आख़िरी सवाल: निखिल नंदा ने महात्मा गांधी और इमरजेंसी पर बनी फिल्म का किया समर्थन
बाबरी मस्जिद और इमरजेंसी जैसे संवेदनशील विषयों पर बनी फिल्म 'आख़िरी सवाल' को सेंसर कट्स और विवादों के बीच निर्माता निखिल नंदा का मजबूत साथ मिला है।

अभिनेता संजय दत्त अभिनीत और निर्माता निखिल नंदा द्वारा समर्थित राजनीतिक-ऐतिहासिक ड्रामा फिल्म 'आख़िरी सवाल' का आधिकारिक पोस्टर, जो 8 मई 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज के लिए निर्धारित है।
भारतीय फिल्म इंडस्ट्री केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज तक गहरे संदेश और विचार पहुंचाने का प्रभावी साधन भी मानी जाती है। थिएटरों में दर्शक जहां मनोरंजन के उद्देश्य से पहुंचते हैं, वहीं कुछ फिल्में अपनी विषयवस्तु और प्रस्तुति के जरिए सोच पर स्थायी प्रभाव छोड़ देती हैं। ऐसे ही एक प्रोजेक्ट फिल्म ‘आख़िरी सवाल’ को लेकर निर्माता Nikhil Nanda के समर्थन ने उद्योग में नई चर्चा खड़ी कर दी है।
निर्माता निखिल नंदा अपनी बेखौफ और अलग सोच के लिए पहचाने जाते हैं। ‘आख़िरी सवाल’ जैसी फिल्म को समर्थन देने का उनका निर्णय उनके कहानी कहने के जुनून और समाज पर प्रभाव छोड़ने की सोच को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। प्रोजेक्ट से जुड़े जोखिमों की जानकारी होने के बावजूद वे पूरी मजबूती के साथ इसके साथ खड़े रहे।
‘आख़िरी सवाल’ अपने विषय और प्रस्तुति के कारण एक साहसी और निडर फिल्म मानी जा रही है। इसमें इतिहास से जुड़े कई गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं, जिनमें महात्मा गांधी की हत्या से लेकर इमरजेंसी तक जैसे संवेदनशील मुद्दे शामिल हैं। इसके साथ ही बाबरी मस्जिद, महात्मा गांधी की हत्या और इमरजेंसी जैसे विवादित विषयों पर भी फिल्म बिना किसी लाग-लपेट के अपनी बात रखती है।
ऐसे संवेदनशील विषयों के कारण अधिकांश निर्माता राजनीतिक और सामाजिक जोखिमों को देखते हुए इनसे दूरी बनाना पसंद करते हैं। इसी पृष्ठभूमि में Nikhil Nanda का समर्थन महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिन्होंने आलोचनाओं और संभावित विवादों के बावजूद इस फिल्म के साथ खड़े रहने का निर्णय लिया।
आलोचकों ने भी स्वीकार किया है कि ‘आख़िरी सवाल’ को समर्थन देना एक बड़ा जोखिम था, क्योंकि इसके विषय राजनीतिक और सामाजिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं। फिल्म को सेंसर बोर्ड की कई कट्स का सामना करना पड़ा है और यह देशभर में बहस का विषय बनी हुई है। धार्मिक भावनाओं सहित कई संवेदनशील मुद्दों को उठाने के कारण इसके कंटेंट पर लगातार चर्चा होती रही है।
इसके बावजूद Nikhil Nanda पूरे समय इस प्रोजेक्ट के साथ मजबूती से जुड़े रहे। उनका यह रुख इस बात को रेखांकित करता है कि विवादों और अनिश्चितताओं के बावजूद भी ऐसी कहानियों को दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास जारी रहना चाहिए। इस फिल्म को लेकर जारी बहस और समर्थन ने इसे एक चर्चित परियोजना बना दिया है, जो अभिव्यक्ति और संवाद के माध्यम के रूप में सिनेमा की भूमिका को फिर से स्थापित करती है।

Pratahkal Bureau
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