बांका बना उद्यमिता की मिसाल, बेरोजगार युवा बने सफल बिजनेस लीडर
बिहार का बांका जिला इन दिनों ग्रामीण उद्यमिता का नया उदाहरण बनकर उभर रहा है। यहां के युवाओं और महिलाओं ने मुख्यमंत्री उद्यमी योजनाओं की मदद से न सिर्फ खुद को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि कई अन्य लोगों को भी रोजगार के अवसर प्रदान किए हैं। राज्य सरकार के उद्योग विभाग द्वारा संचालित इन योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देना और सामाजिक-आर्थिक विकास की गति को तेज करना है। बांका जिले के कई युवाओं ने इन योजनाओं का लाभ उठाकर अपने जीवन को नई दिशा दी है।


पटना, 07 अगस्त: बिहार का बांका जिला इन दिनों ग्रामीण उद्यमिता का नया उदाहरण बनकर उभर रहा है। यहां के युवाओं और महिलाओं ने मुख्यमंत्री उद्यमी योजनाओं की मदद से न सिर्फ खुद को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि कई अन्य लोगों को भी रोजगार के अवसर प्रदान किए हैं।
राज्य सरकार के उद्योग विभाग द्वारा संचालित इन योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देना और सामाजिक-आर्थिक विकास की गति को तेज करना है। बांका जिले के कई युवाओं ने इन योजनाओं का लाभ उठाकर अपने जीवन को नई दिशा दी है।
🔹 मंतोष कुमार: रेडीमेड गारमेंट्स से खड़ा किया कारोबार
बांका निवासी मंतोष कुमार ने रेडीमेड कपड़ों का व्यवसाय शुरू किया। मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत 10 लाख रुपये की सहायता प्राप्त कर उन्होंने अपने कारोबार को आगे बढ़ाया। आज वे 8 लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार दे रहे हैं और 20 परिवारों की आजीविका से जुड़े हुए हैं। उनका सालाना टर्नओवर 50 लाख रुपये तक पहुंच चुका है।
🔹 मुकेश: ट्यूशन से फैक्ट्री तक का सफर
पहले होम ट्यूशन देने वाले मुकेश को मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना से 9 लाख रुपये की सहायता मिली। इस राशि से उन्होंने आइसक्रीम उत्पादन इकाई शुरू की। अब वे एक सफल उद्यमी हैं और 8 अन्य लोगों को रोजगार दे रहे हैं। उनकी सालाना आमदनी 10 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है। मुकेश कहते हैं, "अब मैं एक कंपनी का मालिक हूं और इसके लिए उद्योग विभाग का आभारी हूं।"
🔹 रंजीत कुमार सिंह: नोटबुक निर्माण से कमाई और रोज़गार
रंजीत कुमार सिंह ने भी मुख्यमंत्री योजना से 10 लाख रुपये की सहायता प्राप्त कर नोटबुक निर्माण का व्यवसाय शुरू किया। अब वे दो परिवारों को नियमित रोजगार दे रहे हैं और उनका वार्षिक टर्नओवर भी 10 लाख रुपये तक पहुंच चुका है।
🔹 महिलाएं भी बना रही हैं आत्मनिर्भरता की पहचान
मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना के अंतर्गत महिलाएं भी आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं:
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भाग्यश्री को 10 लाख रुपये की सहायता मिली, जिससे उन्होंने बेकरी उत्पादन इकाई शुरू की। वे अब 8 लोगों को रोजगार दे रही हैं और 7 परिवारों की आजीविका का साधन बन चुकी हैं।
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रूबी देवी ने पोहा (चूड़ा) उत्पादन के लिए 10 लाख रुपये की सहायता से व्यवसाय शुरू किया। वे 8 लोगों को रोजगार दे रही हैं और 5 परिवारों को प्रत्यक्ष रूप से आर्थिक सहयोग दे रही हैं। उनका वार्षिक टर्नओवर 12 लाख रुपये है।
🔹 राज्य सरकार का बड़ा प्रयास
2025-26 के बजट में मुख्यमंत्री उद्यमी योजनाओं के तहत 175 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ना है। बांका की ये कहानियां पूरे राज्य में एक नई प्रेरणा बन रही हैं और यह साबित कर रही हैं कि अगर सही दिशा और सहयोग मिले, तो गांवों से भी बड़े उद्यमी निकल सकते हैं।

