US-India टैरिफ जंग; आंकड़े पढ़कर दिमाग घूम जाएगा!
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को एक बार फिर टैरिफ को लेकर चेतावनी दी है। हालांकि, उन्होंने इस बार साफ कर दिया है कि भारत पर लगाए जाने वाले टैरिफ का प्रतिशत (percentage) उन्होंने कभी सार्वजनिक नहीं किया। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार (6 अगस्त) को ट्रंप ने कहा, “मैंने कभी भी भारत पर लगाए जाने वाले टैरिफ के प्रतिशत का खुलासा नहीं किया, लेकिन हम इस पर काम कर रहे हैं। देखते हैं आगे क्या होता है।”
ट्रंप ने खुद को कई बार ‘Tariff King’ कहा है और भारत पर आरोप लगाया है कि वह अमेरिका पर सबसे ज्यादा टैरिफ लगाता है। हालांकि, वास्तविक आंकड़े ट्रंप के दावों को गलत साबित करते हैं।
भारत पर ट्रंप का गुस्सा क्यों ?
ट्रंप ने यह बयान ऐसे समय में दिया है जब अमेरिका, भारत के रूस से कच्चे तेल खरीदने को लेकर नाराज है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि भारत बड़ी मात्रा में रूसी तेल खरीद रहा है और फिर उसे मुनाफे में बेच रहा है। इसी वजह से ट्रंप ने भारत पर 100% टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। हालांकि, बुधवार को उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी प्रतिशत तय नहीं किया।
ट्रंप ने आगे कहा, “हम देखेंगे क्या होता है और उसी समय निर्णय लेंगे। रूस के साथ एक मीटिंग भी होनी है।” उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि बैठक कहां होगी और किस विषय पर चर्चा होगी।
भारत कितना लगाता है टैरिफ ?
वास्तविक आंकड़ों की बात करें तो भारत, अमेरिकी निर्यात पर अपेक्षाकृत कम टैरिफ लगाता है। पिछले 30 वर्षों में भारत के टैरिफ में भारी गिरावट आई है। 1990 में जहां भारत का औसत टैरिफ 56% था, वहीं अब यह घटकर सिर्फ 4.6% रह गया है।एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का भारित टैरिफ (Weighted Tariff) वियतनाम, यूरोपीय संघ और इंडोनेशिया से भी कम है। उदाहरण के लिए:
  • भारत – 4.6%
  • यूरोपीय संघ (EU) – 5%
  • वियतनाम – 5.1%
  • इंडोनेशिया – 5.7%
भारित टैरिफ आयात की मात्रा पर आधारित होता है और इस पर वास्तविक ड्यूटी लागू की जाती है। वहीं साधारण टैरिफ भारत में करीब 15.98% है।
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अमेरिका-भारत विवाद बढ़ने के संकेत :
ट्रंप के बयानों से यह साफ है कि अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ सकता है। US-India Tariff Dispute को लेकर दुनियाभर में चर्चा है। अगर अमेरिका 100% टैरिफ लागू करता है तो यह भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को गहरा झटका दे सकता है।
Editorial

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