Satyapal Malik Death : सत्यपाल मलिक नहीं रहे; राजनीतिक गलियारों में गहरा सन्नाटा
सत्यपाल मलिक निधन : जम्मू-कश्मीर, गोवा, बिहार और मेघालय के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का मंगलवार (5 अगस्त) को निधन हो गया। वह 79 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे। दिल्ली स्थित राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में उन्होंने दोपहर 1:10 बजे अंतिम सांस ली। उनके निजी सचिव केएस राणा ने यह जानकारी दी। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, सत्यपाल मलिक को किडनी की गंभीर समस्या थी।
सत्यपाल मलिक के निधन की जानकारी उनके आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट एक्स (X) पर भी साझा की गई। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में कई अहम फैसलों और बयानों के जरिए सुर्खियां बटोरीं। वे किसानों के मुद्दों पर मुखर रहने और भ्रष्टाचार पर बेबाक राय देने के लिए जाने जाते थे।
अनुच्छेद 370 हटने के समय थे राज्यपाल :
सत्यपाल मलिक का नाम इतिहास में हमेशा जुड़ा रहेगा, क्योंकि अनुच्छेद 370 और 35ए हटाए जाने के समय वे जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल थे। 2019 में जब जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा खत्म कर केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया, तब वे उपराज्यपाल के पद पर भी रहे।
सत्यपाल मलिक का राजनीतिक सफर :
सत्यपाल मलिक का जन्म 24 जुलाई 1946 को उत्तर प्रदेश के बागपत में हुआ। उन्होंने मेरठ यूनिवर्सिटी से विज्ञान में स्नातक और एलएलबी की डिग्री प्राप्त की। छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहे। 1968-69 में वे छात्र संघ के अध्यक्ष बने और 1974 में पहली बार विधायक चुने गए।
उन्होंने कई राजनीतिक दलों के साथ काम किया, जिनमें भारतीय क्रांति दल, जनता दल, कांग्रेस, लोकदल, समाजवादी पार्टी और भाजपा शामिल हैं। वे 1980 से 1989 तक राज्यसभा सदस्य रहे और 1989 में अलीगढ़ से 9वीं लोकसभा सांसद चुने गए।
2012 में वे भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी बने।
राज्यपाल के रूप में कार्यकाल :
  • बिहार: सितंबर 2017 – अगस्त 2018
  • ओडिशा (प्रभारी): मार्च 2018 – अगस्त 2018
  • जम्मू-कश्मीर: अगस्त 2018 – अक्टूबर 2019
  • गोवा: नवंबर 2019 – अगस्त 2020
  • मेघालय: अगस्त 2020 – अक्टूबर 2022
नेताओं की प्रतिक्रियाएं :
रालोद प्रमुख जयंत चौधरी अस्पताल पहुंचे और श्रद्धांजलि अर्पित की। अखिलेश यादव ने लिखा, “सत्यपाल मलिक जी का निधन अत्यंत दुखद! ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें।” राकेश टिकैत ने कहा, “किसानों की आवाज उठाने वाले नेता का जाना बड़ी क्षति है।” केसी त्यागी ने उन्हें पश्चिमी यूपी की मजबूत आवाज बताया। प्रियंका गांधी ने कहा, “किसानों की मुखर आवाज अब खामोश हो गई।” सीएम स्टालिन ने ट्वीट किया, “उन्होंने सत्ता के सामने सच बोलने का साहस किया। इतिहास उन्हें याद रखेगा।”
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क्यों याद किए जाएंगे सत्यपाल मलिक ?
सत्यपाल मलिक को उनकी स्पष्टवादिता, किसानों के पक्ष में खड़े होने और सत्ता के सामने सच बोलने के साहस के लिए हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने कई बार सरकार के खिलाफ भी बयान देकर सुर्खियां बटोरीं। सत्यपाल मलिक निधन के बाद राजनितिक दौर के लिए यह सबसे बड़ी दुःखद घटना माना जा रहा है।
Editorial

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