद तो जैसे हिट गानों का एक कभी न खत्म होने वाला सिलसिला शुरू हो गया। चन्ना मेरेया, कबिरा, खैरियत, तुझे कितना चाहने लगे, केसरिया और हालिया ब्लॉकबस्टर सजनी जैसे गानों ने साबित कर दिया कि अरिजीत हर जॉनर के मास्टर हैं। उनकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि उन्होंने खुद को सिर्फ रोमांटिक गानों के दायरे में कैद नहीं रखा। जहां एक तरफ घुंघरू जैसे गानों में उन्होंने ईडीएम वाइब्स के साथ डांस फ्लोर पर आग लगाई, वहीं मस्त मगन जैसे गानों में सूफी टच देकर रूह को सुकून पहुंचाया। उनकी आवाज़ में जो एक कशिश है और जिस तरह से वो हर शब्द के साथ अपना दर्द और अहसास पिरोते हैं, वही उनकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है।
उनकी इस बेमिसाल लेगेसी को अवॉर्ड्स का भी भरपूर साथ मिला है। दो नेशनल अवॉर्ड्स और आठ फिल्मफेयर अवॉर्ड्स के साथ-साथ साल २०२५ में मिला पद्म श्री सम्मान उनके कद को और भी ऊंचा करता है। फिल्म लापता लेडीज के गाने सजनी के लिए मिला उनका आठवां फिल्मफेयर अवॉर्ड उन्हें दिग्गज किशोर कुमार के ऐतिहासिक रिकॉर्ड के बराबर खड़ा कर देता है। हालांकि, इतनी बड़ी सफलता और रिकॉर्ड्स के बावजूद अरिजीत की सादगी सबको हैरान कर देती है। वो आज भी मुंबई की ग्लैमरस लाइफस्टाइल से कोसों दूर अपने होमटाउन में सादा जीवन जीना पसंद करते हैं। लाइमलाइट से दूर रहने की उनकी यही सादगी फैंस के बीच उन्हें और भी ज्यादा लोकप्रिय बनाती है।
अरिजीत सिंह आज महज एक सिंगर नहीं बल्कि संगीत की दुनिया में एक बड़ा मूवमेंट बन चुके हैं। उन्होंने उस दौर में मेलोडी को दोबारा मेनस्ट्रीम सिनेमा में वापस लाया, जब शोर-शराबे वाले संगीत का बोलबाला था। उन्होंने नई पीढ़ी को यह सिखाया कि बिना किसी तामझाम के, सिर्फ सादगी और रूहानियत भरे संगीत से भी चार्टबस्टर बनाए जा सकते हैं। यही वजह है कि आम लोगों से लेकर क्रिकेट के दिग्गज विराट कोहली और बड़े-बड़े ग्लोबल आर्टिस्ट्स तक, हर कोई उनका मुरीद है। जब उन्होंने प्लेबैक सिंगिंग से पीछे हटने का फैसला सुनाया, तो संगीत प्रेमियों को ऐसा महसूस हुआ जैसे एक स्वर्णिम युग का अंत हो रहा हो। अरिजीत का संगीत और उनका सफर हमेशा आने वाले कलाकारों के लिए एक प्रेरणा बना रहेगा।

