आलिया भट्ट का बड़ा बयान: 'वैश्विक स्तर पर महिला प्रधान फिल्मों की सफलता के बावजूद भारतीय सिनेमा आज भी पुरुषों को ही साधने में जुटा, सिर्फ एक ही जेंडर पर ध्यान क्यों?'
अभिनेत्री आलिया भट्ट ने 'द हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया' से बातचीत में भारतीय फिल्म जगत की पुरुष-प्रधान सोच को चुनौती देते हुए लिंग-तटस्थ कहानियों पर जोर दिया।

बॉलीवुड अभिनेत्री आलिया भट्ट एक साक्षात्कार के दौरान भारतीय सिनेमा में फिल्मों को केवल पुरुष दर्शकों को ध्यान में रखकर बनाए जाने के ढर्रे पर अपनी बात रखती हुईं।
ग्लोबल बॉक्स ऑफिस पर जहां हॉलीवुड की महिला प्रधान फिल्में लगातार अपना दबदबा बना रही हैं और कमाई के नए रिकॉर्ड स्थापित कर रही हैं, वहीं भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की सोच आज भी पुरानी रूढ़ियों में कैद है। मशहूर बॉलीवुड अभिनेत्री आलिया भट्ट ने भारतीय सिनेमा की इसी मानसिकता पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा है कि देश का फिल्म जगत आज भी बड़े पैमाने पर मुख्य रूप से केवल पुरुष दर्शकों को रिझाने और उन्हें ध्यान में रखकर फिल्में बनाने पर केंद्रित है। कान्स फिल्म फेस्टिवल में हिस्सा लेने पहुंचीं अभिनेत्री ने वैश्विक मंच से भारतीय फिल्मों में 'जेंडर न्यूट्रल' यानी लिंग-तटस्थ कहानियों की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया है। आलिया के अनुसार, सिनेमा का पूरा ध्यान केवल बेहतरीन कहानियों पर होना चाहिए, न कि इस बात पर कि फिल्म का मुख्य कलाकार महिला है या पुरुष।
'द हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया' के साथ एक विशेष बातचीत के दौरान आलिया भट्ट ने गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर महिला दर्शकों का क्या? उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों ने यह साफ तौर पर साबित कर दिया है कि महिला केंद्रित फिल्में भी बहुत बड़ी व्यावसायिक सफलता (मैसिव कमर्शियल सक्सेस) हासिल कर सकती हैं। भारतीय फिल्म उद्योग का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यहाँ बॉक्स ऑफिस कलेक्शन और आंकड़ों को लेकर होने वाली अधिकांश चर्चाएं हमेशा इसी धारणा के इर्द-गिर्द घूमती हैं कि सिनेमाघरों में जाने वाले बहुसंख्यक दर्शक पुरुष ही होते हैं। यही वजह है कि फिल्म निर्माता हमेशा तथाकथित "मास ऑडियंस" (आम दर्शकों) को ही अपना मुख्य टारगेट मानकर फिल्में बनाते हैं।
आलिया भट्ट ने इस स्थापित ढर्रे को चुनौती देते हुए सवाल खड़ा किया कि अगर सभी फिल्में सिर्फ पुरुषों को ही ध्यान में रखकर डिजाइन की जाएंगी, तो फिर महिला दर्शकों की पसंद और उनकी मौजूदगी का क्या होगा? हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि वह फिल्म निर्माताओं से पुरुष दर्शकों को फिल्मों से बाहर करने या उन्हें छोड़ने के लिए नहीं कह रही हैं, बल्कि उनका मानना है कि फिल्मों को पूरी तरह से "जेंडर-अग्नॉस्टिक" (लिंग से परे) होना चाहिए, जहां केवल और केवल कहानी को ही सबसे बड़ी प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए कि फिल्म में नायक एक पुरुष है या महिला, बल्कि सिर्फ कहानी मायने रखनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में उन्हें सिनेमाघरों में बड़े पर्दे पर और अधिक महिला प्रधान फिल्में देखने को मिलेंगी।
वैश्विक मंच पर अपने इस बेबाक बयान के अलावा, आलिया भट्ट इस साल कान्स फिल्म फेस्टिवल में अपने शानदार फैशन सेंस और लुक्स को लेकर भी इंटरनेट पर लगातार सुर्खियां बटोर रही हैं। उत्सव में अपनी पहली उपस्थिति के लिए अभिनेत्री ने एक बेहद खूबसूरत और स्वप्निल (ड्रीमी) गाउन चुना था, जिसमें स्वीटहार्ट नेकलाइन और फ्रेंच रिविएरा से प्रेरित बारीक डिटेलिंग की गई थी, जिसने प्रशंसकों को एक राजकुमारी का अहसास कराया। वहीं, अपने दूसरे रेड कार्पेट आउटिंग के लिए आलिया ने प्लंजिंग नेकलाइन और बांहों के चारों ओर एक नाटकीय दुपट्टा-शैली (ड्रामाटिक दुपट्टा-स्टाइल) के ड्रेप से सजे पीच-टोन्ड बॉडी-हगिंग कॉउचर गाउन को चुनकर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। अगर वर्क फ्रंट की बात करें, तो आलिया भट्ट जल्द ही यशराज फिल्म्स के बहुचर्चित स्पाई यूनिवर्स की पहली महिला प्रधान फिल्म 'अल्फा' में मुख्य भूमिका में नजर आने वाली हैं, जिसमें उनके साथ बॉबी देओल और शरवरी वाघ भी बेहद महत्वपूर्ण और केंद्रीय भूमिकाओं में दिखाई देंगे। वैश्विक मंच पर आलिया का यह रुख भारतीय सिनेमा में बड़े बदलाव का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

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