शोले के गब्बर सिंह से लेकर शतरंज के खिलाड़ी तक, अभिनेता अमजद खान के थिएटर संघर्ष और वर्सेटाइल अभिनय की कहानी।

आज भी अगर कोई पूछ ले, “कितने आदमी थे?” तो लोगों के दिमाग में सबसे पहले एक ही चेहरा घूमता है और वो है Amjad Khan का। हिंदी सिनेमा में कई विलेन आए और गए, लेकिन गब्बर सिंह जैसा डर, वैसी आवाज और वैसी स्क्रीन प्रेजेंस शायद ही कोई दोबारा बना पाया। यही वजह है कि दशकों बाद भी अमजद खान का नाम पॉप कल्चर का हिस्सा बना हुआ है। उनकी डायलॉग डिलीवरी, आंखों का खौफ और चेहरे की मुस्कान ने उन्हें सिर्फ एक अभिनेता नहीं बल्कि बॉलीवुड का सबसे आइकॉनिक विलेन बना दिया।

12 नवंबर 1940 को पेशावर में जन्मे अमजद खान फिल्मी माहौल में बड़े हुए। उनके पिता Jayant खुद मशहूर अभिनेता थे। स्कूल और कॉलेज के दिनों से ही अमजद थिएटर में एक्टिव थे और स्टेज पर अपनी एक्टिंग से लोगों को चौंकाने लगे थे। उन्होंने बॉम्बे यूनिवर्सिटी से फिलॉसफी में मास्टर्स किया और फारसी साहित्य की भी पढ़ाई की। साहित्य और शायरी से उनका गहरा रिश्ता था। यही वजह थी कि उनकी बातचीत में एक अलग तहजीब और गहराई दिखाई देती थी। फिल्मों में आने से पहले उन्होंने थिएटर में काफी स्ट्रगल किया और छोटे-मोटे रोल निभाए।

फिर आया साल 1975 और फिल्म Sholay ने उनकी जिंदगी बदल दी। गब्बर सिंह का किरदार पहले किसी और को मिलने वाला था, लेकिन किस्मत ने ये रोल अमजद खान की झोली में डाल दिया। कहते हैं कि इस रोल की तैयारी के लिए उन्होंने चंबल के डकैतों पर किताबें पढ़ीं और अपने किरदार को पूरी तरह जी लिया। फिल्म रिलीज हुई और गब्बर सिंह हिंदुस्तान का सबसे बड़ा सिनेमाई विलेन बन गया। उस दौर में बच्चे तक उनके डायलॉग दोहराने लगे थे। उनकी एक्टिंग इतनी दमदार थी कि लोग हीरो से ज्यादा विलेन को याद रखने लगे। Amitabh Bachchan जैसे सुपरस्टार के सामने भी उनकी मौजूदगी अलग चमकती थी।

हालांकि अमजद खान सिर्फ खतरनाक विलेन बनकर नहीं रह गए। उन्होंने Muqaddar Ka Sikandar, Naseeb, Satte Pe Satta और Laawaris जैसी फिल्मों में अलग-अलग रंग दिखाए। Shatranj Ke Khiladi में नवाब वाजिद अली शाह का उनका किरदार देखकर क्रिटिक्स भी हैरान रह गए थे। वहीं Chameli Ki Shaadi और Qurbani जैसी फिल्मों में उनकी कॉमिक टाइमिंग ने साबित कर दिया कि वो सिर्फ डर पैदा करने वाले अभिनेता नहीं बल्कि पूरी तरह से वर्सेटाइल कलाकार थे। उन्होंने निर्देशन में भी हाथ आजमाया, लेकिन उनकी पहचान हमेशा स्क्रीन पर उनके दमदार अभिनय से ही बनी रही।

अमजद खान की जिंदगी सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं थी। 1976 में उनका एक भयानक एक्सीडेंट हुआ जिसने उनकी सेहत पर गहरा असर डाला। बाद में बेल्स पाल्सी और बढ़ते वजन की वजह से उनके करियर को भी नुकसान पहुंचा, लेकिन उन्होंने काम करना नहीं छोड़ा। वो आखिरी समय तक फिल्मों में एक्टिव रहे। 27 जुलाई 1992 को हार्ट अटैक से उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी विरासत आज भी जिंदा है। बॉलीवुड में शायद ही कोई ऐसा अभिनेता हो जिसने विलेन के किरदार को उतनी ताकत दी हो जितनी अमजद खान ने दी। यही वजह है कि आज भी गब्बर सिंह सिर्फ एक किरदार नहीं बल्कि भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी पहचान माना जाता है।

Pratahkal Newsroom

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