कौन हैं अमिताभ बच्चन? बॉलीवुड के शहंशाह जिनकी आवाज़ आज भी गूंजती है
शुरुआती रिजेक्शन और आर्थिक तंगी का सामना करने के बाद अमिताभ बच्चन ने भारतीय सिनेमा में एंग्री यंग मैन के रूप में अपनी पहचान बनाई और कई राष्ट्रीय पुरस्कार जीते।

मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान अभिनेता अमिताभ बच्चन, जिन्होंने सिनेमा जगत में अपने योगदान के लिए दादा साहेब फाल्के और पद्म विभूषण जैसे सम्मान प्राप्त किए हैं।
आज भी जब बड़े पर्दे पर उनकी एंट्री होती है तो थिएटर में सीटियाँ और तालियाँ खुद-ब-खुद बजने लगती हैं। सोशल मीडिया से लेकर सिनेमा हॉल तक, हर जगह सिर्फ एक नाम ट्रेंड करता है—अमिताभ बच्चन। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनका जलवा ऐसा है कि नई पीढ़ी के सितारे भी उनके सामने फीके पड़ जाते हैं। ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में उनकी दमदार मौजूदगी हो या हालिया फिल्मों में उनका ग्रैंड अवतार, लोग आज भी उन्हें सिर्फ एक्टर नहीं, बल्कि एक इमोशन मानते हैं।
इलाहाबाद में जन्मे इस लंबे-चौड़े, गहरी आवाज़ वाले लड़के ने शुरुआत में काफी स्ट्रगल झेला। ऑल इंडिया रेडियो ने उनकी आवाज़ को रिजेक्ट कर दिया था, और शुरुआती फिल्में भी कुछ खास नहीं चलीं। लेकिन फिर आई ‘जंजीर’, जिसने उनकी किस्मत ही बदल दी। इसके बाद ‘दीवार’, ‘शोले’ और ‘डॉन’ जैसी फिल्मों ने उन्हें “एंग्री यंग मैन” बना दिया, जो उस दौर के गुस्से और बगावत की आवाज़ था। देखते ही देखते वह बॉलीवुड के सबसे बड़े स्टार बन गए और हर साल की सबसे बड़ी हिट फिल्मों का हिस्सा बनने लगे।
उनकी खासियत सिर्फ एक्शन या डायलॉग डिलीवरी तक सीमित नहीं रही। ‘कभी कभी’ में रोमांस, ‘अमर अकबर एंथनी’ में कॉमेडी, और ‘काला पत्थर’ में इमोशन—हर किरदार में उन्होंने खुद को ढाला। 80 के दशक में ‘कुली’ के सेट पर हुए हादसे ने पूरे देश को हिला दिया था, लेकिन मौत को मात देकर उनकी वापसी ने उन्हें एक जीवित किंवदंती बना दिया। यही वजह है कि लोग उन्हें सिर्फ स्टार नहीं, बल्कि प्रेरणा मानते हैं।
90 के दशक में करियर थोड़ा धीमा पड़ा और बिजनेस में नुकसान ने उन्हें लगभग कर्ज में डुबो दिया। लेकिन साल 2000 में ‘मोहब्बतें’ और टीवी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ ने उनकी किस्मत फिर पलट दी। इसके बाद ‘बागबान’, ‘ब्लैक’, ‘पा’, ‘पीकू’ और ‘पिंक’ जैसी फिल्मों में उन्होंने साबित कर दिया कि असली कलाकार उम्र का मोहताज नहीं होता। चार बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार जीतकर उन्होंने इतिहास रच दिया, जो आज भी एक रिकॉर्ड है।
आज अमिताभ बच्चन सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि एक संस्था हैं। सात राष्ट्रीय पुरस्कार, सत्रह फिल्मफेयर अवॉर्ड्स, पद्म श्री, पद्म भूषण, पद्म विभूषण और दादा साहेब फाल्के पुरस्कार जैसे सम्मान उनके नाम हैं। उनकी गहरी आवाज़, दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और लगातार खुद को नया साबित करने की भूख ने उन्हें “सदी का महानायक” बना दिया है। यही वजह है कि दशकों बाद भी उनका क्रेज कम नहीं हुआ, बल्कि हर नई पीढ़ी के साथ और बढ़ता जा रहा है।

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