अक्षय कुमार की फिल्म ‘भूत बंगला’ के वर्ल्ड टेलीविजन प्रीमियर के मौके पर हॉरर कॉमेडी, फैंटेसी की दुनिया और कॉमेडी के अंदाज को लेकर उनकी सोच सामने आई है। अभिनेता का मानना है कि किसी भी काल्पनिक कहानी को दर्शकों से जोड़ने के लिए उसके पीछे ठोस वजह होनी चाहिए। उनके अनुसार, हॉरर और कॉमेडी का मेल दर्शकों को एक ही समय में डर और हंसी का अनुभव देता है, लेकिन इसके लिए कहानी और परिस्थितियों का स्वाभाविक होना जरूरी है।

फैंटेसी फिल्मों में कहानी और किरदारों के पीछे की वजह को महत्वपूर्ण बताते हुए अक्षय कुमार ने कहा कि हर चीज के पीछे कोई न कोई कारण होना चाहिए, फिर चाहे वह फैंटेसी की दुनिया ही क्यों न हो। उन्होंने कॉमिक बुक का उदाहरण देते हुए बताया कि उसमें भी हर किरदार की ताकत के पीछे कोई वजह होती है। यह समझना जरूरी है कि किसी किरदार को ताकत कहां से मिलती है, कोई इंसान कैसे बदलता है और उसका रूप क्यों बदल जाता है। उनके मुताबिक, असाधारण किरदारों और काल्पनिक परिस्थितियों के पीछे की वजह बताने से दर्शकों को फिल्म की बनाई हुई दुनिया समझने और उससे जुड़ने में मदद मिलती है।

‘भूत बंगला’ के वर्ल्ड टेलीविजन प्रीमियर पर हॉरर कॉमेडी की लोकप्रियता और दर्शकों की उम्मीदों पर बात करते हुए अक्षय कुमार ने कहा कि डर और कॉमेडी का मेल बेहद दिलचस्प होता है। डरावने दृश्य के दौरान दर्शक तनाव में रहते हैं और इंतजार करते हैं कि आगे क्या होने वाला है। इसी बीच अचानक कोई मजेदार पल आता है, जिससे तनाव खत्म हो जाता है और दर्शक हंसने लगते हैं। अक्षय के अनुसार, यही विरोधाभास हॉरर कॉमेडी को मनोरंजक बनाता है।

अभिनेता ने यह भी स्पष्ट किया कि कॉमेडी परिस्थितियों से स्वाभाविक रूप से निकलनी चाहिए। उसे जबरदस्ती कहानी में शामिल नहीं किया जा सकता। ‘भूत बंगला’ में भी यही कोशिश की गई है कि दर्शकों को एक पल डर का अनुभव हो और अगले ही पल वे हंसने लगें। फिल्म का प्रीमियर ज़ी सिनेमा पर हो रहा है, जिससे परिवार घर बैठे एक साथ इस मस्ती और पागलपन का आनंद ले सकते हैं। अक्षय ने दर्शकों को आराम से बैठकर फिल्म देखने और ऐसे अप्रत्याशित मजेदार पलों पर हैरान न होने की बात कही, जब अचानक उनकी हंसी छूट जाए।

कॉमेडी दृश्यों में अपने अंदाज की भूमिका पर अक्षय कुमार ने कहा कि इसका काफी हद तक संबंध सही समय पर सही बात कहने और आसपास की चीजों पर ध्यान देने से है। रोजमर्रा की जिंदगी में कई ऐसी मजेदार परिस्थितियां सामने आती हैं, जिनमें छिपी कॉमेडी का एहसास उस समय नहीं होता। एक अभिनेता के तौर पर उन छोटी-छोटी बातों को पर्दे पर उतारने का मौका मिलता है।

उन्होंने बताया कि कई बार चेहरे का साधारण-सा हावभाव या कुछ पल का ठहराव लंबे संवाद से भी ज्यादा हंसा सकता है। ‘भूत बंगला’ जैसी फिल्म में, जहां परिस्थितियां असामान्य हैं, वहां कॉमेडी का असर इस बात पर निर्भर करता है कि किरदार उन हालात पर कितनी सहजता से प्रतिक्रिया देता है। अभिनेता को अपने किरदार के रूप में परिस्थिति को गंभीरता से लेना पड़ता है, भले ही दर्शक उस पर हंस रहे हों। अक्षय के मुताबिक, यही सहजता कॉमेडी को प्रभावी बनाती है।

‘भूत बंगला’ के वर्ल्ड टेलीविजन प्रीमियर के अवसर पर अक्षय कुमार की ये बातें फिल्म के हॉरर और कॉमेडी के मेल को समझाती हैं। उनके अनुसार, फैंटेसी की दुनिया में दर्शकों का जुड़ाव कहानी के पीछे की वजहों से बनता है, जबकि हॉरर कॉमेडी में डर, सही समय और परिस्थितियों से उपजी स्वाभाविक हंसी मनोरंजन को खास बनाती है।

Pratahkal Bureau

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