आज के दौर में जब म्यूजिक इंडस्ट्री भारी बीट्स और शोर-शराबे वाले गानों से भरी हुई है, तब एक ऐसी आवाज उभरकर आई है जिसने सादगी को ही अपना सबसे बड़ा हथियार बना लिया है। हम बात कर रहे हैं अनुव जैन की, जिन्होंने भारतीय इंडी म्यूजिक सीन को एक बेहद सॉफ्ट, इमोशनल और रिलेटेबल वाइब दी है। अनुव के गाने लाउड नहीं होते, लेकिन वे सीधे सुनने वाले के दिल की गहराइयों में उतर जाते हैं। हुस्न और जो तुम मेरे हो जैसे गानों ने चार्ट्स पर नंबर वन बनकर यह साबित कर दिया है कि बिना किसी ओवर-प्रोडक्शन के भी म्यूजिक करोड़ों लोगों की रूह को छू सकता है। आज स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर उनकी बादशाहत इस बात का सबूत है कि लोग दिखावे से ज्यादा इमोशन्स को अहमियत दे रहे हैं।

लुधियाना में जन्मे और पले-बढ़े अनुव की कहानी भी उतनी ही पर्सनल है जितने कि उनके गाने। उनकी सफलता के पीछे संघर्ष और अपनों को खोने का वो दर्द छिपा है, जिसने उन्हें एक गहरी सोच वाला गीतकार बना दिया। महज सत्रह साल की उम्र में अपने पिता को खोने के बाद पैदा हुए अकेलेपन और टीनेज इमोशन्स ने उन्हें गीत लिखने की तरफ धकेला। उन्होंने सोलह साल की उम्र से ही लिखना शुरू कर दिया था और मेरी बातों में तू उनका पहला लिखा हुआ गाना बना। वह दौर उनके लिए सिर्फ करियर बनाने का नहीं, बल्कि अपने जज्बात जाहिर करने का एक जरिया था, और शायद यही वजह है कि उनके हर शब्द में आज भी एक अजीब सी सच्चाई महसूस होती है।

अनुव के करियर में बड़ा बदलाव बारिशें गाने के साथ आया, जो देखते ही देखते एक स्लीपर हिट बन गया। किसी बड़े म्यूजिक लेबल के बिना ही यह गाना लाखों लोगों की प्लेलिस्ट का हिस्सा बना और स्पॉटिफाई पर सौ मिलियन से ज्यादा स्ट्रीम्स का आंकड़ा पार कर गया। इसके बाद अलग आसमान और गुल जैसे गानों ने लॉकडाउन के दौरान लोगों के घरों और दिलों में एक खास जगह बना ली। उस वक्त जब पूरी दुनिया ठहर सी गई थी, अनुव का संगीत लोगों के अकेलेपन और उनके अहसासों का बैकग्राउंड म्यूजिक बन गया। उन्होंने अपनी सादगी से यह दिखा दिया कि एक कलाकार को अपनी बात कहने के लिए सिर्फ एक गिटार और सच्ची आवाज की जरूरत होती है।

अनुव की सबसे बड़ी खासियत उनका मिनिमल स्टाइल है, जहां वे अक्सर सिर्फ एक एकूस्टिक गिटार या यूकुलेले के साथ अपनी रॉ आवाज में कहानी सुनाते नजर आते हैं। वे जोजी और नोवो एमोर जैसे अंतरराष्ट्रीय कलाकारों से प्रेरित हैं, लेकिन उन्होंने भारत में अपनी एक बिल्कुल अलग पहचान बनाई है। यही कारण है कि आज उन्हें देश के सबसे ज्यादा स्ट्रीम किए जाने वाले इंडी कलाकारों में गिना जाता है और साल दो हजार तेईस में उन्हें फोर्ब्स थर्टी अंडर थर्टी की प्रतिष्ठित लिस्ट में भी जगह मिली। उनकी सफलता यह दर्शाती है कि अगर कहानी कहने का अंदाज सच्चा हो, तो भाषा या शैली की कोई सीमा नहीं होती।

साल दो हजार तेईस में रिलीज हुआ हुस्न उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट रहा, जिसने कुछ ही महीनों में करोड़ों स्ट्रीम्स हासिल कर लिए। इसके बाद जो तुम मेरे हो के साथ उन्होंने अपनी कंसिस्टेंसी बरकरार रखी। साल दो हजार पच्चीस में उन्होंने अफसोस गाने के जरिए एपी ढिल्लों के साथ कोलैबोरेशन और कोक स्टूडियो भारत के अर्ज किया है के माध्यम से अपनी वर्सटाइल गायकी का परिचय दिया। हालांकि कुछ लाइव परफॉरमेंस को लेकर उन्हें आलोचना का सामना भी करना पड़ा, लेकिन फिल्म इंडस्ट्री के बड़े नाम उनके समर्थन में खड़े दिखे, जो यह साबित करता है कि वे सिर्फ एक ट्रेंडिंग आर्टिस्ट नहीं बल्कि एक विकसित होते हुए संगीतकार हैं।

उनकी पर्सनल लाइफ भी हाल ही में काफी चर्चा में रही जब उन्होंने चौदह फरवरी दो हजार पच्चीस को अपनी लॉन्ग-टाइम पार्टनर हृदि नारंग से शादी की। अनुव की जिंदगी और उनके संगीत दोनों में एक ऐसी ईमानदारी झलकती है जो फैंस को उनसे गहराई से जोड़ती है। उनके गाने अब सिर्फ सुने नहीं जाते, बल्कि महसूस किए जाते हैं। आज हर टूटते दिल या अधूरी मोहब्बत की दास्तां के पीछे कहीं न कहीं अनुव जैन की मखमली आवाज जरूर गूंजती है, जो उन्हें आज के युवाओं का सबसे चहेता सुपरस्टार बनाती है।

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Pratahkal Newsroom

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