भारत पर टैरिफ, चीन को गुस्सा; ट्रंप को बताया
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव ने नया मोड़ ले लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी है, जिससे कुल शुल्क 50% तक पहुंच गया है। यह कदम भारत के रूस से तेल खरीद जारी रखने के चलते उठाया गया है, और इसे लेकर राजनीतिक व कूटनीतिक गलियारों में भारी हलचल मच गई है।
अब इस मुद्दे पर चीन भी खुलकर भारत के समर्थन में सामने आ गया है। नई दिल्ली में चीन के राजदूत ने ट्रंप पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें "बदमाश" तक कह डाला। इस बयान से भारत-अमेरिका और चीन के त्रिकोणीय संबंधों में नई गर्माहट आ गई है।

भारत पर टैरिफ का असर: अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका :
अमेरिकी प्रशासन ने अपने बयान में कहा है कि यह निर्णय भारत की "लगातार निष्क्रियता और प्रतिशोध" की प्रतिक्रिया है। भारत पर लगाया गया यह टैरिफ उसके अमेरिका-निर्भर निर्यात को गहरा प्रभावित कर सकता है।
ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के मुताबिक, इससे भारत के निर्यात में 60% तक की गिरावट आ सकती है और GDP में करीब 1% की चोट का अनुमान है। इससे रत्न-आभूषण, वस्त्र और जूता उद्योग जैसे श्रम-प्रधान सेक्टर बुरी तरह प्रभावित होंगे। यह टैरिफ अगले 21 दिनों में प्रभावी हो सकता है।
चीन की तीखी प्रतिक्रिया: ट्रंप को बताया 'बदमाश'
भारत पर अमेरिकी टैरिफ के फैसले पर चीनी राजदूत शू फेइहोंग ने सार्वजनिक रूप से आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर बिना नाम लिए ट्रंप को "बदमाश" कहा और लिखा: "बदमाश को अगर एक इंच दिया जाए तो वह एक मील ले लेता है।" इसके साथ उन्होंने चीनी विदेश मंत्री वांग यी और ब्राजील के राष्ट्रपति के सलाहकार की बातचीत का अंश साझा किया, जिसमें कहा गया कि टैरिफ का यह प्रयोग संयुक्त राष्ट्र चार्टर और WTO नियमों का उल्लंघन है।

मोदी की संभावित चीन यात्रा: क्या होगी रणनीति ?
ट्रंप की कार्रवाई और चीन के समर्थन के बीच एक और बड़ी खबर सामने आई है — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगस्त के अंत में चीन का दौरा कर सकते हैं। यह दौरा अगर होता है, तो 2018 के बाद पहली बार मोदी और शी जिनपिंग की आमने-सामने मुलाकात होगी। पिछली मुलाकात अक्टूबर 2024 में रूस में हुई थी।
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यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और चीन भले ही रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी हों, लेकिन वैश्विक मंच पर एक-दूसरे से संवाद बनाए रखते हैं।
भारत ने जताया कड़ा विरोध :
भारत सरकार ने अमेरिका के इस कदम को अनुचित, अन्यायपूर्ण और पक्षपाती करार दिया है। सरकार ने कहा कि "भारत को निशाना बनाना गलत है, जबकि कई अन्य देश भी रूस से तेल खरीद रहे हैं।" विदेश मंत्रालय ने इस मामले को WTO में उठाने के संकेत दिए हैं, जिससे यह विवाद अब वैश्विक व्यापार मंच पर भी पहुंच सकता है।
Editorial

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