EC vs राहुल गांधी; बयान पर गरमा गया सियासी पारा
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव आयोग और भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा सीट पर फर्जी मतदाता और डुप्लीकेट वोटिंग के ज़रिए कांग्रेस की हार सुनिश्चित की गई। साथ ही उन्होंने महाराष्ट्र में भी चुनावी प्रक्रिया में अनियमितताओं की बात कही।
राहुल गांधी का दावा: "3 फीसदी से भी कम अंतर से हारे, ये सामान्य नहीं!"
राहुल गांधी ने कहा कि बेंगलुरु सेंट्रल सीट पर कांग्रेस 3 प्रतिशत से भी कम अंतर से हारी थी। उन्होंने इस हार को 'सिस्टम की साजिश' बताया और कहा कि यह लोकतंत्र की आत्मा के साथ खिलवाड़ है। राहुल ने कहा: "बेंगलुरु सेंट्रल की महादेवपुरा विधानसभा में एकतरफा वोटिंग हुई, जबकि बाकी छह विधानसभा क्षेत्रों में बीजेपी पीछे रही। इस असंतुलन को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।" उनके अनुसार, महादेवपुरा क्षेत्र में 1,00,250 वोट फर्जी तरीके से डाले गए जो सीधा चुनाव परिणाम को प्रभावित करता है।
चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया: हलफनामा दें या सबूत पेश करें :
कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राहुल गांधी के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए उनसे हलफनामा देने या ठोस सबूत पेश करने की मांग की है। आयोग ने स्पष्ट कहा कि सार्वजनिक मंच से आरोप लगाने की बजाय उन्हें कानूनी रूप से सही तरीके से प्रस्तुत किया जाए।

राहुल गांधी का पलटवार: "जो मैंने कहा, वही मेरा हलफनामा है"
चुनाव आयोग की चेतावनी पर राहुल गांधी ने तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा: "मैं जो कुछ भी लोगों से कहता हूं, वही मेरा वचन है। इसे ही मेरा हलफनामा मानिए। हम चुनाव आयोग का ही डेटा दिखा रहे हैं, और इसी से गड़बड़ी उजागर हो रही है।" राहुल ने यह भी कहा कि उनकी टीम ने बेंगलुरु सेंट्रल के सभी सात विधानसभा क्षेत्रों का विश्लेषण किया, जिसमें सिर्फ महादेवपुरा में ही 'असामान्य' वोटिंग पैटर्न पाया गया।
राजनीतिक बवाल तय, विपक्ष हमलावर :
राहुल गांधी के इस बयान के बाद कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी चुनाव आयोग और भाजपा पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। विपक्ष का आरोप है कि पूरे चुनाव में तकनीकी हेरफेर और डेटा मैनेजमेंट के ज़रिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर किया गया।
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भाजपा की ओर से फिलहाल इस आरोप पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह विवाद संसद के मानसून सत्र में भी गूंज सकता है।
क्या होगा अगला कदम ?
अब सभी की निगाहें चुनाव आयोग की अगली प्रतिक्रिया और राहुल गांधी के संभावित कानूनी रुख पर टिकी हैं। अगर यह मामला अदालत या संसदीय जांच तक पहुंचता है, तो यह लोकतंत्र की पारदर्शिता और मतदाता प्रणाली की विश्वसनीयता पर एक बड़ी बहस को जन्म दे सकता है।
Editorial

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