कौन हैं Amrish Puri? जिनकी आवाज सुनते ही आज भी याद आता है ‘मोगैंबो खुश हुआ’
40 साल की उम्र में बॉलीवुड डेब्यू करने वाले अमरीश पुरी ने 450 से ज्यादा फिल्मों और हॉलीवुड में अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया।

भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता अमरीश पुरी जिन्होंने अपनी दमदार आवाज और अभिनय से विलेन के किरदारों को एक नई पहचान दी।
भारतीय सिनेमा में अगर किसी विलेन ने हीरो से ज्यादा तालियां बटोरी हैं, तो उनमें सबसे बड़ा नाम Amrish Puri का है। उनकी भारी आवाज, आंखों का खौफ और स्क्रीन पर आते ही छा जाने वाला अंदाज आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है। सोशल मीडिया पर उनके डायलॉग्स से लेकर मीम्स तक वायरल होते रहते हैं और नई पीढ़ी भी उन्हें उतना ही पसंद करती है जितना 90 के दशक के दर्शक करते थे। “मोगैंबो खुश हुआ” सिर्फ एक डायलॉग नहीं, बल्कि भारतीय पॉप कल्चर का हिस्सा बन चुका है। यही वजह है कि अमरीश पुरी का नाम आते ही लोगों के दिमाग में डर, दम और शानदार एक्टिंग की तस्वीर बन जाती है।
22 जून 1932 को पंजाब के नवांशहर में जन्मे अमरीश पुरी का फिल्मी सफर बिल्कुल आसान नहीं था। पहली स्क्रीन टेस्ट में रिजेक्ट होने के बाद उन्होंने सरकारी नौकरी की, लेकिन एक्टिंग का जुनून कभी खत्म नहीं हुआ। थिएटर से शुरुआत करते हुए उन्होंने पृथ्वी थिएटर में काम किया और धीरे-धीरे अपनी अलग पहचान बनाई। दिलचस्प बात यह है कि फिल्मों में उन्हें सफलता 40 साल की उम्र के बाद मिली, जब ज्यादातर लोग अपने करियर का ढलान देख रहे होते हैं। लेकिन अमरीश पुरी ने उसी उम्र में ऐसा तूफान खड़ा किया कि फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।
80 और 90 का दशक आते-आते अमरीश पुरी बॉलीवुड के सबसे बड़े विलेन बन चुके थे। ‘विधाता’, ‘शक्ति’, ‘हीरो’, ‘नगीना’, ‘त्रिदेव’, ‘घायल’, ‘करण अर्जुन’, ‘कोयला’, ‘गदर’ और ‘नायक’ जैसी फिल्मों में उनका खौफनाक अंदाज दर्शकों को सीट से बांधे रखता था। लेकिन असली इतिहास उन्होंने ‘मिस्टर इंडिया’ में मोगैंबो बनकर रचा। उनकी हंसी, कॉस्ट्यूम और डायलॉग डिलीवरी इतनी आइकॉनिक बनी कि आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े विलेन की बात हो तो पहला नाम अमरीश पुरी का ही आता है। कहा जाता है कि उस दौर में वह सबसे ज्यादा फीस लेने वाले विलेन बन गए थे।
सिर्फ निगेटिव रोल ही नहीं, अमरीश पुरी ने पॉजिटिव और इमोशनल किरदारों में भी लोगों का दिल जीता। ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ में सख्त लेकिन भावुक पिता का रोल हो या ‘विरासत’, ‘परदेस’ और ‘घातक’ जैसे किरदार, उन्होंने हर भूमिका में जान डाल दी। कमल हासन के साथ ‘चाची 420’ में उनका कॉमिक अंदाज भी खूब पसंद किया गया। यही उनकी सबसे बड़ी ताकत थी कि वह हर किरदार में खुद को पूरी तरह बदल लेते थे। उनकी मौजूदगी ही फिल्म को बड़ा बना देती थी।
हॉलीवुड तक में अमरीश पुरी का जलवा देखने को मिला। स्टीवन स्पीलबर्ग की फिल्म ‘इंडियाना जोन्स एंड द टेम्पल ऑफ डूम’ में उनका ‘मोला राम’ किरदार दुनियाभर में चर्चित हुआ। स्पीलबर्ग खुद उन्हें दुनिया का सबसे बेहतरीन विलेन कह चुके थे। सिर मुंडवाने वाला उनका लुक इतना लोकप्रिय हुआ कि उन्होंने बाद में उसे अपनी पहचान बना लिया। थिएटर से लेकर बॉलीवुड और हॉलीवुड तक, अमरीश पुरी ने हर मंच पर साबित किया कि असली स्टार वही होता है जो हर किरदार में जान डाल दे।
12 जनवरी 2005 को अमरीश पुरी ने इस दुनिया को अलविदा कहा, लेकिन उनकी आवाज और अंदाज आज भी अमर हैं। तीन फिल्मफेयर अवॉर्ड जीतने वाले इस महान अभिनेता ने 450 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और हर पीढ़ी के दर्शकों के दिल में अपनी अलग जगह बनाई। आज भी जब भारतीय सिनेमा के सबसे ताकतवर कलाकारों की बात होती है, तो अमरीश पुरी का नाम सबसे ऊपर नजर आता है।

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