बिहार विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बड़े पैमाने पर वोट चोरी हो रही है। इस दौरान उन्होंने कई बार फॉर्म 6 का जिक्र किया, जिससे अब लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा है — आखिर यह फॉर्म 6 क्या है और इसका चुनावी प्रक्रिया में क्या महत्व है? आइए जानते हैं कि इस फॉर्म के जरिए कैसे वोटर लिस्ट में बदलाव होता है और राहुल गांधी इसे लेकर क्यों इतने मुखर हैं।


राहुल गांधी Vs चुनाव आयोग; फॉर्म 6 की एंट्री से गरमाई सियासत

बिहार चुनाव से पहले देश की सियासत में एक नई बहस ने जन्म ले लिया है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि फॉर्म 6 के माध्यम से वोटर लिस्ट में फर्जीवाड़ा हो रहा है। उनका दावा है कि इस फॉर्म का दुरुपयोग करके कुछ क्षेत्रों में फर्जी मतदाता जोड़े जा रहे हैं, जो लोकतंत्र की नींव पर सवाल खड़े करता है।

क्या होता है फॉर्म 6? फॉर्म 6 चुनाव आयोग द्वारा जारी एक आधिकारिक फॉर्म है, जिसका उपयोग भारतीय नागरिक अपने वोटर आईडी कार्ड के लिए आवेदन करने या किसी नई निर्वाचन क्षेत्र में अपना नाम जोड़ने के लिए करते हैं। यह उन लोगों के लिए अनिवार्य है जो 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके हैं और पहली बार वोटर लिस्ट में शामिल होना चाहते हैं। इस फॉर्म को ऑनलाइन (voters.eci.gov.in) या ऑफलाइन दोनों तरीकों से भरा जा सकता है।
फॉर्म 6 भरने की प्रक्रिया: आसान लेकिन संवेदनशील ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत वोटर पोर्टल पर लॉगिन करके फॉर्म 6 भरा जा सकता है। इसमें व्यक्तिगत जानकारी जैसे नाम, जन्मतिथि, लिंग, पता और आधार विवरण (वैकल्पिक) भरने के बाद फोटो अपलोड और डिक्लेरेशन देना होता है। इसके बाद बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) या इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) द्वारा विवरण की जांच होती है। अगर सभी दस्तावेज़ सही पाए गए तो व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट में जुड़ जाता है और उसे वोटर आईडी कार्ड मिल जाता है।
राहुल गांधी के आरोप: लोकतंत्र में सेंध? राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि फॉर्म 6 का दुरुपयोग करके फर्जी वोटर बनाए जा रहे हैं, जिससे असली मतदाता की ताकत कमजोर हो रही है। उनका आरोप है कि कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में यह प्रक्रिया BJP के पक्ष में वोट ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल की जा रही है। उन्होंने बेंगलुरु सेंट्रल सीट का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस महज़ 3% अंतर से हारी, लेकिन 1 लाख से अधिक फर्जी वोट महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में जुड़े थे।
चुनाव आयोग का जवाब: सब कुछ पारदर्शी चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए जांच की बात कही है। साथ ही बताया कि बिहार में जारी प्रारूप मतदाता सूची में 91.32% फॉर्म 6 डिजिटाइज किए जा चुके हैं और किसी भी मतदाता को बिना कारण हटाया नहीं जाएगा। विशेष गहन पुनरीक्षण-2025 के तहत नए वोटर जोड़ने और डुप्लीकेट एंट्री हटाने का काम तेज़ी से किया जा रहा है।
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फॉर्म 6 लोकतंत्र की रीढ़, लेकिन सतर्कता ज़रूरी फॉर्म 6 भारतीय चुनावी प्रक्रिया में एक अहम भूमिका निभाता है, लेकिन इसकी पारदर्शिता बनाए रखना उतना ही जरूरी है। राहुल गांधी के आरोपों ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है, लेकिन अगर इन दावों में सच्चाई है तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों पर गहरा सवाल है। अब देखना होगा कि चुनाव आयोग इस मामले में कितनी पारदर्शिता और जवाबदेही दिखाता है।
Updated On 15 Sept 2025 4:39 PM IST
Editorial

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