2019 रेप केस में आदित्य पंचोली का बड़ा कदम ; बॉम्बे हाई कोर्ट ने जारी किया नया नोटिस, क्या इस बार मिल पाएगी राहत?
बॉलीवुड अभिनेता अदित्य पंचोली ने बॉम्बे हाई कोर्ट में 2019 में उनके खिलाफ दर्ज रेप FIR को रद्द करने की याचिका दायर की। कोर्ट ने शिकायतकर्ता को 24 फरवरी 2026 की सुनवाई के लिए ताजा नोटिस जारी किया। मामले में गंभीर आरोप और देरी के कारण पंचोली FIR रद्द करने की मांग कर रहे हैं।

बॉलीवुड अब्भिनेता आदित्य पंचोली
बॉलीवुड अभिनेता अदित्य पंचोली एक बार फिर कानूनी विवाद के केंद्र में हैं। अभिनेता ने बॉम्बे हाई कोर्ट में 2019 में उनके खिलाफ दर्ज रेप FIR को रद्द करने की याचिका दायर की है। यह FIR मुंबई के वर्सोवा पुलिस स्टेशन में जून 2019 में दर्ज हुई थी और इसमें गंभीर आरोप शामिल हैं।
हाल ही में इस मामले की सुनवाई कोर्ट में हुई, जिसमें अंतिम आदेश जारी नहीं किया गया। इसके बजाय न्यायालय ने शिकायतकर्ता को अगली सुनवाई के लिए 24 फरवरी 2026 को उपस्थित होने का ताजा नोटिस जारी किया। यह मामला वर्षों के अंतराल के बाद फिर से कोर्ट की कार्यवाही में आया है और इसके चलते कानूनी प्रक्रिया अब नई दिशा में प्रवेश कर रही है।
यह पहली बार नहीं है जब पंचोली ने FIR को चुनौती दी हो। पहले भी 2022 में उनकी टीम ने यह तर्क दिया था कि मामले की जांच में वर्षों से कोई प्रगति नहीं हुई और FIR को सबूतों या पुलिस कार्रवाई की कमी के कारण रद्द किया जाना चाहिए। इस दलील के चलते अदालत ने मामले को गंभीरता से देखा और वर्तमान याचिका पर विचार कर रही है।
2019 के FIR में आरोप:
FIR में एक महिला बॉलीवुड अभिनेत्री ने पंचोली के खिलाफ कई गंभीर धाराओं के तहत शिकायत दर्ज कराई थी:
- धारा 376 – बलात्कार
- धारा 328 – जहर देकर चोट पहुँचाना
- धारा 384 – वसूली
- धारा 341 – गलत तरीके से रोकना
- धारा 342 – गैरकानूनी कैद
- धारा 323 – जानबूझकर चोट पहुँचाना
- धारा 506 – आपराधिक धमकी
इन आरोपों में यौन शोषण, धमकाने, कैद करने और शारीरिक चोट पहुँचाने के गंभीर आरोप शामिल हैं।
अदित्य पंचोली FIR रद्द क्यों चाहते हैं:
अदित्य पंचोली की याचिका के मुख्य तर्क निम्नलिखित हैं:
- शिकायत दर्ज करने में देरी – आरोप लगभग 15 साल पुराने होने का हवाला देते हुए, उनके वकील इसे “दुर्भावनापूर्ण” बताते हैं।
- सुप्रीम कोर्ट का भजन लाल फैसला – अदालतों के पास प्रारंभिक स्तर पर ऐसे मामले रद्द करने का अधिकार है यदि आरोप कमजोर या मनगढ़ंत प्रतीत हों।
- दर्ज रिकॉर्डिंग – पंचोली की टीम ने याचिका में एक बैठक की रिकॉर्डिंग पेश की, जिससे उनकी दलील है कि FIR दायर करने का मकसद गलत था।
- शिकायतकर्ता की गैर-उपस्थिति – पुलिस द्वारा जांच के लिए कई नोटिस जारी किए गए, लेकिन शिकायतकर्ता जांच में शामिल नहीं हुई, जिसे कोर्ट ने नोट किया और अब नए नोटिस जारी किए हैं।
फिलहाल बॉम्बे हाई कोर्ट ने FIR को रद्द करने या न करने का निर्णय नहीं दिया है। अगली सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलों और पुलिस की रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए अदालत निर्णय देगी। इस मामले की सुनवाई 24 फरवरी 2026 को निर्धारित है और इसके परिणाम का बॉलीवुड उद्योग और कानूनी प्रक्रिया दोनों पर ध्यान रहेगा।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
