84 साल के होने वाले हैं बॉलीवुड के जंपिंग जैक ; जानें कैसा था रवि से जीतेन्द्र तक का सफर
भारतीय सिनेमा के 'जंपिंग जैक' कहे जाने वाले अभिनेता जीतेन्द्र ने अपने करियर में 200 से अधिक फिल्मों में काम किया और बालाजी मोशन पिक्चर्स की स्थापना की।

हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता जीतेन्द्र की दो अलग-अलग फिल्मों के दृश्यों का संयोजन, जो उनके शुरुआती करियर और स्टारडम के दौर को प्रदर्शित करता है।
7 अप्रैल 2026 को हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता जीतेन्द्र, जिनका असली नाम रवी कपूर है, अपना 84वां जन्मदिन मना रहे हैं। छह दशकों से अधिक के करियर में उन्होंने न केवल अपने अभिनय और नृत्य से दर्शकों का मन मोह लिया, बल्कि हिंदी फिल्मों में एक नई ऊर्जा और स्टाइल का प्रतीक भी बने। ‘जंपिंग जैक’ के नाम से मशहूर जीतेन्द्र ने 200 से अधिक फिल्मों में काम किया और भारतीय सिनेमा की सुपरस्टार की श्रेणी में खुद को स्थापित किया।
जीतेन्द्र ने 1964 में फिल्म गीत गया पत्थरों ने से अपने करियर की शुरुआत की। हालांकि यह फिल्म व्यावसायिक रूप से सफल नहीं रही, लेकिन इससे उन्हें फिल्म उद्योग में अपनी पहचान बनाने का अवसर मिला। 1967 में फर्ज़ फिल्म के साथ उन्होंने स्टारडम हासिल किया। यह फिल्म तेलुगु फिल्म गुडचारी 116 की रीमेक थी और बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई। इसके साथ ही, उनके अनोखे नृत्य और अभिनय शैली ने दर्शकों के दिलों में एक अलग जगह बना दी।
1968 से लेकर 1971 तक उन्होंने सुआहग रात, आुलाद, मेरे हज़ूर, जीने की राह, हुमजोलि, और कारवाँ जैसी कई हिट फिल्मों में काम किया। कारवाँ ने न केवल भारत में बल्कि चीन सहित विदेशी बाजारों में भी धमाका किया। हालांकि 1972 से 1973 तक उनका करियर थोड़ा मंदा रहा, लेकिन बिदाई (1974) और खुशबू (1975) जैसी फिल्मों ने उन्हें पुनः प्रतिष्ठा दिलाई।
1977 से 1980 के दशक तक जीतेन्द्र ने लगातार हिट फिल्मों का सिलसिला जारी रखा। धरम वीर, अपनापन, किनारा, स्वर्ग नरक, जानी दुश्मन, आशा, फर्ज़ और कानून, हिम्मतवाला, तोहफा, मकसद, स्वर्ग से सुंदर और खुदगर्ज़ जैसी फिल्मों ने उन्हें उस समय के सबसे बड़े सितारों में शामिल कर दिया। उनके साथ-साथ उन्होंने 2000 के दशक में बालाजी मोशन पिक्चर्स की स्थापना की, जो हिंदी सिनेमा की अग्रणी निर्माण कंपनियों में से एक बन गई।
जीतेन्द्र का निजी जीवन भी उतना ही प्रेरणादायक रहा। उनकी पत्नी शोभा से मुलाकात तब हुई जब वे केवल 14 वर्ष की थीं। 1974 में उन्होंने शादी की। उनकी संतानें, बेटी एकता कपूर और बेटे तुषार कपूर, भी फिल्म और टेलीविजन उद्योग में अपनी पहचान बना चुके हैं।
जीतेन्द्र को उनके योगदान के लिए कई सम्मान मिल चुके हैं, जिनमें 2003 का फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड, 2002 का ज़ी गोल्ड बॉलीवुड मूवी अवार्ड और 2005 का स्क्रीन लाइफटाइम अचीवमेंट शामिल हैं। हिंदी सिनेमा में उनका योगदान न केवल उनके समय की फिल्मों में दिखाई देता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बना हुआ है। आज 84 वर्ष की आयु में भी उनका नाम और उनका योगदान भारतीय फिल्म उद्योग में अमिट है। जीतेन्द्र की फिल्मों ने मनोरंजन के साथ-साथ भारतीय सिनेमा की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती दी है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
