आज जब भी हिंदी सिनेमा के सबसे भरोसेमंद और बहुमुखी एक्टर्स की बात होती है, तो Anupam Kher का नाम सबसे पहले लिया जाता है। चार दशक से ज्यादा लंबे करियर में 540 से अधिक फिल्मों में काम कर चुके अनुपम खेर इन दिनों फिर चर्चा में हैं। कभी “द कश्मीर फाइल्स” में अपने इमोशनल किरदार से लोगों को रुलाते हैं, तो कभी इंटरनेशनल प्रोजेक्ट्स में भारतीय कलाकारों का नाम रोशन करते नजर आते हैं। उनकी आने वाली फिल्म में रवींद्रनाथ टैगोर का किरदार भी खूब सुर्खियां बटोर रहा है। यही वजह है कि सोशल मीडिया से लेकर फिल्म इंडस्ट्री तक हर जगह अनुपम खेर की चर्चा हो रही है।

शिमला के एक साधारण कश्मीरी पंडित परिवार में जन्मे अनुपम खेर का सफर बिल्कुल आसान नहीं था। उनके पिता फॉरेस्ट डिपार्टमेंट में क्लर्क थे और घर में कोई फिल्मी बैकग्राउंड नहीं था। थिएटर के लिए उनका जुनून उन्हें पंजाब यूनिवर्सिटी और फिर नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा तक ले गया। मुंबई पहुंचने के बाद उन्होंने स्ट्रगल के वो दिन भी देखे जब उन्हें रेलवे प्लेटफॉर्म पर रातें बितानी पड़ीं। लेकिन यही संघर्ष बाद में उनकी सबसे बड़ी ताकत बना। 1984 में महेश भट्ट की फिल्म “सारांश” ने उनकी जिंदगी बदल दी। पहली ही फिल्म में एक बुजुर्ग पिता का किरदार निभाकर उन्होंने ऐसा असर छोड़ा कि उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर अवॉर्ड मिल गया। यह किसी नए कलाकार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था।

इसके बाद अनुपम खेर ने खुद को सिर्फ एक तरह के रोल तक सीमित नहीं रखा। “कर्मा”, “तेजाब” और “चालबाज़” जैसी फिल्मों में खतरनाक विलेन बनकर डराया, तो “राम लखन”, “दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे” और “कुछ कुछ होता है” जैसी फिल्मों में अपनी कॉमिक टाइमिंग से लोगों को हंसाया। “डैडी” में उनकी परफॉर्मेंस इतनी दमदार थी कि उन्हें नेशनल अवॉर्ड तक मिला। 90 के दशक में शायद ही कोई बड़ी फिल्म रही हो जिसमें अनुपम खेर नजर न आए हों। “हम आपके हैं कौन”, “दिल”, “सौदागर”, “लम्हे”, “डर” और “मोहब्बतें” जैसी फिल्मों में उन्होंने हर बार साबित किया कि साइड रोल भी कहानी का सबसे मजबूत हिस्सा बन सकता है।

अनुपम खेर की सबसे खास बात यही रही कि उन्होंने खुद को समय के साथ लगातार बदला। जब बॉलीवुड बदल रहा था, तब भी वह अपनी जगह बनाए रहे। “खोसला का घोसला”, “अ वेडनेसडे”, “स्पेशल 26”, “बेबी” और “एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी” जैसी फिल्मों में उनके किरदार आज भी याद किए जाते हैं। सिर्फ भारत ही नहीं, उन्होंने हॉलीवुड में भी अपनी अलग पहचान बनाई। “बेंड इट लाइक बेकहम”, “सिल्वर लाइनिंग्स प्लेबुक”, “होटल मुंबई” और अमेरिकी शो “न्यू एम्स्टर्डम” में काम करके उन्होंने इंटरनेशनल लेवल पर भारतीय कलाकारों की मौजूदगी मजबूत की। ब्रिटिश फिल्म “द बॉय विद द टॉपनॉट” के लिए उन्हें बाफ्टा नॉमिनेशन तक मिला, जो किसी भी भारतीय कलाकार के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।

फिल्मों के अलावा अनुपम खेर एक लेखक, मोटिवेशनल स्पीकर और एक्टिंग गुरु के रूप में भी बेहद लोकप्रिय हैं। उनका एक्टिंग स्कूल “एक्टर प्रिपेयर्स” आज कई नए कलाकारों का सपना पूरा कर रहा है। उन्होंने किताबें लिखीं, टीवी शो होस्ट किए और अपने जीवन पर आधारित नाटक “कुछ भी हो सकता है” से लोगों को प्रेरित भी किया। सरकार ने भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री और पद्मभूषण जैसे सम्मान दिए। यही नहीं, वह सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहते हैं और अपनी जिंदगी के अनुभवों को खुलकर शेयर करते हैं।

आज अनुपम खेर सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि संघर्ष, मेहनत और लगातार खुद को बेहतर बनाने की मिसाल बन चुके हैं। उनका सफर इस बात का सबूत है कि अगर हुनर और जुनून हो, तो रेलवे प्लेटफॉर्म से लेकर ग्लोबल स्क्रीन तक पहुंचना भी मुमकिन है। शायद यही वजह है कि हर पीढ़ी के दर्शक उनसे खुद को जुड़ा हुआ महसूस करते हैं और अनुपम खेर आज भी बॉलीवुड के सबसे चर्चित और सम्मानित चेहरों में शामिल हैं।

Pratahkal Newsroom

Pratahkal Newsroom

प्रातःकाल न्यूज़-रूम, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, समयबद्ध और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा न्यूज़-रूम राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story