निर्देशक नीरज यादव की आने वाली फिल्म 'चौहान', जिसमें अभिनेता अजय देवगन मुख्य भूमिका में हैं, रिलीज से पहले ही गंभीर विवादों के घेरे में आ गई है। फिल्म के टीजर के सामने आते ही क्षत्रिय परिषद ने इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। संगठन का आरोप है कि फिल्म में राजपूत समुदाय के गौरवशाली इतिहास को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश की जा रही है और राजपूत पहचान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है। क्षत्रिय परिषद ने इसे पूरी तरह से दुर्भाग्यपूर्ण और गैर-जिम्मेदाराना करार देते हुए फिल्म निर्माताओं के प्रति सख्त रुख अपनाया है।

संगठन का मानना है कि चौहान वंश का नाम इस्तेमाल करने के पीछे का उद्देश्य किसी ऐतिहासिक विरासत को सम्मान देना नहीं, बल्कि इसे चुनावी या वैचारिक नैरेटिव में फिट करने का एक प्रयास है। क्षत्रिय परिषद ने स्पष्ट रूप से कहा है कि चौहान एक ऐतिहासिक राजपूत वंश है, जिसका गौरवपूर्ण इतिहास रहा है। इसे किसी भी पक्षपाती अभियान या मीडिया द्वारा पैदा किए गए विवादों के साथ जोड़ना उचित नहीं है। सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में परिषद ने इस बात पर जोर दिया कि राजपूतों की पहचान को राजनीतिक नैरेटिव में घसीटना बंद होना चाहिए, क्योंकि यह समाज न तो इसकी मांग करता है और न ही इसका समर्थन करता है।

इतिहास के चित्रण पर भी संगठन ने अपनी गहरी चिंता जताई है। क्षत्रिय परिषद के अनुसार, भारतीय उपमहाद्वीप का अतीत इतना सरल नहीं है कि उसे संकीर्ण सांप्रदायिक विभाजनों में सिमटा दिया जाए। संगठन ने इतिहास के पन्नों से कई ऐसे उदाहरण पेश किए हैं जो स्पष्ट करते हैं कि मध्यकालीन राजनीतिक गठबंधन वफादारी, सैन्य रणनीति और राज्य संचालन पर आधारित थे, न कि वर्तमान में थोपे जा रहे सांप्रदायिक नैरेटिव पर। उन्होंने खानवा की लड़ाई में महाराणा सांगा के नेतृत्व में महमूद लोदी की भागीदारी, हल्दीघाटी के युद्ध में हकीम खान सूर की भूमिका और अन्य ऐतिहासिक घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि इतिहास को जिम्मेदारी से देखा जाना चाहिए।

टीजर को लेकर उपजे विवाद का एक मुख्य कारण इसमें इस्तेमाल किए गए संवाद और दृश्य भी हैं। अजय देवगन के वॉयसओवर संवाद 'पठानों से कह दो, चौहान आ रहा है' को लेकर सोशल मीडिया पर काफी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। आलोचकों और कई अन्य लोगों का आरोप है कि इस तरह के संवादों के जरिए एक विशेष समुदाय के प्रति दुर्भावना पैदा करने की कोशिश की गई है। अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने भी इस टीजर की आलोचना की है और इसमें कश्मीरी संदर्भों के गलत चित्रण पर सवाल उठाए हैं। स्वरा ने पैलेट गन के प्रभाव से जुड़े संवादों पर अपनी असहमति जताते हुए कहा कि यह मानवाधिकारों के उल्लंघन का विषय है, जिसे बॉलीवुड को इस तरह महिमामंडित नहीं करना चाहिए।

जियो स्टूडियोज और कलर येलो प्रोडक्शंस के बैनर तले बन रही यह फिल्म 1 अक्टूबर, 2027 को रिलीज होने के लिए निर्धारित है। फिलहाल इस फिल्म को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन और सोशल मीडिया पर बढ़ती तीखी बहस यह दर्शाती है कि ऐतिहासिक विषयों पर बनी फिल्मों के प्रति समाज की संवेदनशीलता कितनी अधिक है। क्षत्रिय परिषद ने राजनीतिक हस्तियों और फिल्म निर्माताओं से आग्रह किया है कि वे राजपूत विरासत को बांटने वाली राजनीति का जरिया न बनाएं और ऐतिहासिक जटिलताओं का सम्मान करें। यह मामला स्पष्ट करता है कि रचनात्मक स्वतंत्रता और ऐतिहासिक तथ्यों के सम्मान के बीच संतुलन बनाए रखना फिल्म उद्योग के लिए कितनी बड़ी चुनौती है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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