आमिर खान ने 'लव जिहाद' के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि गौरी स्प्रैट, किरण राव और रीना दत्ता में किसी ने भी धर्म परिवर्तन नहीं किया। 5 जुलाई, 2026 को हुई उनकी शादी, स्पेशल मैरिज एक्ट और कथित फतवे को लेकर क्या कहा, जानिए पूरी खबर।

तस्वीर में अभिनेता आमिर खान एक कार्यक्रम के दौरान दिखाई दे रहे हैं।
अभिनेता आमिर खान ने अपनी शादियों को लेकर चल रही "लव जिहाद" बहस पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि धर्म ने कभी भी उनके निजी रिश्तों को प्रभावित नहीं किया और उनकी किसी भी पत्नी ने इस्लाम धर्म स्वीकार नहीं किया।
यह विवाद सोशल मीडिया पर उस समय फिर से चर्चा में आया, जब कुछ राजनेताओं और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने गैर-मुस्लिम महिलाओं से आमिर खान की शादियों, जिनमें हाल ही में गौरी स्प्रैट से हुई शादी भी शामिल है, पर सवाल उठाए। रेडिफ के साथ बातचीत के दौरान आमिर खान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी सभी शादियां सिविल मैरिज थीं।
उन्होंने कहा, "न तो गौरी, न किरण और न ही रीना ने अपना धर्म बदला, क्योंकि हमारी शादियां सिविल मैरिज थीं। गौरी तो हिंदू भी नहीं हैं, वह ईसाई हैं और वह भी प्रैक्टिसिंग क्रिश्चियन नहीं हैं। समय के साथ जिंदगी और भी हास्यास्पद होती जा रही है।"
आमिर खान ने कहा कि उनके रिश्ते हमेशा आपसी सम्मान और व्यक्तिगत पसंद पर आधारित रहे हैं, न कि धार्मिक पहचान पर। उनके अनुसार, धर्म कभी भी उनके निजी जीवन में निर्णय लेने का आधार नहीं रहा।
उन्होंने यह भी बताया कि उनके परिवार में लंबे समय से अंतरधार्मिक विवाह होते रहे हैं और ऐसे रिश्तों को हमेशा स्वीकार किया गया है। उन्होंने कहा, "सच्चाई यह है कि हमारा परिवार बहुत समावेशी है। मेरी दोनों बहनों की शादी हिंदू परिवारों में हुई है। मेरी बेटी की भी शादी एक हिंदू से हुई है। मेरे कजिन मंसूर की शादी एक ईसाई से हुई है।"
आमिर खान की यह टिप्पणी उनकी 5 जुलाई, 2026 को गौरी स्प्रैट से हुई शादी के बाद सामने आई है। दोनों ने स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत एक निजी पंजीकृत समारोह में विवाह किया, जिसमें केवल परिवार के करीबी सदस्य और मित्र शामिल हुए थे।
आमिर खान की टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब उत्तर प्रदेश स्थित मुस्लिम पर्सनल दारुल इफ्ता के शाही चीफ मुफ्ती मौलाना चौधरी इब्राहिम हुसैन द्वारा उनके खिलाफ फतवा जारी किए जाने की खबरें भी सामने आई हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, संबंधित धर्मगुरु का कहना है कि कोई मुस्लिम पुरुष किसी गैर-मुस्लिम महिला से तब तक विवाह नहीं कर सकता, जब तक वह इस्लाम धर्म स्वीकार न कर ले। बताया गया कि आमिर खान और गौरी स्प्रैट के विवाह के बाद यह कथित फतवा जारी हुआ, जिसके बाद सोशल मीडिया पर अंतरधार्मिक विवाह को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई।

