आज अगर बॉलीवुड म्यूज़िक में कुछ अलग, कुछ हटके और ताज़ा वाइब सुनाई देती है, तो उसके पीछे एक ही बड़ा नाम गूँजता है और वो है अमित त्रिवेदी। नैना दा क्या कसूर, इकतारा, लंदन ठुमकदा और इक्क कुड़ी जैसे गाने आज भी हर उम्र के लोगों की प्लेलिस्ट पर राज कर रहे हैं। अमित की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वो हर फिल्म के लिए एक बिल्कुल नया साउंड क्रिएट करते हैं। वो घिसे-पिटे फॉर्मूला को रिपीट करने के बजाय रिस्क लेने में यकीन रखते हैं और यही वजह है कि आज म्यूजिक इंडस्ट्री से लेकर सोशल मीडिया तक हर जगह उनके काम की चर्चा हो रही है।

मुंबई के बांद्रा की गलियों में जन्मे अमित त्रिवेदी का सफर उतना ग्लैमरस नहीं रहा है जितना आज नजर आता है। बचपन से ही उन्हें इलेक्ट्रॉनिक इंस्ट्रूमेंट्स का जबरदस्त शौक था, लेकिन कामयाबी का रास्ता थिएटर, विज्ञापनों और छोटे इंडिपेंडेंट प्रोजेक्ट्स से होकर गुजरा। कॉलेज के दिनों में उन्होंने ओम द फ्यूजन बैंड बनाया था और छोटे-मोटे गिग्स के जरिए अपनी पहचान बनानी शुरू की थी। मैकडॉनल्ड्स और एयरटेल जैसे बड़े ब्रांड्स के लिए जिंगल्स बनाते-बनाते उन्होंने अपने क्राफ्ट को इतना मजबूत कर लिया कि फिल्म इंडस्ट्री के बड़े पारखी उन्हें नोटिस करने पर मजबूर हो गए।

अमित त्रिवेदी के करियर का असली टर्निंग पॉइंट फिल्म देव डी से आया, जिसने बॉलीवुड म्यूजिक की दुनिया को हिलाकर रख दिया। उस दौर में इमोशनल अत्याचार जैसा एक्सपेरिमेंटल गाना बनाना एक बहुत बड़ा रिस्क था, लेकिन इसी गाने ने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया। इसके तुरंत बाद वेक अप सिड का रूहानी गाना इकतारा और उड़ान का संजीदा संगीत इस बात का सबूत था कि अमित सिर्फ शोर-शराबे वाले एक्सपेरिमेंट ही नहीं, बल्कि भावनाओं की गहराई को भी बखूबी समझते हैं। उनकी संगीत शैली में एक ऐसी मिट्टी की खुशबू और आधुनिकता का मेल है जो सीधे दिल पर दस्तक देता है।

समय के साथ अमित त्रिवेदी हर जॉनर के उस्ताद बनकर उभरे। फिल्म क्वीन के गाने लंदन ठुमकदा ने जहां हर शादी को अपना एंथम दिया, वहीं लुटेरा के गानों ने पुरानी दुनिया की यादें ताजा कर दीं। उड़ता पंजाब का रॉ और एजी म्यूजिक उनके विद्रोही अंदाज को दिखाता है, तो अंधाधुन के नैना दा क्या कसूर ने उन्हें नई पीढ़ी का सबसे पसंदीदा कंपोजर बना दिया। अमित की यही वर्सेटिलिटी उन्हें बाकी संगीतकारों की भीड़ से कोसों दूर खड़ा करती है क्योंकि उनके म्यूजिक में कभी भी दोहराव नहीं दिखता।

उनके इस असाधारण टैलेंट को न केवल जनता ने सराहा, बल्कि क्रिटिक्स ने भी उन्हें सलाम किया है। देव डी के लिए नेशनल अवार्ड जीतना और फिल्मफेयर में लगातार नॉमिनेशंस मिलना इस बात का प्रमाण है कि वे सिर्फ कमर्शियल हिट्स ही नहीं, बल्कि क्वालिटी म्यूजिक भी डिलीवर करते हैं। आईपीएल के एंथम से लेकर आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप के ऑफिशियल सॉन्ग तक, उनकी पहुंच सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रही है। उन्होंने साबित कर दिया है कि एक संगीतकार के रूप में उनका विजन ग्लोबल है और वो हर बड़े मंच पर अपनी छाप छोड़ने की काबिलियत रखते हैं।

आज सफलता के शिखर पर होने के बावजूद अमित त्रिवेदी रुकने को तैयार नहीं हैं। अपने इंडिपेंडेंट लेबल एटी आजाद के जरिए वो नए कलाकारों को मंच दे रहे हैं और बॉलीवुड की मुख्यधारा से अलग हटकर फ्रेश म्यूजिक क्रिएट कर रहे हैं। उनकी पूरी जर्नी इस बात की मिसाल है कि अगर आप अपने साउंड पर भरोसा रखते हैं और कुछ नया करने का साहस दिखाते हैं, तो आप पूरी इंडस्ट्री का गेम बदल सकते हैं। अमित त्रिवेदी आज सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि एक म्यूजिकल रिवोल्यूशन बन चुके हैं जो भारतीय संगीत को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं।

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Pratahkal Newsroom

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